पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने लगी है। इसी बीच दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर रणनीतिक तेल भंडार को जारी किया जा सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस समूह के ऊर्जा मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर हालात का आकलन किया जा रहा है।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया से निकलने वाली तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्रियों ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने के सिद्धांत का समर्थन किया गया है। इसमें रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग का विकल्प भी शामिल किया गया है ताकि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखी जा सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने हाल ही में पेरिस में ऊर्जा मंत्रियों की बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने वाले असर पर विस्तार से चर्चा की गई।
बता दें कि एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि बाजार को स्थिर रखने के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के पास मौजूद आपात तेल भंडार को जारी करने की संभावना भी शामिल है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों के पास सामूहिक रूप से लगभग एक अरब बीस करोड़ बैरल से अधिक सार्वजनिक आपात तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा उद्योग क्षेत्र के पास भी सरकार की व्यवस्था के तहत लगभग साठ करोड़ बैरल तेल भंडार रखा गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार जैसे ही यह खबर सामने आई कि एजेंसी बड़े पैमाने पर आपात तेल भंडार जारी करने पर विचार कर रही है, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को तेल की कीमतें गिरकर प्रति बैरल नब्बे डॉलर से नीचे आ गई थीं। इसके पीछे बाजार में यह धारणा भी रही कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।
हालांकि अगले ही दिन एशियाई बाजार में तेल की कीमतों में फिर से करीब दो प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अभी भी इस बात का आकलन कर रहा है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति कितनी प्रभावित हो सकती है और यह स्थिति कितने समय तक बनी रह सकती है।
गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन में कटौती भी बढ़ा दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार इन देशों ने मिलकर प्रतिदिन पचास लाख बैरल से अधिक उत्पादन घटा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।


