47 दिन, 700 किमी से ज्यादा सफर और 18 शिकार; अब फिर कूनो पहुंचा चीता केपी-3

47 दिन, 700 किमी से ज्यादा सफर और 18 शिकार; अब फिर कूनो पहुंचा चीता केपी-3

भास्कर न्यूज | झालावाड़ कूनो नेशनल पार्क से मार्च में निकला चीता केपी-3 ने बारां, झालावाड़ और एमपी के राजगढ़ के जंगलों की सैर कर मंगलवार शाम फिर से झालावाड़ के उमरिया के जंगल में पहुंचा। बुधवार सुबह कूनो नेशनल पार्क की टीम बकानी के मोखमपुरा वन क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर उसे वापस कूनो ले गई। करीब 47 दिन में चीता ने 700 किमी से ज्यादा का सफर तय किया। इस दौरान उसने 18 से ज्यादा शिकार भी किए। दरअसल, कूनो नेशनल पार्क से निकल कर प्राकृतिक कॉरिडोर से होता हुआ चीता केपी-3 बारां के रामगढ़ में 2 मार्च को आया था। इस दौरान नीलगाय सहित दो शिकार किए। इस बीच वह 14 मार्च को मध्यप्रदेश की सीमा में लौट गया, लेकिन 22 मार्च को फिर बारां की सीमा में पहुंच गया। यहां रामगढ़, मांगरोल व कोयला क्षेत्र में पार्वती नदी के पास घूमता रहा। यहां से वह छबड़ा और इसके बाद शेरगढ़ अभयारण्य में प्रवेश कर गया। परवन नदी की कराइयों में घूमने के बाद वह 26 अप्रैल को अर्जुनपुरा, गणेशपुरा होते हुए झालावाड़ जिले के मनोहरथाना की सीमा में प्रवेश कर गया। वहां से 1 मई को राजगढ़ जिले में पहुंचा। वहां से कालीपीठ, जीरापुर होकर रामगढ़ होते हुए 5 मई की शाम फिर से झालावाड़ के बकानी वन क्षेत्र में पहुंच गया। बुधवार सुबह उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। चीता केपी-3 ने 18 से ज्यादा मवेशियों का किया शिकार चीता केपी-3 ने बारां व झालावाड़ जिले की सैर के दौरान नीलगाय, खरगोश, बकरी, सूअर, बछड़े, काला हिरण, हिरण सहित 18 से अधिक मवेशियों को अपना शिकार बनाया। झालावाड़ जिले के मनोहरथाना के समीप वन क्षेत्र में एक बछड़े का ​शिकार करने के बाद वह एमपी के राजगढ़ जिले में प्रवेश कर गया। यहां से वापस झालावाड़ जिले में प्रवेश के बाद उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। लगातार निगरानी कर रही थी टीम वापस कूनो नेशनल पार्क ले गई भालता| मंगलवार को नजदीकी गांव सूरजपुरा, रांकड़ा व उमरिया के जंगल में चीता केपी-3 का मूवमेंट होने के बाद ग्रामीणों में एकबारगी दहशत हो गई थी। रातभर में करीब 10 किमी चल कर वह पाटलीखेडा के रास्ते बेरागढ़ वनक्षेत्र में पंहुच गया। कूनो नेशनल पार्क की टीम के साथ एमपी व राजस्थान के वन विभाग के कर्मचारी इसकी लोकेशन ट्रेस करते हुए बेरागढ़ वन क्षेत्र में मोखमपुरा प्लांटेशन पहुंचे, जहां पेड़ की छांव में बेठे चीता केपी-3 को ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद कूनो की टीम उसे ले गई। टेरेटरी की तलाश में बारां, झालावाड़, और राजगढ़ तक पहुंचा चीता केपी-3 वन्यजीव एक्सपर्ट ने बताया कि वन्यजीव प्राकृतिक रूप से कॉरिडोर बनाते हैं। चीता केपी-3 भी वन्यजीवों की आवाजाही के रास्ते से ही टेरेटरी की तलाश में आगे बढ़ा। बारां, झालावाड़ जिले में जंगल, पानी और शिकार की पर्याप्त उपलब्धता से चीता निरंतर आगे बढ़ता गया। चीता प्रोजेक्ट देश की परियोजना है। ऐसे में 17 जिलों के प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया जाए। स्टाफ ट्रेनिंग, ग्रासलैंड, प्रे-बेस, संसाधन उपलब्ध कराए जाए। बार-बार ट्रेंकुलाइज करके ले जाना भी समाधान नहीं है। डॉ. मधुकांत दुबे, पूर्व उपनिदेशक पशुपालन विभाग 35 दिन : 22 मार्च से 25 अप्रैल तक बारां जिले में मूवमेंट। 5 दिन : 26 से 30 अप्रेल तक झालावाड़ जिले में विचरण। 5 दिन : 1 से 5 मई की शाम तक एमपी राजगढ़ जिले में रहा। 2 दिन : 5 से 6 मई की सुबह झालावाड़ जिले में किया विचरण।

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