7-10 MM के चीरे से स्पाइन सर्जरी:इंदौर में जुटेंगे देश-विदेश के स्पाइन सर्जन; 15-25 साल के 20% युवा मरीज, हर साल 60% बढ़ रही मरीजों की संख्या

7-10 MM के चीरे से स्पाइन सर्जरी:इंदौर में जुटेंगे देश-विदेश के स्पाइन सर्जन; 15-25 साल के 20% युवा मरीज, हर साल 60% बढ़ रही मरीजों की संख्या

रीढ़ की बीमारी को अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की समस्या मानना सही नहीं है। मोबाइल और कम्प्यूटर पर लगातार काम करने के कारण कम उम्र के युवा भी गर्दन और कमर दर्द की शिकायत लेकर स्पाइन सर्जन तक पहुंच रहे हैं। इंदौर के स्पाइन सर्जन डॉ. प्रसाद पाटगांवकर के मुताबिक इलाज के लिए आने वाले मरीजों में करीब 20% मरीज 15 से 25 साल की उम्र के हैं। वहीं, स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या हर साल करीब 60% बढ़ रही है। स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से इस्तेमाल हो रही एंडोस्कोपिक तकनीक पर चर्चा के लिए इंदौर में 25 से 27 सितंबर तक ‘एंडोस्पाइनकॉन 2026’ का आयोजन होगा। इंदौर स्पाइनल वेलफेयर सोसाइटी और इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विशेषज्ञ एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करेंगे। इस साल कॉन्फ्रेंस की थीम “From Learning Curve to Global Excellence” रखी गई है। आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन में करीब 31 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और 100 से ज्यादा डेलीगेट्स शामिल होंगे। मोबाइल-कंप्यूटर के कारण युवाओं में बढ़ रही परेशानी
डॉ. पाटगांवकर के मुताबिक, मोबाइल और कंप्यूटर का लगातार और गलत पोस्चर में इस्तेमाल गर्दन और कमर से जुड़ी समस्याओं की एक बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है। खासकर युवा वर्ग लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने या एक ही मुद्रा में बैठकर कंप्यूटर पर काम करने के कारण प्रभावित हो रहा है। लगातार गलत पोस्चर में बैठने से गर्दन और कमर पर दबाव बढ़ता है। कुछ मामलों में स्लिप डिस्क और नसों पर दबाव जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। ऐसे मरीजों को चलने-फिरने में परेशानी, दर्द और हाथ-पैर में दूसरी तकलीफें हो सकती हैं। समय पर जांच और सही उपचार जरूरी है। बेसिक से एडवांस तकनीक तक होगी चर्चा
एंडोस्पाइनकॉन-2026 में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआती तकनीकों से लेकर एडवांस प्रक्रियाओं तक प्रशिक्षण और चर्चा होगी। कॉन्फ्रेंस में यूनिपोर्टल और UBE (Unilateral Biportal Endoscopy) तकनीक के साथ लंबर डिकम्प्रेशन एवं फ्यूजन, सर्वाइकल यूनिपोर्टल और बाइपोर्टल एंडोस्कोपी सहित विभिन्न सर्जिकल तकनीकों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसमें सही मरीज का चयन, सर्जिकल प्लानिंग, तकनीकी बारीकियों और संभावित जटिलताओं को समझने पर भी फोकस रहेगा। 27 सितंबर को कैडेवर पर होगी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग
कॉन्फ्रेंस का प्रमुख आकर्षण 27 सितंबर को होने वाली हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप होगी। इसमें देशभर से आए स्पाइन सर्जन कैडेवर पर एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेंगे। इस तरह की ट्रेनिंग से सर्जनों को ऑपरेशन थिएटर में तकनीक अपनाने से पहले उसकी बारीकियों और अलग-अलग सर्जिकल परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है। उज्बेकिस्तान समेत कई राज्यों से आएंगे विशेषज्ञ
कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र से डॉ. गिरीश दातार, डॉ. केतन देशपांडे और डॉ. साई दिलीप विश्वनाथ सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से स्पाइन सर्जन शामिल होंगे। उज्बेकिस्तान के ताशकंद से डॉ. अख्रोर याकूबोव अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी के रूप में हिस्सा लेंगे। कॉन्फ्रेंस में करीब 31 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और 100 से अधिक डेलीगेट्स शामिल होंगे।

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