‘होर्मुज स्ट्रेट में सिर्फ हमारे लोगों को मारा’, 60 देशों की बैठक में भड़का भारत

‘होर्मुज स्ट्रेट में सिर्फ हमारे लोगों को मारा’, 60 देशों की बैठक में भड़का भारत

Iran-US War: इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की मांग तेज कर दी है। ब्रिटेन की ओर से बुलाई गई एक अहम बैठक में भारत ने साफ कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहनी चाहिए। भारत ने कहा कि इस युद्ध में जलमार्ग पर अपने लोगों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है। 

बैठक में अमेरिका नहीं हुआ शामिल

बता दें कि यह बैठक ऐसे समय पर हुई जब युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ती जा रही है। इसमें 60 से ज़्यादा देशों ने हिस्सा लिया, हालांकि अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान तलाशना था।

‘भारत पर पड़ा सीधा असर’

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा और फ्री नेविगेशन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह समुद्री सुरक्षा और खुले व्यापारिक रास्तों का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल हो।

8 भारतीयों की हुई मौत

इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण भारत को भी नुकसान उठाना पड़ा है। इस जारी संघर्ष के शुरुआती दिनों में व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों समेत कुल आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है।

ब्रिटेन की गृह मंत्री इवेट कूपर ने बैठक के बाद कहा कि यह वैश्विक प्रयास इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए गंभीर है और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर जोर दे रहा है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य किया बाधित

इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के जवाब में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। यह संकरी जलधारा विश्व के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन करती है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे यातायात लगभग ठप हो गया। 

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