लखनऊ के कैसरबाग स्थित कला मण्डपम् प्रेक्षागृह में शनिवार को ‘परम्परा 2026: संगीत और नृत्य की एक शाम’ का आयोजन किया गया। पद्मजा कला संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय कथक गुरु डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव के निर्देशन में 80 से अधिक शिष्यों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन शिष्यों की आयु चार से पचास वर्ष के बीच थी। कार्यक्रम में पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि साहित्यकार पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह विशिष्ट अतिथि थीं। संस्थान के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कलाकारों के प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरक प्रस्तुति ‘रिदम ऑफ करेज’ से हुई। इस प्रस्तुति में ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ संदेश को कथक और अभिनय के माध्यम से दर्शाया गया। बाल कलाकारों और युवाओं ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। दूसरी प्रस्तुति कथक नृत्य-नाटिका ‘जननी’ थी। इसकी परिकल्पना, लेखन और निर्देशन डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव ने किया था। बृजेन्द्र नाथ श्रीवास्तव के संगीत निर्देशन में मां-बेटे के भावपूर्ण रिश्ते को मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। पंडित विकास मिश्रा ने तबले पर संगत दी, जिससे प्रस्तुति और भी प्रभावशाली बन गई। लय, ताल से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया कार्यक्रम का तीसरा खंड ‘लय स्पन्दन’ था। इसमें कथक के शुद्ध स्वरूप को तीनताल (16 मात्राओं) पर आधारित विभिन्न अंगों जैसे ठाठ, उठान, आमद, परन और जुगलबंदी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने लय, ताल और भाव के अद्भुत संतुलन से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया । इस अवसर पर कई वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अलका निवेदन ने किया, जबकि प्रकाश व्यवस्था मनीष सैनी ने संभाली। खचाखच भरे ऑडिटोरियम में उपस्थित दर्शकों ने इस सांस्कृतिक संध्या का अंत तक भरपूर आनंद लिया।


