मुजफ्फरनगर में बुधवार को 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने उसके चचेरे चाचा को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी पर 69 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा- बच्ची से रेप मानवता और समाज की आत्मा पर प्रहार है। दोषी के दिव्यांग होने को भी सजा में छूट का आधार नहीं माना गया। माता-पिता के काम पर जाने के बाद की वारदात सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विक्रांत राठी और विनय अरोरा ने बताया- घटना 10 नवंबर 2024 की है। बच्ची के माता-पिता काम पर गए थे। इसी दौरान रिश्ते का चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि उसने बच्ची से दुष्कर्म किया। बच्ची के शोर मचाने पर उसके साथ मारपीट की और आरोपी फरार हो गया। पिता की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। 7 गवाहों की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट अहम मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की विशेष पॉक्सो अदालत में न्यायाधीश मंजुला भालोटिया के सामने हुई। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान सात गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट और बच्ची की उम्र से जुड़े प्रमाण-पत्र भी पेश किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया। दिव्यांगता को नहीं माना राहत का आधार सजा सुनाते समय अदालत ने अपराध की गंभीरता और उसके सामाजिक प्रभाव पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- बच्ची से दुष्कर्म केवल उसके शरीर के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि मानवता और समाज की आत्मा पर प्रहार है। ऐसे अपराधों का असर पीड़िता के साथ समाज की सुरक्षा और विश्वास की भावना पर भी पड़ता है। अदालत ने दोषी के पैर से दिव्यांग होने के तथ्य पर भी विचार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि दिव्यांगता गंभीर अपराध के लिए माफी का आधार नहीं हो सकती। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दोषी को आजीवन सश्रम कारावास और 69 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

