सौर नीति 2019 के तहत वादा निभाने का आदेश भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा राजस्थान हाई कोर्ट ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों को राहत देते हुए राज्य सरकार को उसके वादों की याद दिलाई है। अदालत ने कहा कि सरकार घोषित प्रोत्साहनों से पीछे नहीं हट सकती और निवेशकों के अधिकारों को बीच में नहीं छीना जा सकता। कोर्ट ने सरकार के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें पहले से स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों पर बिजली ड्यूटी लगाई थी। कोर्ट ने फैसले में ‘प्रॉमिसरी एस्टॉपेल’ और ‘लेगिटिमेट एक्सपेक्टेशन’ जैसे महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के वादे बाध्यकारी होते हैं। अदालत ने माना कि सौर नीति 2019 के तहत 7 साल तक बिजली ड्यूटी में छूट का भरोसा देकर निवेशकों को आकर्षित किया गया था। ऐसे में जिन उद्यमियों ने इस भरोसे पर करोड़ों रुपये का निवेश किया, उनके साथ बीच में नियम बदलना न्यायसंगत नहीं है। इस आदेश से भीलवाड़ा के करीब 70 सौर उर्जा उत्पादकों को फायदा होगा। यह याचिका मेवाड़ चैंबर सहित कई औद्योगिक संगठनों और इकाइयों ने दायर की थी, जिनका कहना था कि अचानक ड्यूटी लगाने से उनकी वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो गई। आदेश के प्रमुख बिंदू 7 साल की छूट बरकरार – 10 मई 2022 के संशोधन से पहले चालू सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को कमर्शियल ऑपरेशन की तारीख से 7 साल तक बिजली ड्यूटी से छूट मिलेगी। सरकार की दलील खारिज- सरकार ने वित्तीय बाधाओं और सौर ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती पकड़ का हवाला देते हुए छूट वापस लेने की कोशिश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त माना। संशोधन केवल भविष्य के लिए- सरकार नीति बदल सकती है, लेकिन वह पहले से मिल रहे लाभों को पिछली तारीख से खत्म नहीं कर सकती।


