मोतिहारी शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी और एसपी की सख्ती का असर दूसरे ही दिन गायब होता नजर आया। शनिवार को शहर के सबसे व्यस्त छतौनी कचहरी चौक पर भीषण जाम लगा रहा। जाम की स्थिति इतनी गंभीर रही कि एक एंबुलेंस भी घंटों तक सड़क पर फंसी रही। इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। रोज जाम में फंस रहे शहरवासी छतौनी चौक पर रोजाना लगने वाले जाम से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। चौक पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद वाहनों का दबाव इतना अधिक रहता है कि ट्रैफिक संभालना मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि जाम के कारण उन्हें घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ता है और जरूरी काम प्रभावित होते हैं। डीएम-एसपी खुद उतरे थे सड़क पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को लेकर इससे पहले जिलाधिकारी और एसपी समेत पूरा पुलिस प्रशासन सड़क पर उतरा था। एसपी स्वर्ण प्रभात ने जाम की समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया था। मकसद शहर के प्रमुख चौक-चौराहों को जाम मुक्त करना था। 20 से ज्यादा अधिकारी, 100 जवान तैनात जाम से निपटने के लिए शहर के महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर 20 से ज्यादा अधिकारियों और करीब 100 जवानों की तैनाती की गई थी। एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि ठेले और टेंपो चौक से कम से कम 50 मीटर दूर लगाए जाएंगे, ताकि मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित न हो। दूसरे दिन ही टूट गई व्यवस्था प्रशासन की सख्ती के दूसरे ही दिन व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटती दिखाई दी। जिन जगहों पर ठेले और टेंपो को 50 मीटर दूर लगाने का आदेश दिया गया था, वहां शनिवार को फिर पहले की तरह ही वाहन और ठेले नजर आए। इससे अभियान की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। अतिक्रमण हटाने के नाम पर खानापूर्ति? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। यदि कार्रवाई के बाद भी ठेले और टेंपो दोबारा उन्हीं जगहों पर लग रहे हैं तो प्रशासन के आदेश का पालन कौन करा रहा है, यह बड़ा सवाल है। एंबुलेंस का जाम में फंसना गंभीर संकेत छतौनी कचहरी चौक पर एंबुलेंस का घंटों जाम में फंसे रहना ट्रैफिक व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दिखाता है। आपात स्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन सकता है। ऐसे में सवाल है कि पुलिस की तैनाती के बावजूद मुख्य चौक पर यातायात क्यों नहीं संभल पा रहा है। मोतिहारी शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी और एसपी की सख्ती का असर दूसरे ही दिन गायब होता नजर आया। शनिवार को शहर के सबसे व्यस्त छतौनी कचहरी चौक पर भीषण जाम लगा रहा। जाम की स्थिति इतनी गंभीर रही कि एक एंबुलेंस भी घंटों तक सड़क पर फंसी रही। इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। रोज जाम में फंस रहे शहरवासी छतौनी चौक पर रोजाना लगने वाले जाम से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। चौक पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद वाहनों का दबाव इतना अधिक रहता है कि ट्रैफिक संभालना मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि जाम के कारण उन्हें घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ता है और जरूरी काम प्रभावित होते हैं। डीएम-एसपी खुद उतरे थे सड़क पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को लेकर इससे पहले जिलाधिकारी और एसपी समेत पूरा पुलिस प्रशासन सड़क पर उतरा था। एसपी स्वर्ण प्रभात ने जाम की समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया था। मकसद शहर के प्रमुख चौक-चौराहों को जाम मुक्त करना था। 20 से ज्यादा अधिकारी, 100 जवान तैनात जाम से निपटने के लिए शहर के महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर 20 से ज्यादा अधिकारियों और करीब 100 जवानों की तैनाती की गई थी। एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि ठेले और टेंपो चौक से कम से कम 50 मीटर दूर लगाए जाएंगे, ताकि मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित न हो। दूसरे दिन ही टूट गई व्यवस्था प्रशासन की सख्ती के दूसरे ही दिन व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटती दिखाई दी। जिन जगहों पर ठेले और टेंपो को 50 मीटर दूर लगाने का आदेश दिया गया था, वहां शनिवार को फिर पहले की तरह ही वाहन और ठेले नजर आए। इससे अभियान की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। अतिक्रमण हटाने के नाम पर खानापूर्ति? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। यदि कार्रवाई के बाद भी ठेले और टेंपो दोबारा उन्हीं जगहों पर लग रहे हैं तो प्रशासन के आदेश का पालन कौन करा रहा है, यह बड़ा सवाल है। एंबुलेंस का जाम में फंसना गंभीर संकेत छतौनी कचहरी चौक पर एंबुलेंस का घंटों जाम में फंसे रहना ट्रैफिक व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दिखाता है। आपात स्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन सकता है। ऐसे में सवाल है कि पुलिस की तैनाती के बावजूद मुख्य चौक पर यातायात क्यों नहीं संभल पा रहा है।

