300 से ज्यादा बेटियां वॉलीबॉल में दिखा रही टैलेंट:मेडल लाओ नौकरी पाओ स्कीम से बढ़ा मनोबल, 8 प्रमंडलों की टीमें शामिल

300 से ज्यादा बेटियां वॉलीबॉल में दिखा रही टैलेंट:मेडल लाओ नौकरी पाओ स्कीम से बढ़ा मनोबल, 8 प्रमंडलों की टीमें शामिल

बिहार बदल रहा है और इसकी सबसे खूबसूरत तस्वीर दिख रही है जमुई के सोनपे खेल मैदान पर। जहां बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय विद्यालय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में बेटियों का जमावड़ा लगा है। अंडर-14, 17 और 19 आयु वर्ग की इस प्रतियोगिता में बिहार के 8 प्रमंडलों की 24 टीमों की करीब 300 से अधिक बेटियां अपने सपने को पंख देने पहुंची हैं। सबकी आंखों में एक ही सपना है – नेशनल और इंटरनेशनल प्लेयर बनकर बिहार और देश का नाम रोशन करना।मैदान पर पीले और लाल जर्सी में इन बेटियों का जोश देखते ही बन रहा है। सर्विस, स्मैश और ब्लॉक करते हुए ये बेटियां सिर्फ गेंद नहीं, बल्कि पुरानी सोच को भी पीछे छोड़ रही हैं।खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार की योजनाओं ने उनके हौसले को नई उड़ान दी है। ”मेरा सपना इंडिया के लिए खेलना” वॉलीबॉल खिलाड़ी वरदान सिंह ने कहा, “बिहार सरकार की मेडल लाओ, नौकरी पाओ स्कीम से हम लड़कियों में जबरदस्त कॉन्फिडेंस आया है। अब लगता है कि खेलेंगे तो कुछ कर सकते हैं – खुद के लिए, परिवार के लिए और देश के लिए।” उन्होंने मांग रखी कि लड़कों की तरह लड़कियों के लिए भी वॉलीबॉल का एकलव्य स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाया जाए, जहाँ सेफ्टी से रहकर वो खुद को इम्प्रूव कर सकें। 5 साल से नेशनल खेल रही चाँदनी कुमारी ने कहा, “मैं 7 साल से खेल रही हूँ। सरकार स्कॉलरशिप दे रही है, नेशनल खेलने पर यूनिवर्सिटी में एडमिशन और मेडल पर नौकरी मिल रही है। 5-6 साल पहले इतनी लड़कियां नहीं थीं, अब गांव-गांव में हजारों लड़कियां खेल रही हैं। मेरा सपना इंडिया के लिए खेलना है।” प्रदर्शन के आधार पर बिहार टीम का चयन होगा वॉलीबॉल कोच अदिति सिंह ने कहा, “पहले टूर्नामेंट में इतनी लड़कियां नहीं आती थीं। अब घर वाले, समाज और सरकार सब जागरूक हैं। इतनी सुविधाएं मिल रही हैं तो बेटियां आगे आ रही हैं।” उन्होंने बेटियों को संदेश दिया, “वॉलीबॉल को पार्ट टाइम मत समझो, फुल टाइम करियर समझो। इसमें फ्यूचर है, पहचान है, नौकरी है। मेहनत करो, बिहार और इंडिया को वर्ल्ड में रिप्रेजेंट करो।” राज्य खेल संयोजक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह 70वीं राष्ट्रीय विद्यालय प्रतियोगिता के लिए चयन प्रतियोगिता है। “बिहार में पिछले 20 साल में लड़कियों की संख्या में दिन दूना रात चौगुना वृद्धि हुई है। गार्जियन अब खुद बच्चियों को मैदान भेज रहे हैं ताकि वो स्वस्थ रहें और करियर बनाएं। यहाँ 350 से अधिक बच्चियां आई हैं, रहने-खाने की सारी व्यवस्था सरकार की तरफ से है। प्रदर्शन के आधार पर बिहार टीम का चयन होगा और फिर प्रशिक्षण कैंप लगाया जाएगा।” सोनपे के इस मैदान से उठ रही आवाज साफ कह रही है “बिहार की बेटियां अब घर की चारदीवारी से निकलकर देश के लिए मेडल लाने को तैयार हैं।” बिहार बदल रहा है और इसकी सबसे खूबसूरत तस्वीर दिख रही है जमुई के सोनपे खेल मैदान पर। जहां बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय विद्यालय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में बेटियों का जमावड़ा लगा है। अंडर-14, 17 और 19 आयु वर्ग की इस प्रतियोगिता में बिहार के 8 प्रमंडलों की 24 टीमों की करीब 300 से अधिक बेटियां अपने सपने को पंख देने पहुंची हैं। सबकी आंखों में एक ही सपना है – नेशनल और इंटरनेशनल प्लेयर बनकर बिहार और देश का नाम रोशन करना।मैदान पर पीले और लाल जर्सी में इन बेटियों का जोश देखते ही बन रहा है। सर्विस, स्मैश और ब्लॉक करते हुए ये बेटियां सिर्फ गेंद नहीं, बल्कि पुरानी सोच को भी पीछे छोड़ रही हैं।खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार की योजनाओं ने उनके हौसले को नई उड़ान दी है। ”मेरा सपना इंडिया के लिए खेलना” वॉलीबॉल खिलाड़ी वरदान सिंह ने कहा, “बिहार सरकार की मेडल लाओ, नौकरी पाओ स्कीम से हम लड़कियों में जबरदस्त कॉन्फिडेंस आया है। अब लगता है कि खेलेंगे तो कुछ कर सकते हैं – खुद के लिए, परिवार के लिए और देश के लिए।” उन्होंने मांग रखी कि लड़कों की तरह लड़कियों के लिए भी वॉलीबॉल का एकलव्य स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाया जाए, जहाँ सेफ्टी से रहकर वो खुद को इम्प्रूव कर सकें। 5 साल से नेशनल खेल रही चाँदनी कुमारी ने कहा, “मैं 7 साल से खेल रही हूँ। सरकार स्कॉलरशिप दे रही है, नेशनल खेलने पर यूनिवर्सिटी में एडमिशन और मेडल पर नौकरी मिल रही है। 5-6 साल पहले इतनी लड़कियां नहीं थीं, अब गांव-गांव में हजारों लड़कियां खेल रही हैं। मेरा सपना इंडिया के लिए खेलना है।” प्रदर्शन के आधार पर बिहार टीम का चयन होगा वॉलीबॉल कोच अदिति सिंह ने कहा, “पहले टूर्नामेंट में इतनी लड़कियां नहीं आती थीं। अब घर वाले, समाज और सरकार सब जागरूक हैं। इतनी सुविधाएं मिल रही हैं तो बेटियां आगे आ रही हैं।” उन्होंने बेटियों को संदेश दिया, “वॉलीबॉल को पार्ट टाइम मत समझो, फुल टाइम करियर समझो। इसमें फ्यूचर है, पहचान है, नौकरी है। मेहनत करो, बिहार और इंडिया को वर्ल्ड में रिप्रेजेंट करो।” राज्य खेल संयोजक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह 70वीं राष्ट्रीय विद्यालय प्रतियोगिता के लिए चयन प्रतियोगिता है। “बिहार में पिछले 20 साल में लड़कियों की संख्या में दिन दूना रात चौगुना वृद्धि हुई है। गार्जियन अब खुद बच्चियों को मैदान भेज रहे हैं ताकि वो स्वस्थ रहें और करियर बनाएं। यहाँ 350 से अधिक बच्चियां आई हैं, रहने-खाने की सारी व्यवस्था सरकार की तरफ से है। प्रदर्शन के आधार पर बिहार टीम का चयन होगा और फिर प्रशिक्षण कैंप लगाया जाएगा।” सोनपे के इस मैदान से उठ रही आवाज साफ कह रही है “बिहार की बेटियां अब घर की चारदीवारी से निकलकर देश के लिए मेडल लाने को तैयार हैं।”  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *