100 साल पहले दुर्लभ था हार्ट अटैक, फिर अचानक क्यों बढ़ने लगी दिल की बीमारी?

100 साल पहले दुर्लभ था हार्ट अटैक, फिर अचानक क्यों बढ़ने लगी दिल की बीमारी?

Dil ka Sach Series: आज हार्ट अटैक (Heart attack) दुनियाभर में मौत के सबसे बड़ा कारण बन गया है। अस्पतालों में हर दिन दिल की बीमारी के मरीज बढ़ रहे हैं और चिंता की बात यह है कि अब युवा, किशोर यहां तक कि मासूम बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। लेकिन मेडिकल इतिहास बताता है कि एक समय ऐसा भी था जब Heart attack बेहद दुर्लभ बीमारी मानी जाती थी।

सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि आज दिल की बीमारी वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन गई? वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका जवाब केवल चिकित्सा विज्ञान में नहीं, बल्कि जीवनशैली, खान-पान और सामाजिक बदलावों में छिपा है। patrika.com पर आज से शुरू की गई ‘दिल का सच’ सीरीज (Dil ka Sach Series) के part 1 में पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट

जब हार्ट अटैक (Heart Attack) दुर्लभ था

20वीं सदी की शुरुआत से पहले दिल की बीमारी के मामले बहुत कम दर्ज होते थे। उस समय के मेडिकल रिकॉर्ड बताते हैं कि लोगों की मौतें ज्यादातर संक्रमण, दुर्घटना या अन्य कारणों से होती थीं। दिल की बीमारी इतनी आम नहीं थी। उस दौर में अधिकांश लोग शारीरिक श्रम करते थे। खेती, पैदल चलना और कठिन काम रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। खान-पान भी प्राकृतिक होता था, दाल, अनाज, सब्जियां और सीमित मात्रा में पशु वसा। चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल बहुत कम था।

लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया तेजी से बदलने लगी। शहरों का विस्तार हुआ, मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा और लोगों की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियां कम होने लगीं।

औद्योगिक समाज और बदलता खान-पान

19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में खाद्य उद्योग तेजी से बढ़ा। बाजार में ऐसे खाद्य पदार्थ आए जिनमें रिफाइंड आटा, चीनी और प्रोसेस्ड फैट का इस्तेमाल किया जाता था। धीरे-धीरे यह भोजन आधुनिक जीवनशैली का अहम हिस्सा बन गया। रेडीमेड फूड, फास्ट फूड और पैकेटबंद उत्पादों ने पारंपरिक भोजन की जगह लेनी शुरू कर दी। इसी दौर में डॉक्टरों ने पहली बार दिल की धमनियों में चर्बी जमा होने और ब्लॉकेज जैसी समस्याओं (Heart attack) को गंभीरता से समझना शुरू किया।

1950 का वो दशक जब अमेरिका में शुरू हुई बड़ी जांच

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में हार्ट अटैक के मामलों में अचानक वृद्धि होने लगी। कई युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों की अचानक मौत ने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया। इसी समय अमेरिकी वैज्ञानिक एन्सिल कीज (Ancel keys) ने एक बड़ा अध्ययन शुरू किया। इस अध्ययन को 7 Countries Study नाम दिया गया।

क्या था 7 कंट्रीज स्टडी में

इस अध्ययन में सात देशों के लोगों के खान-पान और दिल की बीमारी (Heart attack) के मामलों की तुलना की गई। शोध के निष्कर्षों में सामने आया कि जिन देशों में संतृप्त वसा का सेवन अधिक था, वहां दिल की बीमारियां ज्यादा थीं। इस अध्ययन के बाद पश्चिमी देशों में लो-फैट डाइट को बढ़ावा दिया जाने लगा।

डाइट की बहस का विषय बना फैट या शुगर?

1960 और 1970 के दशक में अमेरिका की स्वास्थ्य नीतियों में बड़ा बदलाव आया। लोगों को सलाह दी गई कि वे फैट कम खाएं। इसके बाद खाद्य उद्योग ने बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद बनाने शुरू कर दिए, जिनमें फैट कम लेकिन कार्बोहाइड्रेट और चीनी ज्यादा थी। बाद के वर्षों में कई वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दिल की बीमारी का कारण केवल फैट नहीं, बल्कि अत्यधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड, धूम्रपान और निष्क्रिय जीवनशैली भी हो सकते हैं। इस बहस ने चिकित्सा जगत में लंबे समय तक विवाद पैदा किया और आज भी इन पर शोध जारी है।

वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुकी दिल की बीमारी

आज स्थिति यह है कि दिल की बीमारी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संस्था (World Health Organisation) के मुताबिक हर साल लगभग 1.79 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों (Heart attack) से होती है। इनमें से अधिकांश मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण होती हैं। यह आंकड़ा बताता है कि दिल की बीमारी अब केवल विकसित देशों की समस्या नहीं रही, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है।

भारत में कब बढ़ने लगे Heart Attack के मामले

भारत में 1970 के दशक तक दिल की बीमारी के मामले अपेक्षाकृत कम थे। लेकिन 1980 के बाद शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के साथ ये मामले तेजी से बढ़ने लगे।

Heart attack पीछे एक नहीं कई कारण

  • फास्ट फूड और प्रोसेस्ड भोजन
  • शारीरिक गतिविधि में कमी
  • बढ़ता तनाव
  • धूम्रपान और शराब का सेवन
  • मोटापा और डायबिटीज

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में दिल की बीमारी का बोझ पिछले तीन दशकों में तेजी से बढ़ा है। आज भारत में होने वाली कुल मौतों में एक बड़ा हिस्सा दिल के रोगों से जुड़ा है।

भारतीयों में कम उम्र में क्यों बढ़ रहा खतरा(Heart attack )

एमपी के हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण एशियाई लोगों में दिल की बीमारी का खतरा कई अन्य देशों की तुलना में कम उम्र में बढ़ जाता है। इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली भी जिम्मेदार मानी जाती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि भारतीयों में पेट के आसपास चर्बी जमा होने की प्रवृत्ति अधिक होती है, जो दिल की बीमारी का एक बड़ा जोखिम बनती है।

एक नई चिंता है युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक

पिछले कुछ वर्षों में एक और चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है, कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों की। डॉक्टरों का कहना है कि अब 30-40 वर्ष की उम्र में भी Heart attack के मामले सामने आ रहे हैं। किशोंरों के साथ ही 30 साल से कम उम्र के युवाओं की मौतें भी हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई हैं।

मानी जा रहीं ये बड़ी वजह (Heart attack causes)

-अत्यधिक तनाव
-अनियमित जीवनशैली
-नींद की कमी
-जंक फूड का बढ़ता सेवन
-शारीरिक गतिविधि में कमी
-कोरोना महामारी के बाद भी इस विषय पर नई चर्चाएं शुरू हुई हैं, हालांकि इस पर अभी वैज्ञानिक शोध जारी है।

अब आगे क्या?

दिल की बीमारी की यह कहानी केवल मेडिकल इतिहास नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली का आईना भी है। कभी दुर्लभ मानी जाने वाली यह (Heart attack) बीमारी आज दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले रही है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि विशेषज्ञों के अनुसार सही जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच से दिल की बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

‘दिल का सच’ सीरीज (Dil ka Sach) के पार्ट- 1 में आपने जाना हार्ट अटैक का इतिहास, अमेरिका की जरा सी चूक ने भारत में कैसे बढ़ा दी दिल की बीमारियां, कैसे मौत की बड़ी वजह बन गया है हमारा और आपका दिल… अगले पार्ट में हम जानेंगे दिल के बारे में रोचक बातें, कैसा है आपका दिल कैसे करता है काम…

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