UP Police Reshuffle: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने रविवार रात बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 44 एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस व्यापक फेरबदल में दो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं-सख्त छवि के कारण ‘लेडी सिंघम’ के नाम से प्रसिद्ध श्रेष्ठा ठाकुर और चर्चित पीपीएस अधिकारी तनु उपाध्याय। दोनों को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

इस बड़े पुलिस प्रशासनिक बदलाव को सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत प्रदेश में कानून-व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना और संवेदनशील क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना शामिल है।
एटीएस लखनऊ की कमान संभालेंगी श्रेष्ठा ठाकुर
सख्त कार्यशैली और बेबाक अंदाज के लिए जानी जाने वाली श्रेष्ठा ठाकुर को इस बार एक बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस), लखनऊ में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात किया गया है। यह पद अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि एटीएस राज्य में आतंकवाद-रोधी अभियानों और सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी करता है।

वर्ष 2012 बैच की पीपीएस अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर मूल रूप से उन्नाव की रहने वाली हैं और अपने करियर के दौरान कई अहम पदों पर कार्य कर चुकी हैं। बागपत में एएसपी रहते हुए उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अपनी अलग पहचान बनाई थी।
उनकी लोकप्रियता 2017 में उस समय और बढ़ी, जब बुलंदशहर में सीओ पद पर तैनाती के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे नियमों का पालन करवाने के लिए एक राजनीतिक कार्यकर्ता से सख्ती से पेश आती नजर आई थीं। इसके बाद उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का नाम दिया गया और उनकी कार्यशैली की व्यापक चर्चा हुई।

तनु उपाध्याय को पीएसी में नई जिम्मेदारी
इसी तबादला सूची में तनु उपाध्याय को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें कानपुर स्थित 37वीं वाहिनी पीएसी, कानपुर में उप सेनानायक के पद पर नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले इसी वाहिनी में सहायक सेनानायक के रूप में कार्यरत थीं।
तनु उपाध्याय भी अपने काम और व्यक्तित्व के कारण चर्चा में रहती हैं। वे उस समय सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने वर्ष 2025 में सुधा मूर्ति का महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर इंटरव्यू लिया था। इस इंटरव्यू ने सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में काफी ध्यान आकर्षित किया था। उनकी नई तैनाती को पीएसी के संचालन और अनुशासन को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बड़े पैमाने पर फेरबदल के मायने
44 एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारियों का एक साथ तबादला प्रदेश में पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा कदम है। यह सिर्फ नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों का मानना है कि इस तरह के फेरबदल से प्रशासन में नई ऊर्जा आती है। लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अधिकारियों को बदलने से कार्यप्रणाली में सुधार होता है और नए दृष्टिकोण के साथ काम करने का अवसर मिलता है।
कानून-व्यवस्था सुधार पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार लगातार कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है। हाल के वर्षों में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में यह तबादला भी एक अहम कड़ी माना जा रहा है। संवेदनशील जिलों और महत्वपूर्ण इकाइयों में अनुभवी और सख्त अधिकारियों की तैनाती से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून-व्यवस्था के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका
इस फेरबदल में महिला अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका भी सामने आई है। श्रेष्ठा ठाकुर और तनु उपाध्याय जैसी अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां मिलना इस बात का संकेत है कि पुलिस प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उन्हें नेतृत्व के महत्वपूर्ण अवसर दिए जा रहे हैं। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण का भी सकारात्मक संदेश देता है।


