किशनगंज जिले में लंबे समय से हड़ताल पर चल रहे 30 पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कार्यस्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण यह कार्रवाई की है। जारी आदेश के अनुसार, पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति से पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे थे। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना, वंशावली बनाना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन का सत्यापन और पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, षष्ठम राज्य वित्त आयोग योजना, 15वीं केंद्रीय वित्त आयोग योजना और मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी बाधित थे। भारत की जनगणना-2027 जैसे राष्ट्रव्यापी अभियान पर भी इसका असर पड़ रहा था। पंचायत कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ
प्रशासन ने बताया कि बिहार ग्राम पंचायत सचिव नियमावली-2011 के तहत पंचायत सचिवों के 31 प्रकार के कर्तव्यों का उल्लेख है। संबंधित पंचायतों में इन कर्तव्यों का पालन नहीं हो पा रहा था। पंचायत सचिवों की लगातार अनुपस्थिति के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे पंचायत कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार ने पूर्व में 15 अप्रैल, 21 अप्रैल और 13 मई 2026 को पत्रों के माध्यम से हड़ताल पर गए पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बावजूद, संबंधित कर्मी कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए। इसे सरकारी आदेश की अवहेलना और मनमानी कार्यशैली माना गया है। नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा
निलंबित पंचायत सचिव ठाकुरगंज, पोठिया, बहादुरगंज, टेढ़ागाछ, कोचाधामन, किशनगंज और दिघलबैंक सहित विभिन्न प्रखंडों में पदस्थापित थे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भी निर्धारित कर दिया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में इन पंचायत सचिवों को नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित पंचायत सचिवों के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार करें। इन्हें अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से 24 घंटे के भीतर जिला पंचायत शाखा को उपलब्ध कराना होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से पंचायत व्यवस्था में सख्ती का संदेश गया है। किशनगंज जिले में लंबे समय से हड़ताल पर चल रहे 30 पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कार्यस्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण यह कार्रवाई की है। जारी आदेश के अनुसार, पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति से पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे थे। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना, वंशावली बनाना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन का सत्यापन और पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, षष्ठम राज्य वित्त आयोग योजना, 15वीं केंद्रीय वित्त आयोग योजना और मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी बाधित थे। भारत की जनगणना-2027 जैसे राष्ट्रव्यापी अभियान पर भी इसका असर पड़ रहा था। पंचायत कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ
प्रशासन ने बताया कि बिहार ग्राम पंचायत सचिव नियमावली-2011 के तहत पंचायत सचिवों के 31 प्रकार के कर्तव्यों का उल्लेख है। संबंधित पंचायतों में इन कर्तव्यों का पालन नहीं हो पा रहा था। पंचायत सचिवों की लगातार अनुपस्थिति के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे पंचायत कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार ने पूर्व में 15 अप्रैल, 21 अप्रैल और 13 मई 2026 को पत्रों के माध्यम से हड़ताल पर गए पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के बावजूद, संबंधित कर्मी कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए। इसे सरकारी आदेश की अवहेलना और मनमानी कार्यशैली माना गया है। नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा
निलंबित पंचायत सचिव ठाकुरगंज, पोठिया, बहादुरगंज, टेढ़ागाछ, कोचाधामन, किशनगंज और दिघलबैंक सहित विभिन्न प्रखंडों में पदस्थापित थे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भी निर्धारित कर दिया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में इन पंचायत सचिवों को नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित पंचायत सचिवों के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार करें। इन्हें अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से 24 घंटे के भीतर जिला पंचायत शाखा को उपलब्ध कराना होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से पंचायत व्यवस्था में सख्ती का संदेश गया है।


