बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता के गलियारों में मची उठापटक का सीधा असर अब आम जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर पड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ माने जाने वाले राजगृह गंगाजल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण (पार्ट-2) पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही सक्रियता अचानक ठप पड़ गई है और संबंधित विभागों के आला अधिकारी फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में आ गए हैं। इस स्थिति ने नालंदा और नवादा जिले के उन लाखों लोगों को मायूसी में धकेल दिया है, जो 2026 तक अपने घरों में गंगा की धार पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। योजना के दूसरे चरण का लक्ष्य बिहारशरीफ नगर निगम के सभी 51 वार्डों और नवादा शहर के शेष बचे इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, कागजों पर इस पार्ट-टू की शुरुआत मार्च 2024 में ही हो गई थी और इसे अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। कार्य अवधि के दो साल बीत जाने के बावजूद अब तक जमीन अधिग्रहण का मामला सुलझ नहीं पाया है। नवादा के मधुबन गांव में बनने वाला प्रस्तावित जलाशय राजगीर के घोड़ाकटोरा से क्षेत्रफल में तीन गुना बड़ा होना है, जिसके लिए 517 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें 275 एकड़ निजी जमीन है, जबकि शेष सरकारी भूमि है।
निर्माण कार्य अधर में लटका सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण के लिए अंतिम नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पाइपलाइन में थी और 16 फरवरी 2026 को डाक के माध्यम से फाइनल नोटिस भेजा जाना था। अधिकारियों का कहना था कि अगर जमीन मालिक सहयोग नहीं करते हैं, तो नियमानुसार प्राधिकार में पैसा जमा कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन हालिया राजनीतिक अस्थिरता और त्योहारों की छुट्टियों ने प्रशासनिक मशीनरी को जैसे सुस्त कर दिया है। वर्तमान में हाथीदह से नवादा तक दूसरी पाइपलाइन बिछाने और एसटीपी-डब्ल्यूटीपी (सीवेज व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण का कार्य भी अधर में लटका नजर आ रहा है। गौरतलब है कि यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक कई मील के पत्थर गाड़ चुकी है। वर्ष 2020 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने रिकॉर्ड समय में रफ्तार पकड़ी थी और 27 नवंबर 2022 को मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन किया था। इस योजना की सफलता का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया है, जहां इसे ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ एरीग्रेशन एंड पावर’ द्वारा नेशनल अवार्ड 2023 से नवाजा जा चुका है। पहले चरण में राजगीर, गयाजी, बोधगया और नवादा शहर के कुछ हिस्सों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरे चरण पर खर्च होने वाले करीब 2850 करोड़ रुपए के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार ने अब आम शहरी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, निर्माण स्थलों पर सन्नाटा है और विकास की फाइलों पर धूल जमने की आशंका गहराने लगी है। बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता के गलियारों में मची उठापटक का सीधा असर अब आम जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर पड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ माने जाने वाले राजगृह गंगाजल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण (पार्ट-2) पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही सक्रियता अचानक ठप पड़ गई है और संबंधित विभागों के आला अधिकारी फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में आ गए हैं। इस स्थिति ने नालंदा और नवादा जिले के उन लाखों लोगों को मायूसी में धकेल दिया है, जो 2026 तक अपने घरों में गंगा की धार पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। योजना के दूसरे चरण का लक्ष्य बिहारशरीफ नगर निगम के सभी 51 वार्डों और नवादा शहर के शेष बचे इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, कागजों पर इस पार्ट-टू की शुरुआत मार्च 2024 में ही हो गई थी और इसे अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। कार्य अवधि के दो साल बीत जाने के बावजूद अब तक जमीन अधिग्रहण का मामला सुलझ नहीं पाया है। नवादा के मधुबन गांव में बनने वाला प्रस्तावित जलाशय राजगीर के घोड़ाकटोरा से क्षेत्रफल में तीन गुना बड़ा होना है, जिसके लिए 517 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें 275 एकड़ निजी जमीन है, जबकि शेष सरकारी भूमि है।
निर्माण कार्य अधर में लटका सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण के लिए अंतिम नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पाइपलाइन में थी और 16 फरवरी 2026 को डाक के माध्यम से फाइनल नोटिस भेजा जाना था। अधिकारियों का कहना था कि अगर जमीन मालिक सहयोग नहीं करते हैं, तो नियमानुसार प्राधिकार में पैसा जमा कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन हालिया राजनीतिक अस्थिरता और त्योहारों की छुट्टियों ने प्रशासनिक मशीनरी को जैसे सुस्त कर दिया है। वर्तमान में हाथीदह से नवादा तक दूसरी पाइपलाइन बिछाने और एसटीपी-डब्ल्यूटीपी (सीवेज व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण का कार्य भी अधर में लटका नजर आ रहा है। गौरतलब है कि यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक कई मील के पत्थर गाड़ चुकी है। वर्ष 2020 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने रिकॉर्ड समय में रफ्तार पकड़ी थी और 27 नवंबर 2022 को मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन किया था। इस योजना की सफलता का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया है, जहां इसे ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ एरीग्रेशन एंड पावर’ द्वारा नेशनल अवार्ड 2023 से नवाजा जा चुका है। पहले चरण में राजगीर, गयाजी, बोधगया और नवादा शहर के कुछ हिस्सों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरे चरण पर खर्च होने वाले करीब 2850 करोड़ रुपए के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट की सुस्त रफ्तार ने अब आम शहरी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, निर्माण स्थलों पर सन्नाटा है और विकास की फाइलों पर धूल जमने की आशंका गहराने लगी है।


