कहानी की शुरुआत साल 2008 से होती है। बीटेक की डिग्री हाथ में लिए एक नौजवान सरकारी नौकरी की दहलीज पर कदम रखता है। नाम था-गोपाल कुमार। मूल रूप से पूर्णिया के बनमनखी का रहने वाला यह लड़का एक बेहद साधारण परिवार से आता था। पिता राजकुमार गुप्ता बिहार पुलिस भवन निर्माण विभाग में कभी चपरासी (फोर्थ ग्रेड) के पद पर भर्ती हुए थे, ईमानदारी से काम किया, क्लर्क बने और बेदाग छवि के साथ रिटायर होकर संविदा पर वहीं काम करने लगे। पिता ने मेहनत से पटना के कंकड़बाग (इंदिरा नगर रोड नंबर 4) में एक मकान बनाया था। 2008 में जब गोपाल की नौकरी ग्रामीण कार्य विभाग में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर लगी, तब इस मकान के अलावा उसके पास संपत्ति के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं थी। लेकिन गोपाल के इरादे पिता जैसे ‘साफ-सुथरे’ नहीं थे। उसे चंद दिनों में रईस बनना था। संडे बिग स्टोरी में भ्रष्टाचार की इमारत खड़ा करने वाले इंजीनियर गोपाल की कहानी…। कमीशन का फिक्स 4% फॉर्मूला साल 2022 आते-आते गोपाल कुमार का प्रमोशन हो गया। वह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बन गया। पोस्टिंग मिली जमुई जिले के झाझा डिवीजन ऑफिस में। इससे पहले वह मधेपुरा, मोतिहारी, भोजपुर, बक्सर और सारण जैसे जिलों में भी तैनात रह चुका था। गोपाल ने हर जिले में काली कमाई का एक अचूक फॉर्मूला तैयार किया- 4% कमीशन फिक्स। मुख्यमंत्री सड़क योजना हो या प्रधानमंत्री सड़क योजना… सड़क बनानी हो, पुल-पुलिया का निर्माण हो, क्वालिटी चेक करना हो या ठेकेदारों का बिल पास करना हो, गोपाल का 4 फीसदी का कट तय था। कमीशन वसूलने के लिए गोपाल ने हायर किए 4 लड़के EOU की जांच में पता चला है कि गोपाल ने ठेकेदारों से कमीशन वसूलने के लिए 4 लड़कों को हायर किया था। उनका काम होता था वह फिक्स राशि वसूले और उसे गोपाल तक पहुंचाए। गोपाल इसके बदले उन्हें सैलरी देता था। जांच एजेंसी अभी इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि ये लड़के कितने पैसे पर काम करते थे। वह वसूलने के लिए किस तरह का हथकंडा अपनाते थे। …जब नोटों को ‘खपाना’ मजबूरी बन गया ठेकेदारों से टेंडर के खेल में वसूली गई यह रकम इतनी ज्यादा थी कि गोपाल की 18 साल की कुल वैध सरकारी सैलरी जहां महज 1 करोड़ 41 लाख रुपए थी, वहीं अब उसके पास कुल 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी है। जब भ्रष्टाचार के जरिए टेंडर के खेल में काली कमाई ज्यादा होने लगी तब उसने पकड़े जाने के डर से बैंक अकाउंट में रखने के बजाय कैश (नकद) में ही खपाने लगा। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में जो सनसनीखेज सच सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए। गोपाल ने अब तक कम से कम 2 करोड़ 63 लाख रुपए की ब्लैक मनी का पेमेंट सिर्फ कैश में किया था। आइए देखते हैं इस काली कमाई को ठिकाने लगाने के उसके 4 शातिर तरीके… 1. कागज पर 35 लाख, कैश में 93 लाख 2023 में गोपाल ने दानापुर के बाजार समिति इलाके में अपनी और पत्नी दीप शिखा के नाम पर सवा कट्ठा जमीन खरीदी। सरकारी कागज पर कीमत दिखाई सिर्फ 35 लाख रुपए। लेकिन जांच में पता चला है कि बाजार भाव के हिसाब से डील 1.28 करोड़ में हुई थी। बाकी के 93 लाख रुपए गोपाल ने चुपचाप जमीन मालिक को कैश में दिए थे। कैश में लेन-देन का एग्रीमेंट पेपर EOU को मिला है। इस जमीन पर उसने G+3 की एक आलीशान बिल्डिंग खड़ी कर दी है, जिस पर 1 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है। 2. 5 लाख का एग्रीमेंट, 80 लाख कैश दानापुर के आदमपुर स्थित ‘लक्ष्मी कॉटेज’ अपार्टमेंट में गोपाल ने एक आलीशान 4BHK फ्लैट खरीदा। इसके सरकारी कागज पर एग्रीमेंट महज 5 लाख रुपए का था, जबकि बिल्डर को 80 लाख रुपए कैश में दिए गए। 3. मॉल में दुकानें खरीदी साल 2022 में दानापुर के सुगना मोड़ से खगौल जाने वाली रोड में गोपाल ने 426 स्क्वायर फीट में दो दुकानें (शॉप) खरीद डालीं। इसके लिए भी 30 लाख रुपए का पूरा पेमेंट नकद में किया गया। 4. कैश में खरीदी 60 लाख की ज्वेलरी गोपाल की पत्नी और बच्चे पटना के मजिस्ट्रेट कॉलोनी में स्थित जगत विला ज्योतिपुरम अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर F-2 में रहते हैं। जब जांच एजेंसी की टीम ने यहां छापेमारी की थी तो भारी मात्रा में सोने-चांदी की ज्चेलरी बरामद हुई। इसके जो बिल मिले वो 47 लाख रुपए के थे। जबकि, बरामद सोने की ज्वेलरी की कीमत 60 लाख रुपए से अधिक की थी। EOU के अनुसार पूरी ज्वेलरी का पेमेंट भी कैश में हुआ है। मजिस्ट्रेट कॉलोनी में स्थित जगत विला ज्योतिपुरम अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर F-2 को गोपाल ने साल 2018 में खरीदा था। फ्लैट के रजिस्ट्री का पेपर हाथ लगा है। इस फ्लैट को 40 लाख रुपए में खरीदा था। मगर, इन रुपयों का पेमेंट किस तरीके से हुआ था? इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला। अब जांच एजेंसी इस पेमेंट की पड़ताल करेगी। काली कमाई के रुपयों से ही कैश में इस फ्लैट को भी खरीदे जाने की संभावना है। क्रेटा कार और सुरेंद्र की कुंडली खंगालेगी एजेंसी गोपाल खुद जमुई में 19 लाख रुपए की चमचमाती हुंडई क्रेटा कार से चलता था। लेकिन जब EOU ने इसका रजिस्ट्रेशन नंबर खंगाला, तो वह ‘सुरेंद्र प्रसाद’ के नाम पर दर्ज थी। एजेंसी को शक है कि यह गोपाल की बेनामी संपत्ति है और अब सुरेंद्र की कुंडली खंगाली जा रही है। कैसे ढह गया ‘काली कमाई’ का किला EOU को गोपाल के भ्रष्टाचार की गुप्त सूचना मिली। जांच एजेंसी ने जाल बिछाया और सबूत जुटाने के बाद 15 मई को गोपाल के खिलाफ उसकी सैलरी से 81.5 प्रतिशत अधिक (2 करोड़ 61 हजार रुपए) की आय से अधिक संपत्ति का FIR दर्ज कर ली। अगले ही दिन, यानी 16 मई को EOU की अलग-अलग टीमों ने गोपाल के 4 ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। छापेमारी में जो मिला, उसने गोपाल के दावों की धज्जियां उड़ा दीं… 5 जून का गोपाल से दोबारा होगी पूछताछ 19 मई को पटना में EOU ने गोपाल कुमार को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर बुलाया। जब वह दफ्तर पहुंचा, तो भ्रष्टाचार के इस ‘खिलाड़ी’ के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। गिरफ्तारी का खौफ साफ दिख रहा था, हाथ-पैर कांप रहे थे। ढाई घंटे की पूछताछ में अफसरों ने उसके सामने 20 कड़े सवाल पूछे। शुरुआती घबराहट के बाद जब गोपाल को अहसास हुआ कि आज उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी, तब जाकर उसकी सांस में सांस आई। हालांकि, उस दिन उसने किसी भी सवाल का सीधा और सही जवाब नहीं दिया। अब 5 जून को जांच एजेंसी दोबारा पूछताछ करेगी। इसी दिन गोपाल कुमार को दोबारा EOU के सवालों के चक्रव्यूह का सामना करना होगा और देखना होगा कि इस बार ‘काली कमाई’ के कौन-से नए पन्ने खुलते हैं। कहानी की शुरुआत साल 2008 से होती है। बीटेक की डिग्री हाथ में लिए एक नौजवान सरकारी नौकरी की दहलीज पर कदम रखता है। नाम था-गोपाल कुमार। मूल रूप से पूर्णिया के बनमनखी का रहने वाला यह लड़का एक बेहद साधारण परिवार से आता था। पिता राजकुमार गुप्ता बिहार पुलिस भवन निर्माण विभाग में कभी चपरासी (फोर्थ ग्रेड) के पद पर भर्ती हुए थे, ईमानदारी से काम किया, क्लर्क बने और बेदाग छवि के साथ रिटायर होकर संविदा पर वहीं काम करने लगे। पिता ने मेहनत से पटना के कंकड़बाग (इंदिरा नगर रोड नंबर 4) में एक मकान बनाया था। 2008 में जब गोपाल की नौकरी ग्रामीण कार्य विभाग में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर लगी, तब इस मकान के अलावा उसके पास संपत्ति के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं थी। लेकिन गोपाल के इरादे पिता जैसे ‘साफ-सुथरे’ नहीं थे। उसे चंद दिनों में रईस बनना था। संडे बिग स्टोरी में भ्रष्टाचार की इमारत खड़ा करने वाले इंजीनियर गोपाल की कहानी…। कमीशन का फिक्स 4% फॉर्मूला साल 2022 आते-आते गोपाल कुमार का प्रमोशन हो गया। वह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बन गया। पोस्टिंग मिली जमुई जिले के झाझा डिवीजन ऑफिस में। इससे पहले वह मधेपुरा, मोतिहारी, भोजपुर, बक्सर और सारण जैसे जिलों में भी तैनात रह चुका था। गोपाल ने हर जिले में काली कमाई का एक अचूक फॉर्मूला तैयार किया- 4% कमीशन फिक्स। मुख्यमंत्री सड़क योजना हो या प्रधानमंत्री सड़क योजना… सड़क बनानी हो, पुल-पुलिया का निर्माण हो, क्वालिटी चेक करना हो या ठेकेदारों का बिल पास करना हो, गोपाल का 4 फीसदी का कट तय था। कमीशन वसूलने के लिए गोपाल ने हायर किए 4 लड़के EOU की जांच में पता चला है कि गोपाल ने ठेकेदारों से कमीशन वसूलने के लिए 4 लड़कों को हायर किया था। उनका काम होता था वह फिक्स राशि वसूले और उसे गोपाल तक पहुंचाए। गोपाल इसके बदले उन्हें सैलरी देता था। जांच एजेंसी अभी इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि ये लड़के कितने पैसे पर काम करते थे। वह वसूलने के लिए किस तरह का हथकंडा अपनाते थे। …जब नोटों को ‘खपाना’ मजबूरी बन गया ठेकेदारों से टेंडर के खेल में वसूली गई यह रकम इतनी ज्यादा थी कि गोपाल की 18 साल की कुल वैध सरकारी सैलरी जहां महज 1 करोड़ 41 लाख रुपए थी, वहीं अब उसके पास कुल 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी है। जब भ्रष्टाचार के जरिए टेंडर के खेल में काली कमाई ज्यादा होने लगी तब उसने पकड़े जाने के डर से बैंक अकाउंट में रखने के बजाय कैश (नकद) में ही खपाने लगा। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में जो सनसनीखेज सच सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए। गोपाल ने अब तक कम से कम 2 करोड़ 63 लाख रुपए की ब्लैक मनी का पेमेंट सिर्फ कैश में किया था। आइए देखते हैं इस काली कमाई को ठिकाने लगाने के उसके 4 शातिर तरीके… 1. कागज पर 35 लाख, कैश में 93 लाख 2023 में गोपाल ने दानापुर के बाजार समिति इलाके में अपनी और पत्नी दीप शिखा के नाम पर सवा कट्ठा जमीन खरीदी। सरकारी कागज पर कीमत दिखाई सिर्फ 35 लाख रुपए। लेकिन जांच में पता चला है कि बाजार भाव के हिसाब से डील 1.28 करोड़ में हुई थी। बाकी के 93 लाख रुपए गोपाल ने चुपचाप जमीन मालिक को कैश में दिए थे। कैश में लेन-देन का एग्रीमेंट पेपर EOU को मिला है। इस जमीन पर उसने G+3 की एक आलीशान बिल्डिंग खड़ी कर दी है, जिस पर 1 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है। 2. 5 लाख का एग्रीमेंट, 80 लाख कैश दानापुर के आदमपुर स्थित ‘लक्ष्मी कॉटेज’ अपार्टमेंट में गोपाल ने एक आलीशान 4BHK फ्लैट खरीदा। इसके सरकारी कागज पर एग्रीमेंट महज 5 लाख रुपए का था, जबकि बिल्डर को 80 लाख रुपए कैश में दिए गए। 3. मॉल में दुकानें खरीदी साल 2022 में दानापुर के सुगना मोड़ से खगौल जाने वाली रोड में गोपाल ने 426 स्क्वायर फीट में दो दुकानें (शॉप) खरीद डालीं। इसके लिए भी 30 लाख रुपए का पूरा पेमेंट नकद में किया गया। 4. कैश में खरीदी 60 लाख की ज्वेलरी गोपाल की पत्नी और बच्चे पटना के मजिस्ट्रेट कॉलोनी में स्थित जगत विला ज्योतिपुरम अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर F-2 में रहते हैं। जब जांच एजेंसी की टीम ने यहां छापेमारी की थी तो भारी मात्रा में सोने-चांदी की ज्चेलरी बरामद हुई। इसके जो बिल मिले वो 47 लाख रुपए के थे। जबकि, बरामद सोने की ज्वेलरी की कीमत 60 लाख रुपए से अधिक की थी। EOU के अनुसार पूरी ज्वेलरी का पेमेंट भी कैश में हुआ है। मजिस्ट्रेट कॉलोनी में स्थित जगत विला ज्योतिपुरम अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर F-2 को गोपाल ने साल 2018 में खरीदा था। फ्लैट के रजिस्ट्री का पेपर हाथ लगा है। इस फ्लैट को 40 लाख रुपए में खरीदा था। मगर, इन रुपयों का पेमेंट किस तरीके से हुआ था? इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला। अब जांच एजेंसी इस पेमेंट की पड़ताल करेगी। काली कमाई के रुपयों से ही कैश में इस फ्लैट को भी खरीदे जाने की संभावना है। क्रेटा कार और सुरेंद्र की कुंडली खंगालेगी एजेंसी गोपाल खुद जमुई में 19 लाख रुपए की चमचमाती हुंडई क्रेटा कार से चलता था। लेकिन जब EOU ने इसका रजिस्ट्रेशन नंबर खंगाला, तो वह ‘सुरेंद्र प्रसाद’ के नाम पर दर्ज थी। एजेंसी को शक है कि यह गोपाल की बेनामी संपत्ति है और अब सुरेंद्र की कुंडली खंगाली जा रही है। कैसे ढह गया ‘काली कमाई’ का किला EOU को गोपाल के भ्रष्टाचार की गुप्त सूचना मिली। जांच एजेंसी ने जाल बिछाया और सबूत जुटाने के बाद 15 मई को गोपाल के खिलाफ उसकी सैलरी से 81.5 प्रतिशत अधिक (2 करोड़ 61 हजार रुपए) की आय से अधिक संपत्ति का FIR दर्ज कर ली। अगले ही दिन, यानी 16 मई को EOU की अलग-अलग टीमों ने गोपाल के 4 ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। छापेमारी में जो मिला, उसने गोपाल के दावों की धज्जियां उड़ा दीं… 5 जून का गोपाल से दोबारा होगी पूछताछ 19 मई को पटना में EOU ने गोपाल कुमार को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर बुलाया। जब वह दफ्तर पहुंचा, तो भ्रष्टाचार के इस ‘खिलाड़ी’ के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। गिरफ्तारी का खौफ साफ दिख रहा था, हाथ-पैर कांप रहे थे। ढाई घंटे की पूछताछ में अफसरों ने उसके सामने 20 कड़े सवाल पूछे। शुरुआती घबराहट के बाद जब गोपाल को अहसास हुआ कि आज उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी, तब जाकर उसकी सांस में सांस आई। हालांकि, उस दिन उसने किसी भी सवाल का सीधा और सही जवाब नहीं दिया। अब 5 जून को जांच एजेंसी दोबारा पूछताछ करेगी। इसी दिन गोपाल कुमार को दोबारा EOU के सवालों के चक्रव्यूह का सामना करना होगा और देखना होगा कि इस बार ‘काली कमाई’ के कौन-से नए पन्ने खुलते हैं।


