भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन सेना में अपनी सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है। बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है। वहीं बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव पटना साहिब क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर नंद किशोर यादव को बधाई दी है। उन्होंने लिखा है, ‘नंद किशोर यादव जी को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं असंख्य शुभकामनाएं। उनका अनुभव और कौशलपूर्ण व्यवहार राज्यपाल की भूमिका में भी अनुकरणीय साबित होगा।’ 26 साल बाद बिहार को मुस्लिम समुदाय से मिला था राज्यपाल 24 दिसंबर 2024 को आरिफ मोहम्मद खान ने बिहार के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनकी नियुक्ति के साथ करीब 26 साल बाद बिहार को मुस्लिम समुदाय से राज्यपाल मिला था। इससे पहले वर्ष 1998 तक एआर किदवई बिहार के राज्यपाल रहे थे। लंबे अंतराल के बाद आरिफ मोहम्मद खान के रूप में राज्य को फिर से मुस्लिम राज्यपाल मिला था। अब जो नए राज्यपाल की नियुक्ति हुई है, वो भी मुस्लिम है। इंडियन आर्मी में करीब 40 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं सैयद अता हसनैन सैयद अता हसनैन करीब 40 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2012 से 2014 के बीच वे श्रीनगर स्थित सेना की 15 कोर (चिनार कोर) के कमांडर रहे, जहां उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल में उन्होंने “हार्ट्स एंड माइंड्स” यानी स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने की नीति पर भी विशेष जोर दिया। उनके नेतृत्व में सेना ने कई सामाजिक पहल शुरू कीं गई, जिनमें युवाओं के लिए शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़े कार्यक्रम शामिल थें। इससे कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की गई। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े रहे। उन्हें (NDMA) का सदस्य बनाया गया, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया। इसके अलावा वे कश्मीर यूनिवर्सिटी के चांसलर के रूप में भी वे अपनी भूमिका निभा चुके हैं। अब उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन सेना में अपनी सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है। बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है। वहीं बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव पटना साहिब क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर नंद किशोर यादव को बधाई दी है। उन्होंने लिखा है, ‘नंद किशोर यादव जी को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं असंख्य शुभकामनाएं। उनका अनुभव और कौशलपूर्ण व्यवहार राज्यपाल की भूमिका में भी अनुकरणीय साबित होगा।’ 26 साल बाद बिहार को मुस्लिम समुदाय से मिला था राज्यपाल 24 दिसंबर 2024 को आरिफ मोहम्मद खान ने बिहार के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनकी नियुक्ति के साथ करीब 26 साल बाद बिहार को मुस्लिम समुदाय से राज्यपाल मिला था। इससे पहले वर्ष 1998 तक एआर किदवई बिहार के राज्यपाल रहे थे। लंबे अंतराल के बाद आरिफ मोहम्मद खान के रूप में राज्य को फिर से मुस्लिम राज्यपाल मिला था। अब जो नए राज्यपाल की नियुक्ति हुई है, वो भी मुस्लिम है। इंडियन आर्मी में करीब 40 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं सैयद अता हसनैन सैयद अता हसनैन करीब 40 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2012 से 2014 के बीच वे श्रीनगर स्थित सेना की 15 कोर (चिनार कोर) के कमांडर रहे, जहां उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल में उन्होंने “हार्ट्स एंड माइंड्स” यानी स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने की नीति पर भी विशेष जोर दिया। उनके नेतृत्व में सेना ने कई सामाजिक पहल शुरू कीं गई, जिनमें युवाओं के लिए शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़े कार्यक्रम शामिल थें। इससे कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की गई। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े रहे। उन्हें (NDMA) का सदस्य बनाया गया, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया। इसके अलावा वे कश्मीर यूनिवर्सिटी के चांसलर के रूप में भी वे अपनी भूमिका निभा चुके हैं। अब उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।


