पान विकास योजना में 700 आवेदन:लॉटरी से होगा किसानों का चयन, नालंदा में 10 हेक्टेयर में खेती का टारगेट तय

पान विकास योजना में 700 आवेदन:लॉटरी से होगा किसानों का चयन, नालंदा में 10 हेक्टेयर में खेती का टारगेट तय

सूबे में पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ‘पान विकास योजना’ के तहत आवेदनों के सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस योजना के लिए सूबे के 12 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें नालंदा भी शामिल है। मार्च-अप्रैल महीने में किसानों से आवेदन मांगे गए थे, जिसके तहत नालंदा के करीब 700 किसानों ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। इन सभी प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कर जिला स्तर से राज्य मुख्यालय को भेज दिया गया है। अब लॉटरी के माध्यम से योग्य किसानों का अंतिम चयन होना बाकी है। जिले को इस साल 10 हेक्टेयर में पान की खेती का क्षेत्र विस्तार करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसके लिए बांस का बरेजा बनाने हेतु सरकार किसानों को 50 फीसदी अनुदान देगी। 100 वर्गमीटर के लिए 11 हजार रुपए की मदद इस बार उद्यान विभाग ने अनुदान के नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। अब एक किसान अधिकतम 100 वर्गमीटर में ही बरेजा बनाकर सरकारी अनुदान का लाभ ले सकेगा, जबकि पिछले साल यह सीमा 300 वर्गमीटर तक निर्धारित थी। 100 वर्गमीटर में खेती करने पर सरकार की ओर से 11,750 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि इसका लाभ जमीन के असली मालिक (रैयत) के साथ-साथ बटाईदार (गैर-रैयत) किसानों को भी मिलेगा।
लॉटरी के बाद फिर होगी भौतिक जांच उद्यान विभाग के अनुसार, राज्य मुख्यालय से लॉटरी के आधार पर चयनित किसानों की लिस्ट आने के बाद उनका एक बार फिर से भौतिक सत्यापन किया जाएगा। जो किसान योजना की सभी शर्तों का पूरी तरह से पालन करते पाए जाएंगे, केवल उन्हें ही कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया जाएगा। वहीं, नियमों का पालन न करने वाले किसान इस लाभ से वंचित कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अन्य किसानों को मौका दिया जाएगा।
नालंदा का पान, बनारस तक है शान नालंदा जिले के इस्लामपुर और राजगीर इलाके में बड़े पैमाने पर करीब 400 बीघे में मगही पान की खेती होती है। जिले के बौरीसराय, बौरीडीह, कोचरा और खुदागंज गांव पान उत्पादन के मुख्य हब माने जाते हैं। यहां पैदा होने वाले पान के पत्तों की क्वालिटी और मिठास इतनी बेहतरीन होती है कि बनारस और गया की बड़ी मंडियों में किसानों को इसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है। इस योजना के पूरी तरह धरातल पर उतरने से इलाके में पान के रकबे और उत्पादन, दोनों में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
आवेदनों का सत्यापन कर राज्य मुख्यालय भेज दिया गया
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि आवेदनों का सत्यापन कर राज्य मुख्यालय भेज दिया गया है। वहीं से लॉटरी के आधार पर लाभुकों का चयन होना है। इसके बाद ही चयनित किसानों को कार्यादेश जारी होगा। सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद से उत्पादकों को पान की खेती करने में काफी सहूलियत होगी।
इन 12 जिलों में लागू है योजना पान विकास योजना के तहत बिहार के कुल 12 जिलों का चयन किया गया है। सूबे के जिन जिलों में यह योजना लागू है, उनमें नालंदा, औरंगाबाद, गयाजी, शेखपुरा, वैशाली, नवादा, सारण, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मुंगेर और दरभंगा जिले शामिल हैं। सूबे में पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ‘पान विकास योजना’ के तहत आवेदनों के सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस योजना के लिए सूबे के 12 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें नालंदा भी शामिल है। मार्च-अप्रैल महीने में किसानों से आवेदन मांगे गए थे, जिसके तहत नालंदा के करीब 700 किसानों ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। इन सभी प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कर जिला स्तर से राज्य मुख्यालय को भेज दिया गया है। अब लॉटरी के माध्यम से योग्य किसानों का अंतिम चयन होना बाकी है। जिले को इस साल 10 हेक्टेयर में पान की खेती का क्षेत्र विस्तार करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसके लिए बांस का बरेजा बनाने हेतु सरकार किसानों को 50 फीसदी अनुदान देगी। 100 वर्गमीटर के लिए 11 हजार रुपए की मदद इस बार उद्यान विभाग ने अनुदान के नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। अब एक किसान अधिकतम 100 वर्गमीटर में ही बरेजा बनाकर सरकारी अनुदान का लाभ ले सकेगा, जबकि पिछले साल यह सीमा 300 वर्गमीटर तक निर्धारित थी। 100 वर्गमीटर में खेती करने पर सरकार की ओर से 11,750 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि इसका लाभ जमीन के असली मालिक (रैयत) के साथ-साथ बटाईदार (गैर-रैयत) किसानों को भी मिलेगा।
लॉटरी के बाद फिर होगी भौतिक जांच उद्यान विभाग के अनुसार, राज्य मुख्यालय से लॉटरी के आधार पर चयनित किसानों की लिस्ट आने के बाद उनका एक बार फिर से भौतिक सत्यापन किया जाएगा। जो किसान योजना की सभी शर्तों का पूरी तरह से पालन करते पाए जाएंगे, केवल उन्हें ही कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया जाएगा। वहीं, नियमों का पालन न करने वाले किसान इस लाभ से वंचित कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अन्य किसानों को मौका दिया जाएगा।
नालंदा का पान, बनारस तक है शान नालंदा जिले के इस्लामपुर और राजगीर इलाके में बड़े पैमाने पर करीब 400 बीघे में मगही पान की खेती होती है। जिले के बौरीसराय, बौरीडीह, कोचरा और खुदागंज गांव पान उत्पादन के मुख्य हब माने जाते हैं। यहां पैदा होने वाले पान के पत्तों की क्वालिटी और मिठास इतनी बेहतरीन होती है कि बनारस और गया की बड़ी मंडियों में किसानों को इसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है। इस योजना के पूरी तरह धरातल पर उतरने से इलाके में पान के रकबे और उत्पादन, दोनों में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
आवेदनों का सत्यापन कर राज्य मुख्यालय भेज दिया गया
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि आवेदनों का सत्यापन कर राज्य मुख्यालय भेज दिया गया है। वहीं से लॉटरी के आधार पर लाभुकों का चयन होना है। इसके बाद ही चयनित किसानों को कार्यादेश जारी होगा। सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद से उत्पादकों को पान की खेती करने में काफी सहूलियत होगी।
इन 12 जिलों में लागू है योजना पान विकास योजना के तहत बिहार के कुल 12 जिलों का चयन किया गया है। सूबे के जिन जिलों में यह योजना लागू है, उनमें नालंदा, औरंगाबाद, गयाजी, शेखपुरा, वैशाली, नवादा, सारण, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मुंगेर और दरभंगा जिले शामिल हैं।  

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