बड़वानी में भारतीय किसान संघ ने मंगलवार दोपहर 1.30 बजे 37 मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपा। इसमें फसल बीमा, MSP पर खरीदी, खाद, मंडी व्यवस्था, बिजली, सिंचाई और राजस्व से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। फसल बीमा में शॉर्टफॉल रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग किसान संघ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दावा राशि के भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की मांग की। संगठन ने जिले की शॉर्टफॉल रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा है। इसमें वास्तविक उपज, थ्रेशोल्ड उपज और उपज में कमी की जानकारी शामिल करने की मांग की गई है। संघ ने रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट के बजाय फसल कटाई प्रयोग के आधार पर बीमा आकलन करने की मांग की। केला और मिर्च को भी फसल बीमा योजना में शामिल करने की बात कही गई। खरीफ में ज्यादा बारिश, कम उपज, वायरस और बीमारियों से हुए नुकसान पर भी बीमा का लाभ देने की मांग की गई। 15 सितंबर से मंडियों में ग्रेडिंग मशीन लगाने की मांग किसान संघ ने कृषि उपज मंडियों में 15 सितंबर से आधुनिक मानक परीक्षण, डैमेज टेस्टिंग और ग्रेडिंग मशीनें लगाने की मांग की। संगठन ने समर्थन मूल्य पर उपज की बिक्री सुनिश्चित करने की बात कही। ट्रैक्टर-ट्रॉली की तौल 10 टन वाले बड़े कांटे से कराने और मंडियों के कैमरे 24 घंटे चालू रखने की मांग की गई। कैमरे बंद मिलने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई करने को कहा गया। सोयाबीन समेत खरीफ फसलों की MSP पर खरीदी संघ ने सोयाबीन की MSP पर खरीदी के लिए पंजीयन तुरंत शुरू करने की मांग की। धान, मक्का, ज्वार, बाजरा समेत खरीफ की सभी फसलों की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग की गई। प्रदेश में बंद पड़ी कृषि उपज मंडियों को दोबारा शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। खाद की कमी दूर करने की मांग किसान संघ ने कहा कि पिछले दो महीने से प्रदेश में रासायनिक खाद को लेकर किसानों को परेशानी हो रही है। सरकार से पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई। NPK खाद पर DAP की तरह सब्सिडी देने और वितरण व्यवस्था आसान करने की मांग की गई। खराब गुणवत्ता वाले कृषि आदानों पर कार्रवाई और दोषियों के लिए सजा का प्रावधान करने की बात कही गई। जंगली पशुओं से नुकसान पर मुआवजा मांगा कृषि यंत्रों पर अनुदान और उनका कोटा बढ़ाने की मांग की गई। जंगली पशुओं से फसल खराब होने पर किसानों को मुआवजा देने और तार फेंसिंग पर अनुदान देने की मांग की गई। देसी गाय के दूध पर 10 रुपए प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि और प्रदेश में कृषि न्यायालय बनाने की मांग भी की गई। ट्रांसफार्मर 24 घंटे में बदलने की मांग सिंचाई की बंद परियोजनाओं को पूरा करने और नहरों की समय से पहले मरम्मत व सफाई कराने की मांग की गई। बिजली व्यवस्था में संभाग स्तर पर किसान प्रतिनिधियों की समिति बनाने, अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और डीसी स्तर पर 15 ट्रांसफार्मरों का बैंक बनाने की मांग की गई। गलत बिलिंग की शिकायतों के निराकरण के लिए बंद कमेटी फिर शुरू करने और जले ट्रांसफार्मर 24 घंटे में बदलने के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू करने की मांग की गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार दिन में 10 घंटे बिजली देने की मांग भी रखी गई। नामांतरण और खेतों के रास्ते दर्ज करने की मांग राजस्व मामलों में रजिस्ट्री के साथ नामांतरण के दस्तावेज देने की मांग की गई। खेतों के परंपरागत रास्तों को नक्शे में दर्ज करने और खेत सड़क योजना शुरू कर उसे VB-G RAM-G में शामिल करने की मांग रखी गई। हर तीन महीने में राजस्व जागरूकता पखवाड़ा चलाने और फौती नामांतरण तय समय में करने की मांग भी ज्ञापन में है। निजी जमीन पर लगे सागवान की कटाई का अधिकार किसान को देने और भूमि अधिग्रहण में ग्रामसभा की अनुमति के बाद बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग की गई।

