अररिया के जोकीहाट थाना क्षेत्र से महाराष्ट्र के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए रवाना हुए करीब 90 छात्रों को मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस ने संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया है। इस घटना के बाद छात्रों के अभिभावकों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। परिजन लगातार अपने बच्चों की सुरक्षित रिहाई की मांग कर रहे हैं। मदरसे में पढ़ाई के लिए निकले थे छात्र मिली जानकारी के अनुसार, तारण, बगडहरा, ठेंगापुर, उड़ानटोली, मटियारी समेत आसपास के गांवों के ये छात्र 10 मार्च को ट्रेन के जरिए महाराष्ट्र स्थित एक मदरसे में पढ़ाई करने के उद्देश्य से घर से निकले थे। परिवार वालों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बच्चे धार्मिक शिक्षा के लिए भेजे जा रहे थे। जबलपुर में पुलिस ने रोका, हिरासत में लिया यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने इन छात्रों को रोक लिया और संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया। पुलिस का दावा है कि एक व्यक्ति इन बच्चों को मजदूरी के लिए ले जा रहा था, जिस वजह से यह कार्रवाई की गई। अभिभावकों ने आरोपों को बताया गलत इधर, अभिभावकों ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि बच्चे केवल मदरसे में पढ़ाई करने के लिए जा रहे थे, न कि किसी मजदूरी के लिए। परिजनों का आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच और ठोस सबूत के बच्चों को हिरासत में रखना गलत है। जोकीहाट थाना पहुंचे परिजन, जताई नाराजगी घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक जोकीहाट थाना पहुंचे और पुलिस प्रशासन से संपर्क किया। परिजनों ने कहा, “हमारे बच्चे पढ़ने के लिए गए थे, लेकिन उन्हें संदेह के आधार पर रोक लिया गया। इससे पूरे परिवार में दहशत और चिंता का माहौल है।” पूर्व मुखिया और जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज बगडहरा के पूर्व मुखिया इम्तियाज उर्फ मुन्ना और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता औवेस आलम ने भी मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने जोकीहाट थानाध्यक्ष को मौखिक रूप से घटना की जानकारी दी और जबलपुर पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर छात्रों को जल्द रिहा किया जाए। परिजन बोले- बिना ठोस सबूत हिरासत अनुचित अभिभावकों का कहना है कि अगर पुलिस को किसी प्रकार का संदेह था, तो उन्हें उचित प्रक्रिया के तहत जांच करनी चाहिए थी। सभी छात्रों को एक साथ हिरासत में लेना और उन्हें रोके रखना न्यायसंगत नहीं है। अब तक नहीं आया पुलिस का आधिकारिक बयान इस पूरे मामले में अभी तक जबलपुर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। परिजन लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग जोकीहाट थाना क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को बिना भेदभाव के जांच करनी चाहिए और निर्दोष बच्चों को अनावश्यक परेशानी से बचाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षित वापसी की मांग तेज फिलहाल, अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को जल्द रिहा कर घर भेजा जाए, ताकि परिवारों को राहत मिल सके। अररिया के जोकीहाट थाना क्षेत्र से महाराष्ट्र के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए रवाना हुए करीब 90 छात्रों को मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस ने संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया है। इस घटना के बाद छात्रों के अभिभावकों में गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। परिजन लगातार अपने बच्चों की सुरक्षित रिहाई की मांग कर रहे हैं। मदरसे में पढ़ाई के लिए निकले थे छात्र मिली जानकारी के अनुसार, तारण, बगडहरा, ठेंगापुर, उड़ानटोली, मटियारी समेत आसपास के गांवों के ये छात्र 10 मार्च को ट्रेन के जरिए महाराष्ट्र स्थित एक मदरसे में पढ़ाई करने के उद्देश्य से घर से निकले थे। परिवार वालों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बच्चे धार्मिक शिक्षा के लिए भेजे जा रहे थे। जबलपुर में पुलिस ने रोका, हिरासत में लिया यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने इन छात्रों को रोक लिया और संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया। पुलिस का दावा है कि एक व्यक्ति इन बच्चों को मजदूरी के लिए ले जा रहा था, जिस वजह से यह कार्रवाई की गई। अभिभावकों ने आरोपों को बताया गलत इधर, अभिभावकों ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि बच्चे केवल मदरसे में पढ़ाई करने के लिए जा रहे थे, न कि किसी मजदूरी के लिए। परिजनों का आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच और ठोस सबूत के बच्चों को हिरासत में रखना गलत है। जोकीहाट थाना पहुंचे परिजन, जताई नाराजगी घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक जोकीहाट थाना पहुंचे और पुलिस प्रशासन से संपर्क किया। परिजनों ने कहा, “हमारे बच्चे पढ़ने के लिए गए थे, लेकिन उन्हें संदेह के आधार पर रोक लिया गया। इससे पूरे परिवार में दहशत और चिंता का माहौल है।” पूर्व मुखिया और जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज बगडहरा के पूर्व मुखिया इम्तियाज उर्फ मुन्ना और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता औवेस आलम ने भी मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने जोकीहाट थानाध्यक्ष को मौखिक रूप से घटना की जानकारी दी और जबलपुर पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर छात्रों को जल्द रिहा किया जाए। परिजन बोले- बिना ठोस सबूत हिरासत अनुचित अभिभावकों का कहना है कि अगर पुलिस को किसी प्रकार का संदेह था, तो उन्हें उचित प्रक्रिया के तहत जांच करनी चाहिए थी। सभी छात्रों को एक साथ हिरासत में लेना और उन्हें रोके रखना न्यायसंगत नहीं है। अब तक नहीं आया पुलिस का आधिकारिक बयान इस पूरे मामले में अभी तक जबलपुर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। परिजन लगातार प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग जोकीहाट थाना क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को बिना भेदभाव के जांच करनी चाहिए और निर्दोष बच्चों को अनावश्यक परेशानी से बचाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षित वापसी की मांग तेज फिलहाल, अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को जल्द रिहा कर घर भेजा जाए, ताकि परिवारों को राहत मिल सके।


