डीईओ कार्यालय पहुंची छात्राएं। एजुकेशन रिपोर्टर | भागलपुर जगदीशपुर ब्लॉक की नीमा पंचायत में 25 गरीब छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा पर पूर्णविराम लगने की नौबत आ गई है। नीमा गांव स्थित मिडिल स्कूल खरवा से 8वीं पास करने वाले ये बच्चे पिछले 20 दिनों से 9वीं में दाखिले के लिए दर-दर भटक रहे हैं। परिजन चाहते हैं कि बच्चों का दाखिला गांव से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित पंचानन झा उच्च विद्यालय, बैजानी में हो। अब यह स्कूल मॉडल हो गया है। स्कूल प्रशासन सीटें फुल होने का हवाला देकर छात्बैरों को बैरंग लौटा रहा है। थक-हारकर बुधवार को 10 छात्राओं समेत उनके अभिभावक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। डीईओ ने दो टूक कह दिया कि उन्हें 6 किलोमीटर दूर दाउदबाट स्थित हाई स्कूल में ही नामांकन कराना होगा। अभिभावकों का कहना है कि दाउदबाट स्कूल जाने के लिए बच्चों को नीमा मोड़ से होकर व्यस्त बाइपास और मेन हाईवे से गुजरना पड़ेगा, जहां हर वक्त भारी वाहनों के कारण हादसे का खतरा रहता है। कई बच्चों को तो साइकिल चलानी भी नहीं आती। गरीब परिवारों के लिए प्रतिदिन 50 रुपए ऑटो या टोटो का भाड़ा वहन करना नामुमकिन है। अभिभावक भवेश राम और मीरा देवी ने कहा कि अगर हमारे बच्चों का दाखिला बैजानी के स्कूल में नहीं हुआ, तो हम उन्हें इतनी दूर पढ़ने नहीं भेजेंगे। हमारे बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित होकर घर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। डीईओ कार्यालय पहुंची छात्राएं। एजुकेशन रिपोर्टर | भागलपुर जगदीशपुर ब्लॉक की नीमा पंचायत में 25 गरीब छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा पर पूर्णविराम लगने की नौबत आ गई है। नीमा गांव स्थित मिडिल स्कूल खरवा से 8वीं पास करने वाले ये बच्चे पिछले 20 दिनों से 9वीं में दाखिले के लिए दर-दर भटक रहे हैं। परिजन चाहते हैं कि बच्चों का दाखिला गांव से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित पंचानन झा उच्च विद्यालय, बैजानी में हो। अब यह स्कूल मॉडल हो गया है। स्कूल प्रशासन सीटें फुल होने का हवाला देकर छात्बैरों को बैरंग लौटा रहा है। थक-हारकर बुधवार को 10 छात्राओं समेत उनके अभिभावक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। डीईओ ने दो टूक कह दिया कि उन्हें 6 किलोमीटर दूर दाउदबाट स्थित हाई स्कूल में ही नामांकन कराना होगा। अभिभावकों का कहना है कि दाउदबाट स्कूल जाने के लिए बच्चों को नीमा मोड़ से होकर व्यस्त बाइपास और मेन हाईवे से गुजरना पड़ेगा, जहां हर वक्त भारी वाहनों के कारण हादसे का खतरा रहता है। कई बच्चों को तो साइकिल चलानी भी नहीं आती। गरीब परिवारों के लिए प्रतिदिन 50 रुपए ऑटो या टोटो का भाड़ा वहन करना नामुमकिन है। अभिभावक भवेश राम और मीरा देवी ने कहा कि अगर हमारे बच्चों का दाखिला बैजानी के स्कूल में नहीं हुआ, तो हम उन्हें इतनी दूर पढ़ने नहीं भेजेंगे। हमारे बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित होकर घर बैठने को मजबूर हो जाएंगे।


