लुधियाना में हुई मुठभेड़ का मास्टरमाइंड 6 माह बाद काबू:पुलिस पर की थी फायरिंग; पाकिस्तान से हथियार मंगाने का आरोप

लुधियाना में हुई मुठभेड़ का मास्टरमाइंड 6 माह बाद काबू:पुलिस पर की थी फायरिंग; पाकिस्तान से हथियार मंगाने का आरोप

लुधियाना देहात के सिधवां बेट इलाके में 23 अगस्त, 2025 को हुई पुलिस मुठभेड़ के मास्टरमाइंड को 6 महीने बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी अजेपाल सिंह उर्फ अजे को गोइंदवाल सेंट्रल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, अजेपाल सिंह उर्फ अजे तरनतारन जिले के कंका कंडियाला गांव का निवासी है और इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता था। CIA स्टाफ के इंचार्ज अमृतपाल सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विस्फोटक सामग्री एक्ट, आर्म्स एक्ट और यूएपीए समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। 23 अगस्त को हुई थी मुठभेड़ यह मामला 23 अगस्त, 2025 की देर शाम का है, जब लुधियाना देहात के सिधवां बेट क्षेत्र में स्कॉर्पियो सवार बदमाशों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव जंडी के कच्चे रास्ते पर कुछ संदिग्ध लोग घूम रहे हैं। उनकी गाड़ी की आगे की नंबर प्लेट हटाई गई थी और पीछे की प्लेट पर मिट्टी लगी हुई थी। आरोपी ने पुलिस पर की थी फायरिंग नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई। गाड़ी से उतरकर आरोपी अजमद मसीह ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली एसआई बलविंदर सिंह की पगड़ी को छूकर निकल गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली अजमद के पैर में लगी। पुलिस ने मौके से अजमद मसीह, बलराज सिंह, अर्जुन सिंह, मनप्रीत सिंह और साजन को गिरफ्तार कर लिया था। सभी तरनतारन के रहने वाले थे। हथियार पाकिस्तान से आने की आशंका तलाशी के दौरान आरोपी अर्जुन से एक हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ, जबकि अन्य आरोपियों से पिस्तौल और कारतूस मिले थे। तत्कालीन ग्रामीण एसएसपी अंकुर गुप्ता ने बताया था कि प्रारंभिक जांच में इन हथियारों और हैंड ग्रेनेड के पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने की आशंका जताई गई थी। जांच का दायरा बढ़ा अब जेल से लाए गए आरोपी अजेपाल सिंह के पाकिस्तान से कथित संबंधों को लेकर पुलिस गहन पूछताछ कर रही है। यूएपीए की धाराएं जोड़े जाने के बाद मामले को आतंकी गतिविधियों और विदेशी नेटवर्क से जोड़कर भी जांचा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपियों के नेटवर्क, फंडिंग और हथियार सप्लाई चेन से जुड़े अहम खुलासे होने की संभावना है।

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