3 बार बदली आंसर-की:138 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा विवादों में फंस गई, नतीजा-184 सफल अभ्यर्थी बाहर हो गए

3 बार बदली आंसर-की:138 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा विवादों में फंस गई, नतीजा-184 सफल अभ्यर्थी बाहर हो गए

जेपीएससी की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा विवादों में फंस गई। 10 मार्च 2024 को हुई प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के बाद अभ्यर्थियों की आपत्ति पर तीन बार मॉडल आंसर-की बदली गई। नतीजा यह हुआ कि रिजल्ट ही बदल गया। पहले से पास 184 अभ्यर्थी बाहर हो गए। पीटी के बाद आयोग ने 29 मार्च 2024 को मॉडल आंसर-की जारी की। इस पर अभ्यर्थियों से आपत्ति मांगी गई। फिर 13 अप्रैल 2024 को संशोधित मॉडल आंसर-की जारी हुई। इसके बाद 13 मई 2024 को एक बार फिर संशोधित आंसर-की जारी की गई। मॉडल आंसर-की में ​त्रुटियों का मामला हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विषय विशेषज्ञों की कमेटी गठित की गई। इसकी सिफारिश पर आयोग ने तीन उत्तर को गलत माना। इससे पीटी का रिजल्ट ही बदल गया। इसी बीच 18 अगस्त 2026 को झारखंड सरकार ने परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल द्वारा ली गई परीक्षाओं को रद्द कर दिया। जानिए…क्यों बार-बार बदली गई आंसर-की was या were पर विवाद : बुकलेट -ए के प्रश्न संख्या 8 में अंग्रेजी व्याकरण से जुड़ा वाक्य था। विवाद इस बात पर था कि More than one boy के साथ was इस्तेमाल होगा या were। हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 के अपने फैसले में जेपीएससी द्वारा सही माने गए उत्तर को गलत माना। साथ ही संबंधित अभ्यर्थियों को अंक देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कौन-सी धारा थीं: प्रश्न संख्या 74 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में आईपीसी की धाराओं के संबंधित सवाल पूछे गए थे। हाईकोर्ट को बताया गया कि आंसर-की में जिस विकल्प को सही माना गया, उसमें धारा 506 भी थी, जबकि संबंधित आदेश के संदर्भ में धारा 505 का उल्लेख था। हाईकोर्ट ने इस प्रश्न को गलत आंसर-की से प्रभावित माना। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसी प्रश्न को विशेषज्ञों से दोबारा जांचने वाले तीन विवादित प्रश्नों में रखा। एक से अधिक विकल्पों की वैधता का विवाद: प्रश्न संख्या 96 भारतीय संविदा अधिनियम के एजेंसी संबंधी प्रावधानों पर आधारित था। हाईकोर्ट ने इस प्रश्न के विकल्पों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का परीक्षण किया और आयोग की आंसर-की को चुनौती देने वाली दलील को स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे उन तीन प्रश्नों में शामिल किया जिनकी दोबारा विशेषज्ञ जांच का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेषज्ञों की समिति ने उत्तर सुधार करने की सिफारिश की। फिर संशोधित परिणाम जारी किए गए। विज्ञापन से परीक्षा रद्द होने तक

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