कानपुर देहात के अकबरपुर में मंगलवार रात दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। 156 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। रात करीब साढ़े आठ बजे भगवान श्रीराम के धनुष से निकले तीर के साथ ही रावण का पुतला धू-धूकर जल उठा। देखते ही देखते अहंकार और अधर्म का प्रतीक रावण आग की लपटों में समा गया। रावण दहन के दौरान पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। रावण और मेघनाद के पुतलों में आग लगते ही आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा। जवाबी आतिशबाजी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। श्रद्धालुओं ने उत्साह और आस्था के साथ रावण दहन का नजारा देखा और जय श्रीराम के नारे लगाए।
156 साल पुरानी है अकबरपुर की रामलीला अकबरपुर की रामलीला करीब 156 साल पुरानी है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। आयोजन पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी दी गई। रामलीला में धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। डीएम-एसपी और राज्यमंत्री रहे मौजूद रावण दहन कार्यक्रम में जिलाधिकारी कपिल सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला और पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। अकबरपुर की ऐतिहासिक रामलीला में रावण दहन के जरिए संदेश दिया गया कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में सत्य की ही जीत होती है।

