पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुरचुरवा में बच्चे आज भी पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। बिहार सरकार और शिक्षा विभाग जहां सरकारी विद्यालयों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे कर रहे हैं, वहीं इस विद्यालय की हकीकत इन दावों से उलट है। छात्रों के पास बैठने के लिए डेस्क-बेंच नहीं है और न ही सिर पर छत। शिक्षक भी खुले आसमान के नीचे ब्लैकबोर्ड लगाकर पढ़ाने को विवश हैं। विद्यालय में 11 शिक्षक पदस्थापित, 1 से 8 तक का स्कूल यह विद्यालय कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा प्रदान करता है, जिसमें लगभग 230 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में 11 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इसका अपना भवन नहीं है। कक्षाएं अलग-अलग पेड़ों के नीचे संचालित होती हैं, जहां ब्लैकबोर्ड को पेड़ों के सहारे रखकर पढ़ाया जाता है। छात्र जाड़ा, गर्मी और बरसात जैसे हर मौसम की मार झेलते हुए शिक्षा ग्रहण करते हैं। बरसात में पढ़ाई ठप हो जाती है, जबकि ठंड और गर्मी में उन्हें खुले में बैठना पड़ता है। विद्यालय की छात्राएं आयशा खातून, संजना कुमारी और सुंदरमा कुमारी सहित अन्य बच्चों ने भवन और डेस्क-बेंच की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक बनना चाहते हैं, लेकिन बिना उचित सुविधाओं के पढ़ाई करना बेहद मुश्किल है। अधिकांश छात्र गरीब परिवारों से आते हैं, जिनके बड़े सपने हैं। हालांकि, संसाधनों की यह कमी उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बोले-भवन- भूमि दोनों की कमी इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हफ्फिजुर रहमान ने बताया कि विद्यालय में भवन और भूमि दोनों की कमी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या की लिखित सूचना वरीय अधिकारियों को भेजी जा चुकी है और जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गुरचुरवा विद्यालय की यह स्थिति सरकारी दावों के विपरीत शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विभाग से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा है ताकि बच्चों को सुरक्षित भवन में पढ़ाई का अवसर मिल सके। पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुरचुरवा में बच्चे आज भी पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। बिहार सरकार और शिक्षा विभाग जहां सरकारी विद्यालयों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे कर रहे हैं, वहीं इस विद्यालय की हकीकत इन दावों से उलट है। छात्रों के पास बैठने के लिए डेस्क-बेंच नहीं है और न ही सिर पर छत। शिक्षक भी खुले आसमान के नीचे ब्लैकबोर्ड लगाकर पढ़ाने को विवश हैं। विद्यालय में 11 शिक्षक पदस्थापित, 1 से 8 तक का स्कूल यह विद्यालय कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा प्रदान करता है, जिसमें लगभग 230 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यालय में 11 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इसका अपना भवन नहीं है। कक्षाएं अलग-अलग पेड़ों के नीचे संचालित होती हैं, जहां ब्लैकबोर्ड को पेड़ों के सहारे रखकर पढ़ाया जाता है। छात्र जाड़ा, गर्मी और बरसात जैसे हर मौसम की मार झेलते हुए शिक्षा ग्रहण करते हैं। बरसात में पढ़ाई ठप हो जाती है, जबकि ठंड और गर्मी में उन्हें खुले में बैठना पड़ता है। विद्यालय की छात्राएं आयशा खातून, संजना कुमारी और सुंदरमा कुमारी सहित अन्य बच्चों ने भवन और डेस्क-बेंच की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक बनना चाहते हैं, लेकिन बिना उचित सुविधाओं के पढ़ाई करना बेहद मुश्किल है। अधिकांश छात्र गरीब परिवारों से आते हैं, जिनके बड़े सपने हैं। हालांकि, संसाधनों की यह कमी उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बोले-भवन- भूमि दोनों की कमी इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हफ्फिजुर रहमान ने बताया कि विद्यालय में भवन और भूमि दोनों की कमी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या की लिखित सूचना वरीय अधिकारियों को भेजी जा चुकी है और जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गुरचुरवा विद्यालय की यह स्थिति सरकारी दावों के विपरीत शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विभाग से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा है ताकि बच्चों को सुरक्षित भवन में पढ़ाई का अवसर मिल सके।


