नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल के बाद अब नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार का नया दौर शुरू हो गया है। JDU का दावा है कि सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के सुशासन और विकास के विजन को ही आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। हालांकि, सम्राट ने अपने 35 दिन के कार्यकाल में अपने नीतिगत फैसलों से अलग लकीर खींचनी शुरू कर दी है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में सम्राट सरकार के 4 फैसले, जो नीतीश मॉडल को पलटते दिख रहे… 1. जनता दरबार की जगह सहयोग शिविर CM सम्राट चौधरी ने सभी पंचायतों में हर मंगलवार को सहयोग शिविर लगाने का आदेश दिया है। 19 मई से इसकी शुरुआत हो गई। इसमें सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिले की एक पंचायत में जाकर लोगों की समस्याएं सुननी हैं। CM सम्राट चौधरी खुद सोनपुर प्रखंड की एक पंचायत में गए और लोगों की समस्याएं सुनी। 30 दिन में करना होगा समाधान नीतीश क्या करते थे- नीतीश कुमार जनता दरबार लगाते थे। उन्होंने इसकी शुरुआत 2006 में की थी। बीच में कुछ सालों (2016 से 2021 के बीच) के लिए यह बंद हुआ था, लेकिन 12 जुलाई 2021 से इसे नए नियमों और पूरी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ फिर से शुरू किया गया था। नीतीश काल में 60 दिन के अंदर करना था शिकायतों का निपटारा सम्राट का सहयोग शिविर नीतीश से अलग कैसे? 2. क्राइम कंट्रोल का सम्राट फॉर्मूला- पुलिस का हाथ खोल दिया CM सम्राट ने कहा- अपराधियों को उन्हीं की भाषा में पुलिस जवाब दे रही है। हमने पुलिस का हाथ खोल दिया है। बिहार सुशासन वाला राज्य है। इसे हर हाल में कायम रखना है। किसी कीमत पर अपराधी बचेंगे नहीं। सम्राट चौधरी ने कहा- 15 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ घिनौना अपराध करने वालों को माला नहीं पहनाएं, बल्कि उन पर माला चढ़ा दें। ऐसे अपराधियों को लाने या उन पर दूसरे किसी कार्रवाई की बिल्कुल जरूरत नहीं। क्राइम, करप्शन व कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा। इसका नतीजा है कि उनके गृह मंत्री और अब मुख्यमंत्री बनने के बाद यानी 20 नवंबर 2025 के बाद से 19 मई 2026 तक कुल 22 एनकाउंटर हुए, जिसमें 6 अपराधी मारे गए। सम्राट चौधरी के हाथ खोल देने का असल मतलब… नीतीश मॉडल- ना फंसाते हैं; ना बचाते हैं, कानून अपना काम करेगा 3. कैबिनेट बैठक का दिन बदला, तौर-तरीका भी सम्राट चौधरी हर बुधवार को कैबिनेट की बैठक कर रहे हैं। जबकि, नीतीश कुमार हर मंगलवार या शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक करते थे। सम्राट चौधरी ने सिर्फ बैठक का दिन ही नहीं बदला है, उसमें कई बदलाव किए हैं… कैबिनेट की बैठक का पॉलिटिकल माइलेज कैबिनेट में मंत्रियों की राह अहम 4. नीतीश ने बुनियाद मजबूत की, आगे सम्राट की बारी नीतीश कुमार का फोकस बुनियादी ढांचे के विस्तार और सामाजिक कल्याण पर था। वहीं, सम्राट चौधरी का अप्रोच शहरीकरण के आधुनिकीकरण, आर्थिक संरक्षण और प्राइवेट स्कूलों पर कड़े नियंत्रण की ओर है। दोनों के अप्रोच में 4 अंतर… 1. सम्राट का शहरों के विकास पर ज्यादा 2. अर्थव्यवस्था और रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता 3. क्वालिटी एजुकेशन पर ज्यादा जोर, हर ब्लॉक में डिग्री कॉलेज 4. प्राइवेट स्कूल और कोचिंग पर लगाम की कोशिश नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल के बाद अब नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार का नया दौर शुरू हो गया है। JDU का दावा है कि सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के सुशासन और विकास के विजन को ही आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। हालांकि, सम्राट ने अपने 35 दिन के कार्यकाल में अपने नीतिगत फैसलों से अलग लकीर खींचनी शुरू कर दी है। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में सम्राट सरकार के 4 फैसले, जो नीतीश मॉडल को पलटते दिख रहे… 1. जनता दरबार की जगह सहयोग शिविर CM सम्राट चौधरी ने सभी पंचायतों में हर मंगलवार को सहयोग शिविर लगाने का आदेश दिया है। 19 मई से इसकी शुरुआत हो गई। इसमें सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिले की एक पंचायत में जाकर लोगों की समस्याएं सुननी हैं। CM सम्राट चौधरी खुद सोनपुर प्रखंड की एक पंचायत में गए और लोगों की समस्याएं सुनी। 30 दिन में करना होगा समाधान नीतीश क्या करते थे- नीतीश कुमार जनता दरबार लगाते थे। उन्होंने इसकी शुरुआत 2006 में की थी। बीच में कुछ सालों (2016 से 2021 के बीच) के लिए यह बंद हुआ था, लेकिन 12 जुलाई 2021 से इसे नए नियमों और पूरी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ फिर से शुरू किया गया था। नीतीश काल में 60 दिन के अंदर करना था शिकायतों का निपटारा सम्राट का सहयोग शिविर नीतीश से अलग कैसे? 2. क्राइम कंट्रोल का सम्राट फॉर्मूला- पुलिस का हाथ खोल दिया CM सम्राट ने कहा- अपराधियों को उन्हीं की भाषा में पुलिस जवाब दे रही है। हमने पुलिस का हाथ खोल दिया है। बिहार सुशासन वाला राज्य है। इसे हर हाल में कायम रखना है। किसी कीमत पर अपराधी बचेंगे नहीं। सम्राट चौधरी ने कहा- 15 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ घिनौना अपराध करने वालों को माला नहीं पहनाएं, बल्कि उन पर माला चढ़ा दें। ऐसे अपराधियों को लाने या उन पर दूसरे किसी कार्रवाई की बिल्कुल जरूरत नहीं। क्राइम, करप्शन व कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा। इसका नतीजा है कि उनके गृह मंत्री और अब मुख्यमंत्री बनने के बाद यानी 20 नवंबर 2025 के बाद से 19 मई 2026 तक कुल 22 एनकाउंटर हुए, जिसमें 6 अपराधी मारे गए। सम्राट चौधरी के हाथ खोल देने का असल मतलब… नीतीश मॉडल- ना फंसाते हैं; ना बचाते हैं, कानून अपना काम करेगा 3. कैबिनेट बैठक का दिन बदला, तौर-तरीका भी सम्राट चौधरी हर बुधवार को कैबिनेट की बैठक कर रहे हैं। जबकि, नीतीश कुमार हर मंगलवार या शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक करते थे। सम्राट चौधरी ने सिर्फ बैठक का दिन ही नहीं बदला है, उसमें कई बदलाव किए हैं… कैबिनेट की बैठक का पॉलिटिकल माइलेज कैबिनेट में मंत्रियों की राह अहम 4. नीतीश ने बुनियाद मजबूत की, आगे सम्राट की बारी नीतीश कुमार का फोकस बुनियादी ढांचे के विस्तार और सामाजिक कल्याण पर था। वहीं, सम्राट चौधरी का अप्रोच शहरीकरण के आधुनिकीकरण, आर्थिक संरक्षण और प्राइवेट स्कूलों पर कड़े नियंत्रण की ओर है। दोनों के अप्रोच में 4 अंतर… 1. सम्राट का शहरों के विकास पर ज्यादा 2. अर्थव्यवस्था और रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता 3. क्वालिटी एजुकेशन पर ज्यादा जोर, हर ब्लॉक में डिग्री कॉलेज 4. प्राइवेट स्कूल और कोचिंग पर लगाम की कोशिश


