मुजफ्फरपुर में बोचहां और मुशहरी की 100 से अधिक जीविका दीदियों से करोड़ों रुपए की कथित ठगी के मामले में बुधवार को एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव के कोर्ट में तीसरी सुनवाई हुई। इस दौरान जीविका दीदियों के साथ बैंक प्रतिनिधि और जीविका डीपीएम अनीशा भी मौजूद रहीं। सुनवाई में बैंक प्रतिनिधियों से लोन से संबंधित सभी जरूरी कागजात मांगे गए हैं। वहीं, डीपीएम से दीदियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाब देने को कहा गया है। इस बार भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की गई है। निदेशक की गिरफ्तारी के बाद डीपीएम पर सवाल सुनवाई के बाद जीविका दीदियों ने कहा कि जक्ष ग्रेविटी एंड एग्रो एनर्जी के निदेशक आशुतोष मंगलम की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब जीविका डीपीएम अनीशा को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए। दीदियों का आरोप है कि डीपीएम की निगरानी और कथित मिलीभगत के कारण इतनी बड़ी ठगी हुई। उन्होंने डीपीएम के साथ उनके पति उत्पल गांगुली की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। दीदियों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से वे न्याय की मांग कर रही हैं। हर स्तर पर अपनी बात रखने के बावजूद अब तक उन्हें ठोस राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर की सुनवाई उनके लिए अहम है। अगर इस दिन भी कोई निर्णय नहीं हुआ तो वे आमरण अनशन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगी। बैंक ने कहा- संदिग्ध मामला सामने आते ही ब्याज रोक दिया बुधवार की सुनवाई के दौरान बैंक प्रतिनिधियों से दीदियों के नाम पर लिए गए लोन के संबंध में जानकारी ली गई। बैंक की ओर से बताया गया कि जैसे ही मामला संदिग्ध होने की जानकारी मिली, उसी समय से टर्म लोन पर ब्याज की राशि जोड़ना बंद कर दिया गया था। इस पर जीविका दीदियों ने कहा कि ब्याज की राशि बंद हुई या जारी रही, इससे उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। उनकी मांग है कि बैंक से उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट दिया जाए। उनका कहना है कि जब उन्हें रोजगार ही नहीं मिला तो वे लोन की राशि कहां से चुकाएंगी। ‘मशरूम हट बनाया, रोजगार नहीं दिया’ बोचहां की जीविका दीदी गीता देवी ने कहा कि ठगी के बाद कई दीदियां आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। बैंक की ओर से नोटिस आने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया है। पति से भी ताने सुनने पड़ते हैं। गीता देवी के अनुसार, आशुतोष मंगलम ने मशरूम हट बनाकर प्रत्येक माह 28 हजार रुपए वेतन देने की बात कही थी। दीदियों ने रोजगार मिलने की उम्मीद में योजना से जुड़कर लोन लिया। आरोप है कि मशरूम हट बनाया गया, लेकिन रोजगार नहीं दिया गया और पूरा पैसा लेकर आरोपी भाग गया। दीदियों का कहना है कि उनके परिवार आर्थिक संकट में हैं और बैंक का लोन लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। वे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और लोन से मुक्ति की मांग कर रही हैं। 11 अगस्त को अनशन के बाद शुरू हुई कोर्ट में सुनवाई जीविका दीदियां इस मामले में करीब एक साल से न्याय और अपने ऊपर चढ़े लोन के बोझ से राहत की मांग कर रही हैं। हालांकि, एसडीएम पूर्वी के कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 19 अगस्त से शुरू हुई है। इससे पहले 11 अगस्त को जीविका दीदियां अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठी थीं। 12 अगस्त को एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव ने धरना स्थल पर पहुंचकर उनका अनशन खत्म कराया था। इसके बाद मामले को एसडीएम पूर्वी के कोर्ट में लिया गया और पहली सुनवाई 19 अगस्त को हुई। इसके बाद 2 सितंबर को दूसरी और 16 सितंबर को तीसरी सुनवाई हुई। तीनों सुनवाई के बाद भी अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। अब अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। 23 सितंबर पर टिकी नजर अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। जीविका दीदियों ने साफ कहा है कि यदि इस सुनवाई में भी उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी। वहीं, एसडीओ कोर्ट ने बैंक से लोन से जुड़े दस्तावेज और जीविका डीपीएम से आरोपों पर जवाब मांगा है। इससे अगली सुनवाई में मामले से जुड़े दस्तावेज और पक्षों के जवाब सामने आने की उम्मीद है। मुजफ्फरपुर में बोचहां और मुशहरी की 100 से अधिक जीविका दीदियों से करोड़ों रुपए की कथित ठगी के मामले में बुधवार को एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव के कोर्ट में तीसरी सुनवाई हुई। इस दौरान जीविका दीदियों के साथ बैंक प्रतिनिधि और जीविका डीपीएम अनीशा भी मौजूद रहीं। सुनवाई में बैंक प्रतिनिधियों से लोन से संबंधित सभी जरूरी कागजात मांगे गए हैं। वहीं, डीपीएम से दीदियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाब देने को कहा गया है। इस बार भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की गई है। निदेशक की गिरफ्तारी के बाद डीपीएम पर सवाल सुनवाई के बाद जीविका दीदियों ने कहा कि जक्ष ग्रेविटी एंड एग्रो एनर्जी के निदेशक आशुतोष मंगलम की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब जीविका डीपीएम अनीशा को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए। दीदियों का आरोप है कि डीपीएम की निगरानी और कथित मिलीभगत के कारण इतनी बड़ी ठगी हुई। उन्होंने डीपीएम के साथ उनके पति उत्पल गांगुली की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। दीदियों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से वे न्याय की मांग कर रही हैं। हर स्तर पर अपनी बात रखने के बावजूद अब तक उन्हें ठोस राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर की सुनवाई उनके लिए अहम है। अगर इस दिन भी कोई निर्णय नहीं हुआ तो वे आमरण अनशन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगी। बैंक ने कहा- संदिग्ध मामला सामने आते ही ब्याज रोक दिया बुधवार की सुनवाई के दौरान बैंक प्रतिनिधियों से दीदियों के नाम पर लिए गए लोन के संबंध में जानकारी ली गई। बैंक की ओर से बताया गया कि जैसे ही मामला संदिग्ध होने की जानकारी मिली, उसी समय से टर्म लोन पर ब्याज की राशि जोड़ना बंद कर दिया गया था। इस पर जीविका दीदियों ने कहा कि ब्याज की राशि बंद हुई या जारी रही, इससे उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। उनकी मांग है कि बैंक से उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट दिया जाए। उनका कहना है कि जब उन्हें रोजगार ही नहीं मिला तो वे लोन की राशि कहां से चुकाएंगी। ‘मशरूम हट बनाया, रोजगार नहीं दिया’ बोचहां की जीविका दीदी गीता देवी ने कहा कि ठगी के बाद कई दीदियां आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। बैंक की ओर से नोटिस आने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया है। पति से भी ताने सुनने पड़ते हैं। गीता देवी के अनुसार, आशुतोष मंगलम ने मशरूम हट बनाकर प्रत्येक माह 28 हजार रुपए वेतन देने की बात कही थी। दीदियों ने रोजगार मिलने की उम्मीद में योजना से जुड़कर लोन लिया। आरोप है कि मशरूम हट बनाया गया, लेकिन रोजगार नहीं दिया गया और पूरा पैसा लेकर आरोपी भाग गया। दीदियों का कहना है कि उनके परिवार आर्थिक संकट में हैं और बैंक का लोन लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। वे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और लोन से मुक्ति की मांग कर रही हैं। 11 अगस्त को अनशन के बाद शुरू हुई कोर्ट में सुनवाई जीविका दीदियां इस मामले में करीब एक साल से न्याय और अपने ऊपर चढ़े लोन के बोझ से राहत की मांग कर रही हैं। हालांकि, एसडीएम पूर्वी के कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 19 अगस्त से शुरू हुई है। इससे पहले 11 अगस्त को जीविका दीदियां अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठी थीं। 12 अगस्त को एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव ने धरना स्थल पर पहुंचकर उनका अनशन खत्म कराया था। इसके बाद मामले को एसडीएम पूर्वी के कोर्ट में लिया गया और पहली सुनवाई 19 अगस्त को हुई। इसके बाद 2 सितंबर को दूसरी और 16 सितंबर को तीसरी सुनवाई हुई। तीनों सुनवाई के बाद भी अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। अब अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। 23 सितंबर पर टिकी नजर अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। जीविका दीदियों ने साफ कहा है कि यदि इस सुनवाई में भी उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी। वहीं, एसडीओ कोर्ट ने बैंक से लोन से जुड़े दस्तावेज और जीविका डीपीएम से आरोपों पर जवाब मांगा है। इससे अगली सुनवाई में मामले से जुड़े दस्तावेज और पक्षों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

