नीतीश कुमार के 10 फैसलों ने बिहार की बदली तकदीर:जानिए नीतीश कुमार के वो फैसले, जिसने बिहार की दशा और दिशा बदली

नीतीश कुमार के 10 फैसलों ने बिहार की बदली तकदीर:जानिए नीतीश कुमार के वो फैसले, जिसने बिहार की दशा और दिशा बदली

बिहार की राजनीति में कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राज्य की दिशा तय कर देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए गए, जिन्होंने सामाजिक समीकरण बदले, शासन की कार्यशैली बदली और विकास की नई बहस को जन्म दिया। दैनिक भास्कर के इस रिपोर्ट में जानिए नीतीश कुमार के 10 ऐसे फैसले, जिसने बिहार की दशा और दिशा बदल दी…। 1. पूर्ण शराबबंदी लागू करने की योजना अप्रैल 2016 में नीतीश कुमार ने पूर्ण शराबबंदी लागू कर सामाजिक सुधार का ऐसा बड़ा फैसला लिया, जिसे बिहार की दशा बदलने वाला फैसला माना गया। शराब का वजह से बिहार में होने वाले अपराध और महिला उत्पीड़न की घटनाओं के बाद नीतीश कुमार पूर्ण शराबबंदी का फैसला लिया। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा में कमी और सामाजिक स्थिरता लाना था। शराबबंदी का असर यह हुआ कि महिलाओं में राजनीतिक समर्थन मजबूत हुआ। हालांकि, इसे लेकर लगातार बहस चलती है। लेकिन शराबबंदी के फैसले से नीतीश कुमार ने कभी समझौता नहीं किया। 2. पंचायत और नगर निकायों में 50% महिला आरक्षण पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करता है। इस फैसले के बाद लाखों महिलाएं पंचायत प्रतिनिधि बनीं और ग्रामीण राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी। इस कानून का असर यह हुआ कि महिला नेतृत्व की नई पीढ़ी उभरी और महिला सशक्तिकरण की यह पहल दुनिया भर में चर्चा के विषय बनी। 3. लोक सेवा अधिकार अधिनियम लागू करना सरकारी सेवाओं को समयबद्ध बनाने के लिए राइट टू पब्लिक सर्विस एक्ट (RTPS) लागू किया गया। पहले प्रमाण पत्र बनवाने, कोई लाइसेंस या जमीन का दाखिल खारिज कराने में महीनों लग जाते थे। भ्रष्टाचार होता था वो अलग। नीतीश कुमार ने लोक सेवा अधिकार नियम लागू कर सभी कामें का समय सीमा तय किया। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान किया। नतीजा यह हुआ कि बिहार में लोक सेवाओं में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार हुआ। 4. पुलिस में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण बिहार पुलिस बल में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला 2013 में लिया गया, इस फैसले को देश में एक मिसाल माना गया। इससे बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हुआ जहां पुलिस में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक हुई। इसका उद्देश्य सिर्फ भर्ती में संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन को मजबूत करना था। इससे बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती हुई और राज्य पुलिस में महिला भागीदारी तेजी से बढ़ी। इसके लागू होने के बाद महिला सुरक्षा मामलों में संवेदनशीलता बढ़ी और दहेज, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, यौन अपराध के मामलों में शिकायत दर्ज कराने में महिलाओं की झिझक कम हुई। 5. जीविक दीदियों का विस्तार से महिला सशक्तिकरण नीतीश सरकार के कुछ और ऐसे फैसले भी रहे, जिन्होंने सामाजिक ढांचे, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक प्रणाली पर गहरा असर डाला। खासतौर पर जीविका दीदियों का गठन एक सामाजिक आर्थिक आंदोलन के रूप में बड़ा फैसला रहा। स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की दिशा में जीविका कार्यक्रम को बड़े स्तर पर लागू किया गया। विश्व बैंक समर्थित इस मॉडल से लाखों ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। बैंक लोन, माइक्रो फाइनेंस और स्वरोजगार के अवसर बढ़े और महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। पंचायत स्तर पर महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी मजबूत हुई। जीविका दीदियों के गठन का राजनीतिक प्रभाव ऐसा रहा कि महिला वोट बैंक पर नीतीश कुमार की गहरी पकड़ बन गई। यही वोटबैंक चुनावी जीत में हमेशा अहम भूमिका निभाती रही। 6. साइकिल और पोशाक योजना का फैसला स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया। इस योजना के तहत सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल दिया गया। साथ ही फ्री स्कूल ड्रेस दिया गया। बाद में छात्राओं के साथ छात्रों को भी साइकिल दिया जाने लगा। इस योजना से लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ी और कई इलाकों में बाल विवाह की घटनाओं में भी कमी आई। बाद में इस योजना का लाभ छात्रों को भी दिया जाने लगा। 7. सात निश्चय और सात निश्चय पार्ट-2 बना विकास का पैमाना नीतीश कुमार ने सात निश्चय योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत हर घर नल का जल, हर घर शौचालय का बनवाना, गली नाली का पक्कीकरण, युवाओं के लिए कौशल विकास जैसी योजनाएं बनी। इस योजना से बिहार के विकास को नई दिशा मिली। सात निश्चय योजना के जरिए बिहार में बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ। साथ ही ग्रामीण इलाकों में जीवन स्तर बेहतर हुआ। बिहार में हर घर तक साफ जल पहुंचना सबसे बड़ी उपलब्धि मानी गई। 8. महादलित आयोग का गठन नीतीश कुमार ने राजनीति में नया प्रयोग करते हुए दलित समाज के भीतर सबसे पिछड़े वर्गों की पहचान किया। फिर उन्हें विशेष योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया और इसका नाम दिया महादलित। अब तक दलित शब्द का प्रयोग होता था। नीतीश कुमार ने पहले बार महादलित आयोग का गठन किया। इसके जरिए दलितों के भीतर ऐसे जातियां, जो ज्यादा पिछड़े थे, उन्हें महादलित की संज्ञा दी गई। उनके विकास और उत्थान के लिए हर तरह की मदद पहुंचाई गई। 9. हर घर बिजली योजना ने बदली तस्वीर 2015 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 अगस्त के मौके पर पटना के गांधी मैदान से नीतीश कुमार ने ऐलान किया था कि अगले 5 सालों में बिहार के हर गांव और घरों तक बिजली पहुंचा दी जाएगी। अगर हर घर तक बिजली नहीं पहुंची तो वोट नहीं मांगने आयेंगे। 2020 चुनाव से पहले बिहार के हर गांव तक बिजली पहुंच सुनिश्चित किया गया। हर घर बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण अभियान चलाया। इसका असर यह हुआ कि ना सिर्फ हर गांव तक बिजली पहुंची, बल्कि छोटे उद्योग और शिक्षा को सहूलियत भी मिली। कभी अंधेरे का बिहार कहे जाने वाले राज्य को रौशनी से भर दिया गया। 10. जातीय सर्वेक्षण 2023 से बिहार की दिखी सच्चाई जब देश भर में जातीय जनगणना को लेकर मांग उठ रही थी, उस समय नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय सर्वेक्षण कराकर बिहार की स्थिति की तस्वीर सामने रखी। नीतीश कुमार की यह दूरदर्शिता देशभर में नजीर बनी। जातीय सर्वेक्षण के बाद सामाजिक आर्थिक आंकड़ों को सार्वजनिक किया गया। इन आंकड़ों को सामने आने के बाद बिहार में सामाजिक न्याय की नई बहस छिड़ गई। जातीय सर्वेक्षण के जरिए पहली बार पता चला कि किस वर्ग के लोगों की कैसी सामाजिक और आर्थिक स्थिति है। इनके लिए कैसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए। पहली बार आता चला कि किस जाति वर्ग के लोगों की आमदनी कैसी है। साथ ही कौन अब भी मुख्य धारा से छुटे हुए हैं। बिहार से बाहर पलायन करने वाले लोगों की संख्या कितनी है। जातीय सर्वेक्षण के बाद देश भर में भी जातीय गणना की मांग उठी लगी। बाद के दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में जातीय गणना करवाना एक फैसला किया। बिहार की राजनीति में कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राज्य की दिशा तय कर देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए गए, जिन्होंने सामाजिक समीकरण बदले, शासन की कार्यशैली बदली और विकास की नई बहस को जन्म दिया। दैनिक भास्कर के इस रिपोर्ट में जानिए नीतीश कुमार के 10 ऐसे फैसले, जिसने बिहार की दशा और दिशा बदल दी…। 1. पूर्ण शराबबंदी लागू करने की योजना अप्रैल 2016 में नीतीश कुमार ने पूर्ण शराबबंदी लागू कर सामाजिक सुधार का ऐसा बड़ा फैसला लिया, जिसे बिहार की दशा बदलने वाला फैसला माना गया। शराब का वजह से बिहार में होने वाले अपराध और महिला उत्पीड़न की घटनाओं के बाद नीतीश कुमार पूर्ण शराबबंदी का फैसला लिया। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा में कमी और सामाजिक स्थिरता लाना था। शराबबंदी का असर यह हुआ कि महिलाओं में राजनीतिक समर्थन मजबूत हुआ। हालांकि, इसे लेकर लगातार बहस चलती है। लेकिन शराबबंदी के फैसले से नीतीश कुमार ने कभी समझौता नहीं किया। 2. पंचायत और नगर निकायों में 50% महिला आरक्षण पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करता है। इस फैसले के बाद लाखों महिलाएं पंचायत प्रतिनिधि बनीं और ग्रामीण राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी। इस कानून का असर यह हुआ कि महिला नेतृत्व की नई पीढ़ी उभरी और महिला सशक्तिकरण की यह पहल दुनिया भर में चर्चा के विषय बनी। 3. लोक सेवा अधिकार अधिनियम लागू करना सरकारी सेवाओं को समयबद्ध बनाने के लिए राइट टू पब्लिक सर्विस एक्ट (RTPS) लागू किया गया। पहले प्रमाण पत्र बनवाने, कोई लाइसेंस या जमीन का दाखिल खारिज कराने में महीनों लग जाते थे। भ्रष्टाचार होता था वो अलग। नीतीश कुमार ने लोक सेवा अधिकार नियम लागू कर सभी कामें का समय सीमा तय किया। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान किया। नतीजा यह हुआ कि बिहार में लोक सेवाओं में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार हुआ। 4. पुलिस में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण बिहार पुलिस बल में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला 2013 में लिया गया, इस फैसले को देश में एक मिसाल माना गया। इससे बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हुआ जहां पुलिस में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक हुई। इसका उद्देश्य सिर्फ भर्ती में संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन को मजबूत करना था। इससे बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती हुई और राज्य पुलिस में महिला भागीदारी तेजी से बढ़ी। इसके लागू होने के बाद महिला सुरक्षा मामलों में संवेदनशीलता बढ़ी और दहेज, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, यौन अपराध के मामलों में शिकायत दर्ज कराने में महिलाओं की झिझक कम हुई। 5. जीविक दीदियों का विस्तार से महिला सशक्तिकरण नीतीश सरकार के कुछ और ऐसे फैसले भी रहे, जिन्होंने सामाजिक ढांचे, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक प्रणाली पर गहरा असर डाला। खासतौर पर जीविका दीदियों का गठन एक सामाजिक आर्थिक आंदोलन के रूप में बड़ा फैसला रहा। स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की दिशा में जीविका कार्यक्रम को बड़े स्तर पर लागू किया गया। विश्व बैंक समर्थित इस मॉडल से लाखों ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। बैंक लोन, माइक्रो फाइनेंस और स्वरोजगार के अवसर बढ़े और महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। पंचायत स्तर पर महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी मजबूत हुई। जीविका दीदियों के गठन का राजनीतिक प्रभाव ऐसा रहा कि महिला वोट बैंक पर नीतीश कुमार की गहरी पकड़ बन गई। यही वोटबैंक चुनावी जीत में हमेशा अहम भूमिका निभाती रही। 6. साइकिल और पोशाक योजना का फैसला स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया। इस योजना के तहत सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल दिया गया। साथ ही फ्री स्कूल ड्रेस दिया गया। बाद में छात्राओं के साथ छात्रों को भी साइकिल दिया जाने लगा। इस योजना से लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ी और कई इलाकों में बाल विवाह की घटनाओं में भी कमी आई। बाद में इस योजना का लाभ छात्रों को भी दिया जाने लगा। 7. सात निश्चय और सात निश्चय पार्ट-2 बना विकास का पैमाना नीतीश कुमार ने सात निश्चय योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत हर घर नल का जल, हर घर शौचालय का बनवाना, गली नाली का पक्कीकरण, युवाओं के लिए कौशल विकास जैसी योजनाएं बनी। इस योजना से बिहार के विकास को नई दिशा मिली। सात निश्चय योजना के जरिए बिहार में बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ। साथ ही ग्रामीण इलाकों में जीवन स्तर बेहतर हुआ। बिहार में हर घर तक साफ जल पहुंचना सबसे बड़ी उपलब्धि मानी गई। 8. महादलित आयोग का गठन नीतीश कुमार ने राजनीति में नया प्रयोग करते हुए दलित समाज के भीतर सबसे पिछड़े वर्गों की पहचान किया। फिर उन्हें विशेष योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया और इसका नाम दिया महादलित। अब तक दलित शब्द का प्रयोग होता था। नीतीश कुमार ने पहले बार महादलित आयोग का गठन किया। इसके जरिए दलितों के भीतर ऐसे जातियां, जो ज्यादा पिछड़े थे, उन्हें महादलित की संज्ञा दी गई। उनके विकास और उत्थान के लिए हर तरह की मदद पहुंचाई गई। 9. हर घर बिजली योजना ने बदली तस्वीर 2015 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 अगस्त के मौके पर पटना के गांधी मैदान से नीतीश कुमार ने ऐलान किया था कि अगले 5 सालों में बिहार के हर गांव और घरों तक बिजली पहुंचा दी जाएगी। अगर हर घर तक बिजली नहीं पहुंची तो वोट नहीं मांगने आयेंगे। 2020 चुनाव से पहले बिहार के हर गांव तक बिजली पहुंच सुनिश्चित किया गया। हर घर बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण अभियान चलाया। इसका असर यह हुआ कि ना सिर्फ हर गांव तक बिजली पहुंची, बल्कि छोटे उद्योग और शिक्षा को सहूलियत भी मिली। कभी अंधेरे का बिहार कहे जाने वाले राज्य को रौशनी से भर दिया गया। 10. जातीय सर्वेक्षण 2023 से बिहार की दिखी सच्चाई जब देश भर में जातीय जनगणना को लेकर मांग उठ रही थी, उस समय नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय सर्वेक्षण कराकर बिहार की स्थिति की तस्वीर सामने रखी। नीतीश कुमार की यह दूरदर्शिता देशभर में नजीर बनी। जातीय सर्वेक्षण के बाद सामाजिक आर्थिक आंकड़ों को सार्वजनिक किया गया। इन आंकड़ों को सामने आने के बाद बिहार में सामाजिक न्याय की नई बहस छिड़ गई। जातीय सर्वेक्षण के जरिए पहली बार पता चला कि किस वर्ग के लोगों की कैसी सामाजिक और आर्थिक स्थिति है। इनके लिए कैसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए। पहली बार आता चला कि किस जाति वर्ग के लोगों की आमदनी कैसी है। साथ ही कौन अब भी मुख्य धारा से छुटे हुए हैं। बिहार से बाहर पलायन करने वाले लोगों की संख्या कितनी है। जातीय सर्वेक्षण के बाद देश भर में भी जातीय गणना की मांग उठी लगी। बाद के दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में जातीय गणना करवाना एक फैसला किया।  

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