मिर्जापुर स्थित विंध्याचल धाम में प्रसिद्ध कथावाचक राजन महाराज ने आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी के दरबार में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। उन्होंने आचार्य अगस्त्य द्विवेदी के सानिध्य में पूजा-अर्चना कर देश की समृद्धि, शांति और जन-जन की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर राजन महाराज ने कहा कि व्यक्ति को अपने धर्म पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि धर्म के आदेशों का पालन करने वाला व्यक्ति कहीं भी रहे, सदैव प्रसन्न रहता है। धाम के बदले स्वरूप को देखकर राजन महाराज ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विंध्याचल धाम का स्वरूप अत्यंत भव्य, आकर्षक और सुव्यवस्थित हो गया है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किए गए विकास कार्य सराहनीय हैं।
राजन महाराज प्रयागराज के हंडिया में चल रही कथा के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने पहुंचे थे। उन्होंने शासन-प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि धाम के सुंदरीकरण, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधार प्रशंसनीय हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन सुधारों से न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को सुविधा मिली है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भी दर्शन व्यवस्था सहज और सुगम हुई है। राजन महाराज ने विंध्याचल धाम को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक बताया, जहां हर श्रद्धालु की गहरी आस्था जुड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां हो रहा विकास धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होगा। राजन महाराज के आगमन पर स्थानीय श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखा गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया और धार्मिक चर्चा में भाग लिया।


