भागलपुर में सोमवार के बाद मंगलवार की रात 1:30 बजे शहर में आंधी-बारिश ने फिर तबाही मचाई। ठनका गिरा। मेघ गरजे। कई जगहों पर पेड़ गिरे। मौसम विभाग के अनुसार हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी. की रही। शहर में फिर से ब्लैकआउट हो गया। बीते सोमवार को रात 11.30 बजे आयी आंधी-बारिश की क्षति से लोग उबर भी नहीं पाये थे कि दूसरे दिन फिर इस आपदा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। सोमवार की रात करीब 11:15 बजे आई विनाशकारी आंधी और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। 7 लोगों की मौत हो गई। बरारी से सबौर तक इसका सेंटर रहा। सबसे अधिक नुकसान इसी इलाके में हुआ। हवा की गति 80 से 110 किमी प्रति घंटा थी। सबसे बड़ा झटका बिजली और जलापूर्ति व्यवस्था को लगा। पूरा शहर ब्लैकआउट की चपेट में आ गया। शहर से लेकर गांव तक 11 व 33 केवी लाइन के करीब 277 बिजली पोल धराशायी हो गए। 12 से अधिक स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर गिर पड़े। कचहरी रोड और सबौर रोड पर 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइनों पर विशालकाय पेड़ गिर गए, जिससे पूरा पावर ग्रिड फेल हो गया। इससे पूरा शहर ब्लैकआउट की चपेट में आ गया और जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई। बिजली नहीं रहने से लोगों को पानी के लिए जेनरेटर का सहारा लेना पड़ा और एक हजार लीटर की टंकी भरवाने के लिए 500 रुपए तक खर्च करने पड़े। मायागंज अस्पताल में दो विशाल पेड़ गिरने से सर्जरी वार्ड की खिड़कियां टूट गईं और एक कमरे की दीवार ढह गई, हालांकि समय रहते मरीजों और कर्मियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। आंधी-बारिश में 7 लोगों की मौत आंधी-बारिश में हुई अलग-अलग घटनाओं में जिले के 7 लोगों की मौत हो गई। पेड़ गिरने से बड़ी खंजरपुर निवासी नकुल यादव (36), बिहपुर के मिल्की गांव निवासी मो. जुनैल (60), इस्माइलपुर की कुना देवी (70) और खरीक के हरि प्रसाद मंडल (74) की जान चली गई। वहीं गंगा नदी में नाव से गिरने के कारण खरीक के बहत्तरा निवासी छड्डू सहनी (59) और परबत्ता के संतोष कुमार (38) की मौत हो गई। नवगछिया के जपतेली निवासी हीरालाल राम (40) की छत से गिरकर मौत हुई। बरारी से सबौर तक साइक्लोन का सेंटर प्वाइंट, सबसे अधिक यहां नुकसान आंधी का सबसे अधिक असर बरारी से सबौर तक के इलाके में देखा गया, जिसे प्रशासन ने साइक्लोन का सेंटर प्वाइंट बताया। बिहार कृषि विवि (बीएयू) में भी तबाही मची है। चक्रवातीय तूफान की तीव्र गति के कारण विवि के अनुसंधान फार्म, आवासीय भवनों और पर्यावरण संरचनाओं को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचा है। आंधी की मार से वर्षों पुराने आम के बागान लगभग पूरी तरह उजड़ गए हैं। बड़ी संख्या में फलदार पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं। वहीं, मायागंज अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट के पास निर्माणाधीन वार्ड का टिन शेड उड़ गया तथा कई अन्य भवनों को नुकसान पहुंचा। सबौर कृषि विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक पॉलीहाउस, फार्म क्षेत्र, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, स्टाफ क्वार्टर और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। सैकड़ों पेड़ों के गिरने से सड़कें जाम हो गईं, झुग्गी-झोपड़ियां तबाह हो गईं और बाबूपुर घाट पर लंगर डाले एक मालवाहक कार्गो जहाज का रस्सा टूटने से वह कीचड़ में फंस गया। लगातार दूसरे दिन मंगलवार रात भी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा और बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। राहत और पुनर्बहाली के कार्य लगातार जारी जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि आंधी की रफ्तार काफी तेज थी और बरारी से सबौर तक का क्षेत्र इसका मुख्य केंद्र रहा, जिसके कारण सबसे अधिक जान-माल की क्षति इसी इलाके में हुई। उन्होंने कहा कि सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से व्यापक नुकसान हुआ है तथा राहत और पुनर्बहाली कार्य सोमवार रात से ही लगातार जारी है। बिजली विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त पोल, ट्रांसफॉर्मर और हाईटेंशन लाइनों को दुरुस्त करने में लगी हैं, जबकि नगर निगम और प्रशासनिक टीमों द्वारा प्रमुख सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा है। सुधा डेयरी से डीबीसी कॉलोनी मार्ग, मायागंज अस्पताल से मुसहरी घाट मार्ग तथा अन्य कई रास्ते घंटों बाधित रहे। मंगलवार दोपहर तक कई इलाकों में पेड़ हटाने और बिजली बहाल करने का कार्य जारी था। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इधर लगातार बारिश और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सब्जियों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। नवगछिया क्षेत्र से करीब 20 दिनों से पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं पहुंचने के कारण बाजार में कीमतें आसमान छू रही हैं। कई हरी सब्जियों के दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पनीर की कीमत 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, पेड़ों और जर्जर भवनों के पास नहीं जाने तथा अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। भागलपुर में सोमवार के बाद मंगलवार की रात 1:30 बजे शहर में आंधी-बारिश ने फिर तबाही मचाई। ठनका गिरा। मेघ गरजे। कई जगहों पर पेड़ गिरे। मौसम विभाग के अनुसार हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी. की रही। शहर में फिर से ब्लैकआउट हो गया। बीते सोमवार को रात 11.30 बजे आयी आंधी-बारिश की क्षति से लोग उबर भी नहीं पाये थे कि दूसरे दिन फिर इस आपदा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। सोमवार की रात करीब 11:15 बजे आई विनाशकारी आंधी और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। 7 लोगों की मौत हो गई। बरारी से सबौर तक इसका सेंटर रहा। सबसे अधिक नुकसान इसी इलाके में हुआ। हवा की गति 80 से 110 किमी प्रति घंटा थी। सबसे बड़ा झटका बिजली और जलापूर्ति व्यवस्था को लगा। पूरा शहर ब्लैकआउट की चपेट में आ गया। शहर से लेकर गांव तक 11 व 33 केवी लाइन के करीब 277 बिजली पोल धराशायी हो गए। 12 से अधिक स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर गिर पड़े। कचहरी रोड और सबौर रोड पर 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइनों पर विशालकाय पेड़ गिर गए, जिससे पूरा पावर ग्रिड फेल हो गया। इससे पूरा शहर ब्लैकआउट की चपेट में आ गया और जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई। बिजली नहीं रहने से लोगों को पानी के लिए जेनरेटर का सहारा लेना पड़ा और एक हजार लीटर की टंकी भरवाने के लिए 500 रुपए तक खर्च करने पड़े। मायागंज अस्पताल में दो विशाल पेड़ गिरने से सर्जरी वार्ड की खिड़कियां टूट गईं और एक कमरे की दीवार ढह गई, हालांकि समय रहते मरीजों और कर्मियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। आंधी-बारिश में 7 लोगों की मौत आंधी-बारिश में हुई अलग-अलग घटनाओं में जिले के 7 लोगों की मौत हो गई। पेड़ गिरने से बड़ी खंजरपुर निवासी नकुल यादव (36), बिहपुर के मिल्की गांव निवासी मो. जुनैल (60), इस्माइलपुर की कुना देवी (70) और खरीक के हरि प्रसाद मंडल (74) की जान चली गई। वहीं गंगा नदी में नाव से गिरने के कारण खरीक के बहत्तरा निवासी छड्डू सहनी (59) और परबत्ता के संतोष कुमार (38) की मौत हो गई। नवगछिया के जपतेली निवासी हीरालाल राम (40) की छत से गिरकर मौत हुई। बरारी से सबौर तक साइक्लोन का सेंटर प्वाइंट, सबसे अधिक यहां नुकसान आंधी का सबसे अधिक असर बरारी से सबौर तक के इलाके में देखा गया, जिसे प्रशासन ने साइक्लोन का सेंटर प्वाइंट बताया। बिहार कृषि विवि (बीएयू) में भी तबाही मची है। चक्रवातीय तूफान की तीव्र गति के कारण विवि के अनुसंधान फार्म, आवासीय भवनों और पर्यावरण संरचनाओं को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचा है। आंधी की मार से वर्षों पुराने आम के बागान लगभग पूरी तरह उजड़ गए हैं। बड़ी संख्या में फलदार पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं। वहीं, मायागंज अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट के पास निर्माणाधीन वार्ड का टिन शेड उड़ गया तथा कई अन्य भवनों को नुकसान पहुंचा। सबौर कृषि विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक पॉलीहाउस, फार्म क्षेत्र, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, स्टाफ क्वार्टर और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। सैकड़ों पेड़ों के गिरने से सड़कें जाम हो गईं, झुग्गी-झोपड़ियां तबाह हो गईं और बाबूपुर घाट पर लंगर डाले एक मालवाहक कार्गो जहाज का रस्सा टूटने से वह कीचड़ में फंस गया। लगातार दूसरे दिन मंगलवार रात भी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा और बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। राहत और पुनर्बहाली के कार्य लगातार जारी जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि आंधी की रफ्तार काफी तेज थी और बरारी से सबौर तक का क्षेत्र इसका मुख्य केंद्र रहा, जिसके कारण सबसे अधिक जान-माल की क्षति इसी इलाके में हुई। उन्होंने कहा कि सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से व्यापक नुकसान हुआ है तथा राहत और पुनर्बहाली कार्य सोमवार रात से ही लगातार जारी है। बिजली विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त पोल, ट्रांसफॉर्मर और हाईटेंशन लाइनों को दुरुस्त करने में लगी हैं, जबकि नगर निगम और प्रशासनिक टीमों द्वारा प्रमुख सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा है। सुधा डेयरी से डीबीसी कॉलोनी मार्ग, मायागंज अस्पताल से मुसहरी घाट मार्ग तथा अन्य कई रास्ते घंटों बाधित रहे। मंगलवार दोपहर तक कई इलाकों में पेड़ हटाने और बिजली बहाल करने का कार्य जारी था। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इधर लगातार बारिश और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सब्जियों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। नवगछिया क्षेत्र से करीब 20 दिनों से पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं पहुंचने के कारण बाजार में कीमतें आसमान छू रही हैं। कई हरी सब्जियों के दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पनीर की कीमत 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, पेड़ों और जर्जर भवनों के पास नहीं जाने तथा अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है।


