CBSE On Screen Marking: इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए सीबीएसई कक्षा 12वीं के नतीजे एक बड़ा झटका लेकर आए हैं। जो स्टूडेंट्स JEE Main जैसी कठिन परीक्षा में 99 परसेंटाइल से ज्यादा अंक लाए हैं वे, अपने बोर्ड रिजल्ट में 75 प्रतिशत का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। इसके कारण अब वे जेईई एडवांस्ड एग्जाम देने की दौड़ से बाहर हो गए हैं। स्टूडेंट्स और शिक्षकों ने सीबीएसई द्वारा इस साल पहली बार शुरू की गई ऑन स्क्रीन मार्किंग को इस भारी गड़बड़ी की वजह बताया है।
क्या है पूरा मामला
कई स्टूडेंट्स का कहना है कि, उन्होंने दो साल तक दिन रात मेहनत की और जेईई मेन में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन 12वीं बोर्ड में गणित, फिजिक्स, केमिस्ट्री और अंग्रेजी जैसे विषयों में उनके नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं। जिन स्टूडेंट्स को 90 से ज्यादा नंबर की उम्मीद थी उन्हें 60 या 70 के बीच अंक मिले हैं। 12वीं में 75 प्रतिशत का क्राइटेरिया पूरा न होने के कारण अब उनके अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज जाने के सपने पर पानी फिर गया है।
ऑन स्क्रीन मार्किंग पर क्यों उठ रहे सवाल
सीबीएसई ने इस साल से कॉपियों की डिजिटल जांच जिसे ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) कहा जाता है शुरू की है। इसके तहत टीचर्स को कागज की कॉपियों के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई कॉपियां जांचनी होती हैं। शिक्षकों का मानना है कि, कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबे जवाब, स्टेप बाय स्टेप सॉल्व किए गए सवाल या हल्के पेन से बनाए गए डायग्राम को पढ़ना काफी मुश्किल होता है। इस वजह से कई बार सही स्टेप्स या लिखे गए जवाब छूट जाते हैं और स्टूडेंट्स के नंबर कट जाते हैं।
टॉपर्स के नंबरों में आई भारी गिरावट
यह परेशानी सिर्फ एवरेज स्टूडेंट्स के साथ नहीं बल्कि स्कूल टॉपर्स के साथ भी हुई है। दिल्ली और देश के अन्य शहरों के शिक्षकों का कहना है कि, जो बच्चे हमेशा अंग्रेजी या गणित में 95 से ज्यादा नंबर लाते थे वे, बोर्ड में 68 या 70 नंबर पर अटक गए हैं। एक स्टूडेंट ने बताया कि, उसने जेईई मेन में 99.76 परसेंटाइल हासिल किए लेकिन सीबीएसई बोर्ड में उसके कुल अंक केवल 89.8 प्रतिशत ही रह गए जबकि, गणित में उसे 92 की जगह सिर्फ 79 नंबर मिले। फिजिकल एजुकेशन जैसे आसान विषय में भी कई स्टूडेंट्स को 50 से कम नंबर मिले हैं।
अब हो रही कॉपियों की रीचेकिंग की मांग
अपने नंबरों से निराश हजारों स्टूडेंट्स ने अब कॉपियों की रीचेकिंग और स्कैन की गई आंसर शीट देखने के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। हालांकि, हर विषय के लिए 500 रुपये की फीस देना कई स्टूडेंट्स के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि, पहली बार कॉपियां डिजिटल रूप से चेक हुई हैं इसलिए नंबरों में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कंप्यूटर से कॉपी चेक होने के कारण अब स्टूडेंट्स को साफ हैंडराइटिंग और डार्क पेन (गहरे रंग के पेन) का इस्तेमाल करने की आदत डालनी होगी ताकि स्क्रीन पर उनके जवाब आसानी से पढ़े जा सकें।


