दरभंगा में पटना हाईकोर्ट की बेंच बनाने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में गुरुवार को स्थानीय बीजेपी सांसद गोपालजी ठाकुर ने बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन को मांग पत्र सौंपा है। सांसद ने पत्र में लिखा, ‘तिरहुत और कोसी क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर बिहार के 8 करोड़ लोगों के लिए दरभंगा में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होना आवश्यक है, क्योंकि उत्तर बिहार के 8 करोड़ लोगों को हाई कोर्ट के न्यायिक कार्यों से पटना जाना पड़ता है। उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों से अधिक दूरी रहने के कारण पटना जाने में 4 घंटे से लेकर छह से सात घंटे की दूरी तय करनी पड़ती है। जिससे कारण यहां के लोगों को समय के साथ साथ आर्थिक बोझ का भी सामना करना पड़ता है।’ केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की उठाई मांग सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर लोकसभा सत्र के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी चर्चा कर चुके हैं। दरभंगा में पर्याप्त जमीन और संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे कम लागत में बेंच की स्थापना संभव है और न्यायिक मामलों के त्वरित निपटारे से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था भी मजबूत होगी। इसके अलावा सांसद ने डॉ. कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने, डब्ल्यूआईटी दरभंगा को केंद्र सरकार के अधीन संचालित करने, दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से पढ़ाई फिर से शुरू करने, मिथिला के पर्यटन स्थलों को ‘जानकी सर्किट’ के रूप में विकसित करने और ग्रामीण महाविद्यालयों में बीएड की पढ़ाई शुरू करने की भी मांग उठाई। महिला आरक्षण संशोधन को बताया ऐतिहासिक कदम वहीं, महिला आरक्षण संशोधन ड्राफ्ट को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। सांसद ने कहा कि केंद्र की नारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। यह संशोधन जल्द ही संसद से पारित होगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलेगा। दरभंगा में पटना हाईकोर्ट की बेंच बनाने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में गुरुवार को स्थानीय बीजेपी सांसद गोपालजी ठाकुर ने बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन को मांग पत्र सौंपा है। सांसद ने पत्र में लिखा, ‘तिरहुत और कोसी क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर बिहार के 8 करोड़ लोगों के लिए दरभंगा में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होना आवश्यक है, क्योंकि उत्तर बिहार के 8 करोड़ लोगों को हाई कोर्ट के न्यायिक कार्यों से पटना जाना पड़ता है। उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों से अधिक दूरी रहने के कारण पटना जाने में 4 घंटे से लेकर छह से सात घंटे की दूरी तय करनी पड़ती है। जिससे कारण यहां के लोगों को समय के साथ साथ आर्थिक बोझ का भी सामना करना पड़ता है।’ केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की उठाई मांग सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर लोकसभा सत्र के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी चर्चा कर चुके हैं। दरभंगा में पर्याप्त जमीन और संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे कम लागत में बेंच की स्थापना संभव है और न्यायिक मामलों के त्वरित निपटारे से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था भी मजबूत होगी। इसके अलावा सांसद ने डॉ. कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने, डब्ल्यूआईटी दरभंगा को केंद्र सरकार के अधीन संचालित करने, दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से पढ़ाई फिर से शुरू करने, मिथिला के पर्यटन स्थलों को ‘जानकी सर्किट’ के रूप में विकसित करने और ग्रामीण महाविद्यालयों में बीएड की पढ़ाई शुरू करने की भी मांग उठाई। महिला आरक्षण संशोधन को बताया ऐतिहासिक कदम वहीं, महिला आरक्षण संशोधन ड्राफ्ट को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। सांसद ने कहा कि केंद्र की नारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। यह संशोधन जल्द ही संसद से पारित होगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलेगा।


