‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला मामले में लालू यादव को झटका:सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, CBI की FIR और चार्जशीट नहीं होगी रद्द; ट्रायल जारी रहेगा

‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला मामले में लालू यादव को झटका:सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, CBI की FIR और चार्जशीट नहीं होगी रद्द; ट्रायल जारी रहेगा

लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़े ट्रायल को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने सुनाया। हालांकि, अदालत ने लालू प्रसाद यादव को आंशिक राहत देते हुए कहा कि उन्हें ट्रायल की कार्रवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के सामने व्यक्तिगत पेश होने की ज़रूरत नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला लेने का अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास रहेगा। यानी, अब निचली अदालत इस पूरे मामले की मेरिट पर सुनवाई करते हुए आगे की कार्रवाई करेगी। लैंड फॉर जॉब केस-लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय 9 जनवरी 2026 को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के पूर्व CM लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी यादव और बेटी मीसा, हेमा पर आरोप तय किए। लालू परिवार के साथ कुल 41 लोगों पर आरोप तय किया। इन लोगों पर अब मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया था। सुनवाई को लेकर लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप-तेजस्वी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है। लालू परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह काम किया- कोर्ट राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि, ‘लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी।’ जज ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘अदालत संदेह के आधार पर यह पाती है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार (बेटियों, पत्नी और बेटों) के लिए अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की एक व्यापक साजिश रची थी।’ क्या है बिहार का नौकरी के बदले में जमीन घोटाला? बात 6 फरवरी 2008 की है। पटना के किशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख रुपए में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी काे बेच दी। यह जमीन की काफी कम कीमत थी। इसी साल किशुन देव राय के परिवार के 3 लोगों को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिल गई। CBI ने इसे लैंड फॉर जॉब घोटाला बताया। यानी नौकरी के बदले में जमीन लेना। यह मामला तब का है, जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े हुए हैं। नौकरी के बदले जमीन लेने के घोटाले में लालू और उनके परिवार वालों पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने का आरोप है। इस मामले में CBI ने मई 2022 में लालू और उनके परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज किया था। CBI के अनुसार इस तरह से लालू यादव के परिवार ने बिहार में 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में हासिल कर ली, जबकि उस समय के सर्कल रेट के अनुसार जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपए थी। खास बात ये है कि लैंड ट्रांसफर के ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया। CBI ने दायर की है चार्जशीट पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, बेटी और सांसद मीसा भारती, बेटी हेमा यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। 2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश CBI का कहना है कि ‘यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। 2004 से 2009 के बीच मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग अलग जोनों में बिहार के लोगों को “ग्रुप-डी” पदों पर बहाल किया गया।’ आरोप है कि इसके बदले में, इन व्यक्तियों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दी, जिसे बाद में उनके परिवार के सदस्यों ने अपने कब्जे में ले लिया। जांच एजेंसी ने कहा कि इस दौरान लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर की गईं और अधिकांश में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी।’ CBI ने आरोप पत्र में यह भी दावा किया है कि ‘जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के एवज में अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कर दीजिए। लालू परिवार के नाम जमीन लिखने वाले सभी आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था।’ सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों को ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। खासकर सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं कि उन्हें भी नाम मात्र की कीमत पर ज़मीन ट्रांसफर की गई थी। 2022 में सीबीआई ने मारे थे छापे CBI ने 2022 मई में लालू के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत लालू के करीबियों और परिजनों के 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी। CBI ने इस मामले में इस साल मई में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व CM राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा यादव और हेमा यादव के अलावा नौकरी पाने के बदले में कम कीमत में जमीन देने वाले कुछ अयोग्य उम्मीदवारों समेत 16 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज की थी। CBI ने 24 अगस्त को एक बार फिर से RJD नेताओं के यहां छापेमारी की थी। लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़े ट्रायल को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने सुनाया। हालांकि, अदालत ने लालू प्रसाद यादव को आंशिक राहत देते हुए कहा कि उन्हें ट्रायल की कार्रवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के सामने व्यक्तिगत पेश होने की ज़रूरत नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला लेने का अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास रहेगा। यानी, अब निचली अदालत इस पूरे मामले की मेरिट पर सुनवाई करते हुए आगे की कार्रवाई करेगी। लैंड फॉर जॉब केस-लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय 9 जनवरी 2026 को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के पूर्व CM लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी यादव और बेटी मीसा, हेमा पर आरोप तय किए। लालू परिवार के साथ कुल 41 लोगों पर आरोप तय किया। इन लोगों पर अब मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया था। सुनवाई को लेकर लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप-तेजस्वी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है। लालू परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह काम किया- कोर्ट राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि, ‘लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी।’ जज ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘अदालत संदेह के आधार पर यह पाती है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार (बेटियों, पत्नी और बेटों) के लिए अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की एक व्यापक साजिश रची थी।’ क्या है बिहार का नौकरी के बदले में जमीन घोटाला? बात 6 फरवरी 2008 की है। पटना के किशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख रुपए में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी काे बेच दी। यह जमीन की काफी कम कीमत थी। इसी साल किशुन देव राय के परिवार के 3 लोगों को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिल गई। CBI ने इसे लैंड फॉर जॉब घोटाला बताया। यानी नौकरी के बदले में जमीन लेना। यह मामला तब का है, जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े हुए हैं। नौकरी के बदले जमीन लेने के घोटाले में लालू और उनके परिवार वालों पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने का आरोप है। इस मामले में CBI ने मई 2022 में लालू और उनके परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज किया था। CBI के अनुसार इस तरह से लालू यादव के परिवार ने बिहार में 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में हासिल कर ली, जबकि उस समय के सर्कल रेट के अनुसार जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपए थी। खास बात ये है कि लैंड ट्रांसफर के ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया। CBI ने दायर की है चार्जशीट पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, बेटी और सांसद मीसा भारती, बेटी हेमा यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। 2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश CBI का कहना है कि ‘यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। 2004 से 2009 के बीच मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग अलग जोनों में बिहार के लोगों को “ग्रुप-डी” पदों पर बहाल किया गया।’ आरोप है कि इसके बदले में, इन व्यक्तियों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दी, जिसे बाद में उनके परिवार के सदस्यों ने अपने कब्जे में ले लिया। जांच एजेंसी ने कहा कि इस दौरान लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर की गईं और अधिकांश में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी।’ CBI ने आरोप पत्र में यह भी दावा किया है कि ‘जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के एवज में अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कर दीजिए। लालू परिवार के नाम जमीन लिखने वाले सभी आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था।’ सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों को ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। खासकर सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं कि उन्हें भी नाम मात्र की कीमत पर ज़मीन ट्रांसफर की गई थी। 2022 में सीबीआई ने मारे थे छापे CBI ने 2022 मई में लालू के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत लालू के करीबियों और परिजनों के 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी। CBI ने इस मामले में इस साल मई में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व CM राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा यादव और हेमा यादव के अलावा नौकरी पाने के बदले में कम कीमत में जमीन देने वाले कुछ अयोग्य उम्मीदवारों समेत 16 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज की थी। CBI ने 24 अगस्त को एक बार फिर से RJD नेताओं के यहां छापेमारी की थी।  

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