पटना जू में बर्ड्स की 24 घंटे मॉनिटरिंग:बर्ड फ्लू को लेकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, मांसहारी बर्ड को चूजों की जगह चूहे दिए जा रहे

पटना जू में बर्ड्स की 24 घंटे मॉनिटरिंग:बर्ड फ्लू को लेकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, मांसहारी बर्ड को चूजों की जगह चूहे दिए जा रहे

पटना जू बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए अलर्ट मोड में आ गया है। पटना जू में कई एहतियात बरते जा रहे हैं। मोर और अन्य पक्षियों के केज के आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। पक्षियों की देखभाल करने वाले सभी कर्मियों को मास्क उपलब्ध कराया गया है। बाड़ों से बाहर निकलने के बाद कर्मियों को खुद को सैनिटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं। मेन गेट पर पोटाशियम परमैगनेट से फूट वॉश अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि संक्रमण अंदर न आ सके। पक्षियों के स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी हो रही है। जानवरों के खान-पान में किया बदलाव जानवरों के खान-पान में भी बदलाव किया गया है। एवियरी सेक्शन में मांसाहारी पक्षियों को अब चूजों की जगह चूहे दिए जा रहे हैं। वहीं, जानवरों की खुराक से चिकन को हटाकर वैकल्पिक आहार शामिल किया गया है। पटना जू प्रशासन का कहना है कि पशु-पक्षियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। 2018 में 6 मोरों की मौत के बाद H5NA वायरस की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद जू को करीब 20 दिनों तक बंद रखना पड़ा था। इसे लेकर ऐहतियात बरते जा रहे हैं।

7 मार्च तक पटना जू दर्शकों के लिए बंद संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। 7 मार्च तक दर्शकों के लिए पटना जू में एंट्री नहीं है। बर्ड फ्लू के एहतियातन यह फैसला लिया गया है। पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है। इसका जानवरों से इंसानों में फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। इधर, ऐसे मामले सामने आने के सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा है। पटना जू बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए अलर्ट मोड में आ गया है। पटना जू में कई एहतियात बरते जा रहे हैं। मोर और अन्य पक्षियों के केज के आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। पक्षियों की देखभाल करने वाले सभी कर्मियों को मास्क उपलब्ध कराया गया है। बाड़ों से बाहर निकलने के बाद कर्मियों को खुद को सैनिटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं। मेन गेट पर पोटाशियम परमैगनेट से फूट वॉश अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि संक्रमण अंदर न आ सके। पक्षियों के स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी हो रही है। जानवरों के खान-पान में किया बदलाव जानवरों के खान-पान में भी बदलाव किया गया है। एवियरी सेक्शन में मांसाहारी पक्षियों को अब चूजों की जगह चूहे दिए जा रहे हैं। वहीं, जानवरों की खुराक से चिकन को हटाकर वैकल्पिक आहार शामिल किया गया है। पटना जू प्रशासन का कहना है कि पशु-पक्षियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। 2018 में 6 मोरों की मौत के बाद H5NA वायरस की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद जू को करीब 20 दिनों तक बंद रखना पड़ा था। इसे लेकर ऐहतियात बरते जा रहे हैं।

7 मार्च तक पटना जू दर्शकों के लिए बंद संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। 7 मार्च तक दर्शकों के लिए पटना जू में एंट्री नहीं है। बर्ड फ्लू के एहतियातन यह फैसला लिया गया है। पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है। इसका जानवरों से इंसानों में फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। इधर, ऐसे मामले सामने आने के सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा है।  

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