2.01 लाख में नीलाम हुई मां दुर्गा की माला:ठाकुरगंज में रावण दहन से पहले माता को अर्पित की गई

2.01 लाख में नीलाम हुई मां दुर्गा की माला:ठाकुरगंज में रावण दहन से पहले माता को अर्पित की गई

किशनगंज के ठाकुरगंज में दशहरा के अवसर पर रावण दहन के साथ एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां मां दुर्गा की माला की नीलामी के बाद उसे माता को अर्पित कर रावण दहन किया जाता है। इस साल देर रात आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में यह परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। मां दुर्गा की माला की नीलामी में पवन अग्रवाल ने 2 लाख 1 हजार रुपए की बोली लगाकर इसे अपने नाम किया। नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने के बाद पवन अग्रवाल ने माला मां दुर्गा को अर्पित की। इसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। ठाकुरगंज में रावण दहन का आयोजन केवल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां इससे जुड़ी एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा भी निभाई जाती है। नीलामी में श्रद्धालु लगाते हैं बोली मां दुर्गा की माला की नीलामी इस आयोजन का खास हिस्सा होती है। श्रद्धालु नीलामी में बोली लगाते हैं और सबसे अधिक बोली लगाने वाले व्यक्ति को माला प्राप्त होती है। इसके बाद माला मां दुर्गा को अर्पित की जाती है और फिर रावण दहन किया जाता है। इस वर्ष पवन अग्रवाल ने 2 लाख 1 हजार रुपए की बोली लगाकर नीलामी जीती। उनकी ओर से लगाई गई बोली आयोजन के दौरान चर्चा का विषय रही। नीलामी के बाद होता है रावण दहन दशहरा पर्व देशभर में रावण दहन के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध किए जाने की परंपरा के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। वहीं, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में मां दुर्गा की माला की नीलामी और उसे अर्पित करने की परंपरा इस आयोजन को अलग पहचान देती है। देर रात हुए रावण दहन के दौरान धार्मिक आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय स्तर पर इस परंपरा को ठाकुरगंज की विशेष पहचान के रूप में देखा जाता है। मां दुर्गा की माला की नीलामी के बाद रावण दहन किए जाने की यह परंपरा हर साल दशहरा उत्सव को खास बनाती है। किशनगंज के ठाकुरगंज में दशहरा के अवसर पर रावण दहन के साथ एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां मां दुर्गा की माला की नीलामी के बाद उसे माता को अर्पित कर रावण दहन किया जाता है। इस साल देर रात आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में यह परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। मां दुर्गा की माला की नीलामी में पवन अग्रवाल ने 2 लाख 1 हजार रुपए की बोली लगाकर इसे अपने नाम किया। नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने के बाद पवन अग्रवाल ने माला मां दुर्गा को अर्पित की। इसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। ठाकुरगंज में रावण दहन का आयोजन केवल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां इससे जुड़ी एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा भी निभाई जाती है। नीलामी में श्रद्धालु लगाते हैं बोली मां दुर्गा की माला की नीलामी इस आयोजन का खास हिस्सा होती है। श्रद्धालु नीलामी में बोली लगाते हैं और सबसे अधिक बोली लगाने वाले व्यक्ति को माला प्राप्त होती है। इसके बाद माला मां दुर्गा को अर्पित की जाती है और फिर रावण दहन किया जाता है। इस वर्ष पवन अग्रवाल ने 2 लाख 1 हजार रुपए की बोली लगाकर नीलामी जीती। उनकी ओर से लगाई गई बोली आयोजन के दौरान चर्चा का विषय रही। नीलामी के बाद होता है रावण दहन दशहरा पर्व देशभर में रावण दहन के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध किए जाने की परंपरा के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। वहीं, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में मां दुर्गा की माला की नीलामी और उसे अर्पित करने की परंपरा इस आयोजन को अलग पहचान देती है। देर रात हुए रावण दहन के दौरान धार्मिक आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय स्तर पर इस परंपरा को ठाकुरगंज की विशेष पहचान के रूप में देखा जाता है। मां दुर्गा की माला की नीलामी के बाद रावण दहन किए जाने की यह परंपरा हर साल दशहरा उत्सव को खास बनाती है।  

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