Cyber Fraud : मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था का हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, अब ये राज्य फाइनेंशियल फ्रॉड का गढ़ बन चुका है। स्टेट साइबर सेल के 2026 के शुरुआती 4 महीनों के आंकड़े इसका खुलासा कर रहे हैं। जनवरी से अप्रैल तक यानी सिर्फ 120 दिनों के भीतर ही प्रदेश में 26 हजार से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें प्रदेश के लोगों की जेब से करीब 137 करोड़ रुपए पर ठगों ने हाथ साफ कर दिए हैं। यानी पूरे साल में फाइनेंशियल फ्रॉड की शिकायतों का आकलन करें तो ये आंकड़ा एक लाख छूने के आसार हैं।
साइबर फ्रॉड की वारदातें लोगों के लिए ही नहीं पुलिस का भी सिरदर्द बन चुकी हैं। बीते साल भी प्रदेश भर में 64 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिसमें 300 करोड़ से अधिक रुपए ठगों ने पार कर दिए थे।
भोपाल – इंदौर में प्रदेश की 40 फीसदी फ्रॉड की वारदातें
फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले में पूरे प्रदेश में भोपाल और इंदौर शहर सबसे अव्वल नंबर पर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कुल फ्रॉड का करीब 40 प्रतिशत भोपाल और इंदौर में हो रहा है। उसके बाद जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा जैसे शहर भी ठगों के खास निशाने पर हैं।
ऐसी हो रही ठगी की वारदातें
-बैंक: एटीएम, यूपीआई, ओटीपी या कार्ड की जानकारी चुराकर हो रहीं।
-ऑनलाइन स्कैम: फर्जी वेबसाइट, लॉटरी, नौकरी या निवेश के नाम पर।
-इन्वेस्टमेंट का झांसा: जल्दी पैसा दोगुना करने जैसी फर्जी स्कीम में पैसा निवेश करवाना।
-लोन फ्रॉड: नकली दस्वावेज से लोन देना या लोन का प्रलोभन देकर खाते साफ करना।
-फिशिंग: नकली एसएमएस, ईमेल या कॉल से बैंक डिटेल्स लेना।
फ्रॉड से बचने जागरूकता ही बचाव
-किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी, यूपीआइ पिन, एटीएम या बैंक डिटेल साझा न करें।
-बैंक, आरबीआइ या सरकारी एजेंसी कभी फोन पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगती, ऐसे कॉल पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
-मोबाइल पर आए किसी भी लिंक पर बिना जांच क्लिक न करें, खासकर केवाईसी, लोन या इनाम से जुड़े मैसेज पर।
-केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही ऐप डाउनलोड करें। हाई रिटर्न या गारंटीड प्रॉफिट जैसी स्कीमों से दूरी रखें।
-सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश और ट्रेडिंग ग्रुह्रश्वस पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
-परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जागरूक करें।
-ठगी होने पर तुरंत बैंक या साइबर हेल्पलाइन (1930) अथवा पोर्टल पर शिकायत करें।


