अररिया जिला प्रशासन ने भूकंप जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला प्रशासन के आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक लाइव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी मृत्युंजय पाण्डेय ने आम लोगों को भूकंप से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। लाइव सत्र में मृत्युंजय पाण्डेय ने बताया कि बिहार राज्य भूकंप के दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में आता है। भारत के भूकंप जोन मैप के अनुसार, राज्य के 38 जिलों में से नेपाल सीमा से सटे कई जिले जोन 6 (बहुत उच्च जोखिम) में हैं, जबकि अररिया जिला भी जोन 6 या उच्च संवेदनशील श्रेणी में शामिल है। बाकी क्षेत्र मुख्यतः जोन 5 और कुछ जोन 3 में आते हैं। उन्होंने जोर दिया कि नेपाल बॉर्डर के निकट होने के कारण अररिया सहित सीमांचल क्षेत्र में भूकंप का खतरा अधिक है। टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव से ऊर्जा होती है उत्पन्न भूकंप को एक प्राकृतिक आपदा बताते हुए उन्होंने समझाया कि पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव से ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे धरती कंपन करती है। छोटे झटके रोजमर्रा में महसूस होते हैं, लेकिन बड़े भूकंप में जान-माल की भारी क्षति हो सकती है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए 1934 के विनाशकारी बिहार-नेपाल भूकंप का जिक्र किया, जिसमें हजारों लोग प्रभावित हुए थे। पाण्डेय ने बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला और कहा कि भूकंप के दौरान ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन’ का पालन करना चाहिए। उन्होंने भवनों को भूकंप प्रतिरोधी बनाने, जागरूकता फैलाने और तैयारी पर भी जोर दिया। मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को किया गया तैयार उन्होंने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में अररिया जिले में 14 जनवरी से 18 जनवरी तक ‘भूकंप सप्ताह’ मनाया गया, जिसमें विभिन्न माध्यमों से जनजागरूकता अभियान चलाए गए। स्कूलों, ग्राम स्तर पर कार्यक्रम, मॉक ड्रिल और सूचना प्रसार के जरिए लोगों को तैयार किया गया। मृत्युंजय पाण्डेय ने अपील की कि सभी नागरिक भूकंप के बारे में जानकारी लें, अपने घरों की सुरक्षा जांचें और आपात स्थिति में शांत रहें। यह लाइव सत्र डिजिटल माध्यम से हजारों लोगों तक पहुंचा, जो जिला प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है। अररिया जिला प्रशासन ने भूकंप जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला प्रशासन के आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक लाइव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी मृत्युंजय पाण्डेय ने आम लोगों को भूकंप से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। लाइव सत्र में मृत्युंजय पाण्डेय ने बताया कि बिहार राज्य भूकंप के दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में आता है। भारत के भूकंप जोन मैप के अनुसार, राज्य के 38 जिलों में से नेपाल सीमा से सटे कई जिले जोन 6 (बहुत उच्च जोखिम) में हैं, जबकि अररिया जिला भी जोन 6 या उच्च संवेदनशील श्रेणी में शामिल है। बाकी क्षेत्र मुख्यतः जोन 5 और कुछ जोन 3 में आते हैं। उन्होंने जोर दिया कि नेपाल बॉर्डर के निकट होने के कारण अररिया सहित सीमांचल क्षेत्र में भूकंप का खतरा अधिक है। टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव से ऊर्जा होती है उत्पन्न भूकंप को एक प्राकृतिक आपदा बताते हुए उन्होंने समझाया कि पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव से ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे धरती कंपन करती है। छोटे झटके रोजमर्रा में महसूस होते हैं, लेकिन बड़े भूकंप में जान-माल की भारी क्षति हो सकती है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए 1934 के विनाशकारी बिहार-नेपाल भूकंप का जिक्र किया, जिसमें हजारों लोग प्रभावित हुए थे। पाण्डेय ने बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला और कहा कि भूकंप के दौरान ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन’ का पालन करना चाहिए। उन्होंने भवनों को भूकंप प्रतिरोधी बनाने, जागरूकता फैलाने और तैयारी पर भी जोर दिया। मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को किया गया तैयार उन्होंने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में अररिया जिले में 14 जनवरी से 18 जनवरी तक ‘भूकंप सप्ताह’ मनाया गया, जिसमें विभिन्न माध्यमों से जनजागरूकता अभियान चलाए गए। स्कूलों, ग्राम स्तर पर कार्यक्रम, मॉक ड्रिल और सूचना प्रसार के जरिए लोगों को तैयार किया गया। मृत्युंजय पाण्डेय ने अपील की कि सभी नागरिक भूकंप के बारे में जानकारी लें, अपने घरों की सुरक्षा जांचें और आपात स्थिति में शांत रहें। यह लाइव सत्र डिजिटल माध्यम से हजारों लोगों तक पहुंचा, जो जिला प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।


