मंदसौर जिले में बुधवार को बैंक से पैसे निकालकर कार में रखे 10 लाख रुपए चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वायडी नगर पुलिस ने वारदात के बाद करीब 300 किलोमीटर तक पीछा करते हुए राजस्थान पुलिस की मदद से आरोपियों को पकड़ा। पुलिस ने चोरी की गई 10 लाख रुपए की पूरी रकम और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद कर ली है और अब इन दोनों शातिर आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। मंदसौर के वायडी नगर थाना क्षेत्र के ग्राम बोलखेड़ा निवासी फरियादी तुलसीराम (पिता गोवर्धनलाल धनोतिया) ने बुधवार को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उसी दिन उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचडीएफसी बैंक से कुल 18 लाख रुपए नकद निकाले थे। इनमें से 10 लाख रुपए उन्होंने घर के बाहर खड़ी अपनी कार में रखे थे, जिन्हें अज्ञात चोरों ने कार का शीशा तोड़कर चुरा लिया। पुलिस ने इस शिकायत पर बीएनएस की धारा 303(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग, 300 किमी किया पीछा घटना के बाद थाना प्रभारी निरीक्षक शिवांशु मालवीय के नेतृत्व में उप निरीक्षक विनय बुंदेला और उप निरीक्षक रितेश नागर सहित एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने बैंक, घटनास्थल और आरोपियों के भागने के संभावित रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को सुराग मिला कि आरोपी वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल से राजस्थान के कोटा की ओर भागे हैं, जिसके बाद टीम ने करीब 300 किलोमीटर तक उनका पीछा किया। राजस्थान पुलिस की मदद से चित्तौड़गढ़ में पकड़े गए आरोपी तकनीकी इनपुट के आधार पर मंदसौर पुलिस ने राजस्थान पुलिस से समन्वय स्थापित किया। आरोपियों के फोटो और अन्य जानकारियां साझा की गईं। दोनों राज्यों की पुलिस की संयुक्त मदद से आरोपियों को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी थाना क्षेत्र में डिटेन कर लिया गया। कर्नाटक के रहने वाले हैं दोनों शातिर चोर पुलिस जांच में सामने आया है कि पकड़े गए दोनों आरोपी कर्नाटक राज्य के रहने वाले हैं। इनमें 21 वर्षीय विष्णु उर्फ भरत और इस गिरोह का मुख्य सरगना 32 वर्षीय सुनील उर्फ बाबू उर्फ बालू शामिल है। दोनों आरोपी कर्नाटक के शिवमोगा जिले के भद्रावती तहसील स्थित उसमने थाना क्षेत्र की केशवपुरा कॉलोनी (सेकंड क्रॉस) के निवासी हैं। यह एक अंतर्राज्यीय शातिर गिरोह है, जो वाहन का शीशा तोड़कर नकदी चोरी करने में माहिर है। चोरी की बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर करते हैं रेकी पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के वारदात करने का तरीका बेहद शातिर है। ये लोग पहले मोटरसाइकिल चोरी करते हैं। इसके बाद जिस राज्य में इन्हें वारदात करनी होती है, वहां की फर्जी नंबर प्लेट उस बाइक पर लगा लेते हैं। फिर ये बैंक और वित्तीय संस्थानों के बाहर खड़े होकर नकद निकालने वाले लोगों की रेकी करते हैं। वारदात के बाद 150 किमी दूर बाइक छोड़कर हो जाते हैं फरार बैंक से निकलने वाले व्यक्ति का पीछा कर मौका पाते ही ये लोग वाहन का शीशा तोड़कर रकम पार कर देते हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद ये अपनी मोटरसाइकिल को 100 से 150 किलोमीटर दूर फेंक देते हैं और पुलिस से बचने के लिए वहां से सार्वजनिक परिवहन (बस या ट्रेन) से फरार हो जाते हैं। इन आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में इसी प्रकार की वारदातों की जानकारी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।


