मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ते जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद एक बार फिर युद्ध की स्थिति पैदा हो गई है। इसी बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है। हाल ही में अमेरिका ने इस क्षेत्र में कम से कम 15 युद्धपोत तैनात किए है जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना शायद ईरान के बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी यानी ब्लॉकेड करने की तैयारी कर रही है। अमेरिा के इस कदम के बाद क्षेत्र में हालात और अधिक बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
अब्राहम लिंकन समेत 11 वॉरशिप तैनात
अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) सहित 11 वॉरशिप को तैनात किया है। इसके अलावा त्रिपोली उभयचर तैयार समूह (Tripoli Amphibious Ready Group) के तीन जहाज भी क्षेत्र में मौजूद हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन से जहाज सीधे ब्लॉकेड मिशन में शामिल होंगे, क्योंकि ये सभी जहाज अलग अलग स्थानों पर फैले हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लॉकेड के लिए इन जहाजों को या तो स्वेज नहर (Suez Canal) से गुजरना होगा या फिर अफ्रीका के रास्ते लंबा समुद्री मार्ग अपनाना होगा।
ईरान न्यूक्लियर कार्यक्रम को रोकने के चलते विवाद
इस सैन्य तैयारी के पीछे मुख्य कारण ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम है। हाल ही में पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा, हम कई बातों पर सहमत हुए, लेकिन वे इस पर सहमत नहीं हुए, और मुझे लगता है कि वे आखिरकार मान जाएंगे। इस बयान से साफ है कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को रोकना चाहता है।
यूरेनियम वापस लेने की दी चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो कोई डील नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम को वापस लेगा, चाहे बातचीत से या बल प्रयोग से। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की कि ईरान न्यूक्लियर हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद भी समझौता नहीं हुआ तो स्थिति सुखद नहीं होगी। हालांकि उन्होंने आगे के सैन्य कदमों पर विस्तार से टिप्पणी नहीं की।




Navy is moving multiple minesweeping ships from the Pacific toward the Middle East, signaling preparations for a large-scale operation to clear Iranian
naval mines from the Strait of Hormuz.