संत निरंकारी मिशन की रायपुर शाखा ने मारुति मंगलम भवन में रविवार को 13वें वार्षिक ज़ोनल निरंकारी बाल संत समागम का आयोजन किया। इसमें छत्तीसगढ़ के कई शहरों और गांवों से पहुंचे बच्चों ने भक्ति गीत, समूहगान, लघु नाटिका और कविताओं के माध्यम से मानवता और एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की शिक्षाओं को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महू-इंदौर से पहुंचे संत रमेश वस्त्रकार ने की। उन्होंने कहा कि ईश्वर की पहचान होने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। आज लोग सोशल मीडिया और सांसारिक चीजों में उलझकर जीवन का अमूल्य समय गंवा रहे हैं, जबकि ईश्वर से जुड़ने पर सच्चा सुख और शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि इंसानों के बीच जो भेदभाव की दीवार है, वह ब्रह्मज्ञान से खत्म हो सकती है। बच्चों ने प्रदर्शनी के जरिए दिया मानवता का संदेश मीडिया प्रभारी प्रेम सिंह धामी ने बताया कि कार्यक्रम में आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें बच्चों ने अलग-अलग मॉडल बनाकर मानवता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। प्रदर्शनी में सतगुरु की शिक्षाओं को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे लोगों ने काफी सराहा। बच्चों में संस्कारों का निर्माण कर रहा मिशन ज़ोनल इंचार्ज गुरबक्श सिंह कालरा ने कहा कि आज के बच्चे देश का भविष्य हैं। निरंकारी बाल संगत के माध्यम से बच्चों में प्रेम, दया, सेवा, करुणा और सद्भाव जैसे संस्कार विकसित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की व्यवस्था सेवादल के भाई-बहनों ने संभाली और आयोजन को सफल बनाया।


