कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य की ओर निरंतर कदम बढ़ते रहें, तो सफलता की मंजिल एक न एक दिन जरूर मिलती है। इसे सच कर दिखाया है झुंझुनू जिले के बामलास गांव के रोहिन जाखड़ ने। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों में रोहिन ने अखिल भारतीय स्तर पर 39वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे शेखावाटी अंचल को गौरवान्वित किया है। पांच साल का कड़ा संघर्ष और अटूट धैर्य रोहिन की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। उन्होंने वर्ष 2019 में देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा (UPSC) में जाने का सपना संजोया था। पिछले चार प्रयासों में असफलता हाथ लगने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमियों पर काम करते हुए, उन्होंने पांचवें प्रयास में देश के टॉप 50 अभ्यर्थियों में अपनी जगह बनाई। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो एक-दो बार असफल होने पर हिम्मत हार जाते हैं। परिवार में खुशी का माहौल, घर पर लगा बधाई देने वालों का तांता पिता जयपाल जाखड़ प्रतिष्ठित एडवोकेट है। प्रमोद देवी (गृहिणी) है।भाई मनीष जाखड़ (प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। जैसे ही परिणाम की सूचना बामलास गांव पहुंची, गांव में उत्सव जैसा माहौल हो गया। ग्रामीणों ने खुशियां मनाईं और रोहिन के निवास स्थान पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीण प्रतिभा का लोहा मनवाया ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े 27 वर्षीय रोहिन ने यह साबित कर दिया कि सुविधाओं की कमी सफलता में बाधक नहीं बनती। गांव के लोगों का कहना है कि रोहिन बचपन से ही शांत और पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर थे। एडवोकेट जयपाल जाखड़ ने बताया कि रोहिन ने कभी भी समय को व्यर्थ नहीं गंवाया और अपनी पूरी ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने में लगा दी।


