दुष्कर्म के 86 मामलों में केवल एक आरोपी को सजा हुई। बाकी सभी आरोपी बाइज्जत बरी। किसी केस में पीड़िता ने कहा कि आरोपी तो वर्तमान में मेरा पति है। तो कई केसों में पीड़िता ने पुलिस पर ही कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया। इससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात ये कि कई पीड़िताओं ने कोर्ट में पुलिस पर झूठी गवाही दिलवाने का आरोप लगाया, कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए धारा 164 के कथन पुलिस के दबाव में दिए थे। यानी क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देखने से पता चलेगा कि ग्वालियर महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। जबकि हकीकत ये है कि केवल केस दर्ज हो रहे हैं, आरोप झूठे निकल रहे हैं। बता दें कि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक के यह आंकड़े जिला न्यायालय ग्वालियर की महिला अपराधों की सुनवाई के लिए नोटिफाइ दो कोर्ट से लिए गए हैं। पढ़िए दुष्कर्म पीड़िताओं के वह बयान जिन्होंने आरोपियों को बचाया, पुलिस को फंसाया पुलिस ने कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराए
आरोपी- सोहिल, समीर, रवि, सभाराम, लोकेश, अमन और रतीराम के केस में पीड़िता ने कोर्ट में यही बयान दिया। पुलिस ने एफआईआर पढ़कर नहीं सुनाई, बिना पढ़े हस्ताक्षर कराए
आरोपी- शैलू बघेल, निखिल सोनी, सभाराम के केस में पीड़िता ने यही बयान दिया। एफआईआर के बाद पुलिस के दस्तावेजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर किए। आवेदन मैंने नहीं, स्वयं पुलिस ने ही टाइप कराकर दिया था
आरोपी- रूप, शाबिर, आशु, धर्मेंद्र, जीतू, कमर और अर्पित के केस में पीड़िता ने यही बयान कोर्ट के सामने दिया था। मजिस्ट्रेट (धारा 164) के समक्ष बयान पुलिस के दबाव में दिए
आरोपी- शाबिर, बालकृष्ण, समर, हर्षित, अमन, सभाराम, विवेक, रतीराम, सुरेंद्र, आशु, निखिल, रूप, सलमान के केस में पीड़िता ने यही बयान दिया। गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी
आरोपी- सतीश, अमन, कल्याण और आशु के मामले में पीड़िता ने बयान दिया कि उसने रेप नहीं, गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी। शारीरिक संबंध मर्जी से बनाए
आरोपी- गोपाल, निखिल, शाबिर, रूप, सलमान, कमर, राजेश, अजय, सोहिल, रवि, मनीष, अमन के केस में पीड़िता ने बाद में यही बयान दिया था। घरवाले शादी को तैयार नहीं थे
आरोपी- सतीश के संबंध में पीड़िता ने बताया कि उसकी सगाई हो चुकी थी। बाद में बात बिगड़ गई। तीन अन्य केसों में भी घरवालों के शादी के लिए तैयार नहीं होने पर पीड़िता द्वारा केस दर्ज कराने की बात सामने आई। आरोपी से शादी कर ली
आरोपी- आशु, बालकृष्ण, रवि, सोहिल, सतीश, लोकेश के केस में पीड़िताओं ने कहा कि उन्होंने आरोपी से शादी कर ली है। नोट : इन केसों के अलावा 12 से ज्यादा केस ऐसे हैं, जिनमें हाई कोर्ट द्वारा ही दुष्कर्म की एफआईआर निरस्त कर दी गई। कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें पत्नी ने पति पर दुष्कर्म का नहीं बल्कि कुकृत्य (धारा 377) का केस दर्ज कराया। ये पढ़िए… चौंक जाएंगे
भास्कर एक्सपर्ट – जस्टिस (रिटा.) दीपक अग्रवाल, मध्यप्रदेश, हाई कोर्ट दुष्कर्म का केस एक हथियार बन गया है
शहर में महिला थाना के बाहर लाइन से टाइपिस्ट बैठे हुए हैं। जो आवेदन तैयार कर देते हैं। मामला कुछ भी हो, कुछ महिलाएं उसे रेप केस में परिवर्तित कर देती हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिसमें कोर्ट के बाहर लेन-देन हो जाता है। कुल मिलाकर, दुष्कर्म के केस पुरुषों के खिलाफ एक हथियार बन गया है। जब गवाह विश्वसनीय होंगे, तभी कोर्ट सजा दे सकेगी। ऐसे केस में पुलिस की भूमिका बेहद सीमित होती है।


