महोबा में युवक ने की आत्महत्या:परिजन बोले- मुआवजा मिलना मुश्किल, प्रशासन ने बताया घरेलू कलह

महोबा में युवक ने की आत्महत्या:परिजन बोले- मुआवजा मिलना मुश्किल, प्रशासन ने बताया घरेलू कलह

महोबा के गंज गांव में 19 वर्षीय युवक शिवनारायण अहिरवार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद प्रशासन और किसान संगठनों के बीच मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। परिजनों का आरोप है कि युवक ने मुआवजे की हताशा में यह कदम उठाया, जबकि प्रशासन इसे घरेलू कलह का परिणाम बता रहा है। परिजनों के अनुसार, शिवनारायण की मौत का कारण सरकारी तंत्र की बेरुखी है। गंज गांव कबरई बांध के डूब क्षेत्र में आता है। यहां के किसान लंबे समय से विस्थापन तथा मकानों के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। मृतक के चाचा जगभान और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सिंचाई विभाग की टीम सर्वे के लिए गांव पहुंची थी। अधिकारियों ने मकानों का मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया। ग्रामीणों का तर्क है कि जब गांव की 85 प्रतिशत जमीन बांध के पानी में डूब चुकी है और गांव तीन ओर से पानी से घिरने वाला है, तो वे कहां रहेंगे। परिजनों का दावा है कि इसी अनिश्चित भविष्य और मुआवजे की उम्मीद टूटने से आहत होकर शिवनारायण ने आत्महत्या की। समस्या के समाधान का आश्वासन दिया भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार ने इस घटना को सिंचाई विभाग की लापरवाही और प्रताड़ना का मामला बताया है। यूनियन का कहना है कि प्रशासन ने 5 अप्रैल तक समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन सर्वे टीम के नकारात्मक रवैये के कारण एक युवक की जान चली गई। किसानों का आरोप है कि उनकी खेती की जमीन का मुआवजा तो पहले ही मिल चुका है, लेकिन अब उन्हें मकानों का मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। दूसरी ओर, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर शिवध्यान पांडेय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। प्रशासन का कहना है कि मृतक शिवनारायण अपने परिवार के साथ दिल्ली में मजदूरी करता था और कुछ दिन पहले ही गांव लौटा आया था। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में आत्महत्या की वजह घरेलू कलह सामने आई है। प्रशासन का दावा है कि मृतक का घर डूब क्षेत्र की जद में आता ही नहीं है, इसलिए इसे मुआवजे के विवाद से जोड़ना गलत है।

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