कान्ह के दूषित पानी के लगातार मिलने से शिप्रा का पानी काला और बदबूदार हो गया है। इसकी एक बड़ी वजह नदी में घाटों पर चल रहे निर्माण कार्य भी माने जा रहे हैं, जिनके कारण पानी रुका हुआ है और मिट्टी लगातार पानी में मिल रही है। ये हालात भी तब है, जब 18 और 19 मार्च को गुड़ी पड़वा, विक्रमोत्सव समापन महोत्सव व भूतड़ी अमावस्या का स्नान पर्व होना है। हालांकि इन पर्व स्नान के लिए जिम्मेदार अधिकारी दो एमसीएम पानी नर्मदा का शिप्रा में लेने का दावा कर रहे हैं। दावे कई फिर भी शुद्ध नहीं… शिप्रा शुद्धिकरण के कई दावे हर साल किए जाते हैं। सिंहस्थ 2028 के चलते अब शिप्रा शुद्ध करने 1650 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। फिर भी शिप्रा साफ नहीं है।


