किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 9.16 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाया गया था। 12 मीटर चौड़े इस ब्रिज का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और आरामदायक वातावरण प्रदान करना था, जिसे स्टेशन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, इसके उद्घाटन के कुछ समय बाद ही इस परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए 12 पंखे अब फुट ओवरब्रिज से गायब हैं। छत से केवल पंखों को थामने वाली लोहे की रॉडें लटकती दिखाई दे रही हैं, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस संरचना की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है। यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए डिज़ाइन किया
रेलवे की परिकल्पना के अनुसार, यह 12 मीटर चौड़ा एफओबी भीड़ प्रबंधन का एक आधुनिक केंद्र था, जिसे बड़ी संख्या में यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसमें लिफ्ट की सुविधा भी शामिल थी, जिसे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। लेकिन अब इस आधुनिक संरचना में बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। गर्मी और उमस के मौसम में पंखों की अनुपस्थिति यात्रियों को सीधे प्रभावित कर रही है। यात्रियों का कहना है कि यदि पंखे किसी तकनीकी कारण से हटाए गए थे, तो उन्हें दोबारा क्यों नहीं लगाया गया। खाली लटकती रॉडें न केवल अधूरी व्यवस्था को दर्शाती हैं, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ाती हैं। एफओबी का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना
स्थानीय निवासियों ने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस आधुनिक एफओबी का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से पंखों के गायब होने के कारणों को स्पष्ट करने और सुविधाओं को तत्काल बहाल करने की मांग की है। यह स्थिति अब यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 9.16 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाया गया था। 12 मीटर चौड़े इस ब्रिज का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और आरामदायक वातावरण प्रदान करना था, जिसे स्टेशन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, इसके उद्घाटन के कुछ समय बाद ही इस परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए 12 पंखे अब फुट ओवरब्रिज से गायब हैं। छत से केवल पंखों को थामने वाली लोहे की रॉडें लटकती दिखाई दे रही हैं, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस संरचना की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गया है। यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए डिज़ाइन किया
रेलवे की परिकल्पना के अनुसार, यह 12 मीटर चौड़ा एफओबी भीड़ प्रबंधन का एक आधुनिक केंद्र था, जिसे बड़ी संख्या में यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसमें लिफ्ट की सुविधा भी शामिल थी, जिसे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। लेकिन अब इस आधुनिक संरचना में बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। गर्मी और उमस के मौसम में पंखों की अनुपस्थिति यात्रियों को सीधे प्रभावित कर रही है। यात्रियों का कहना है कि यदि पंखे किसी तकनीकी कारण से हटाए गए थे, तो उन्हें दोबारा क्यों नहीं लगाया गया। खाली लटकती रॉडें न केवल अधूरी व्यवस्था को दर्शाती हैं, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ाती हैं। एफओबी का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना
स्थानीय निवासियों ने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस आधुनिक एफओबी का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से पंखों के गायब होने के कारणों को स्पष्ट करने और सुविधाओं को तत्काल बहाल करने की मांग की है। यह स्थिति अब यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।


