‘होर्मुज में सेना भेजने पर कोई फैसला नहीं’, अमेरिकी दौरे से पहले बोले दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून

‘होर्मुज में सेना भेजने पर कोई फैसला नहीं’, अमेरिकी दौरे से पहले बोले दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून

Strait of Hormuz: दक्षिण कोरिया ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में सेना भेजने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने गुरुवार को अमेरिका रवाना होने से पहले यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज में किसी तरह की सैन्य तैनाती पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

चो ह्यून अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मुलाकात होनी है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और नौवहन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

होर्मुज में सेना भेजने पर अभी फैसला नहीं

चो ह्यून ने साफ किया कि दक्षिण कोरिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तैनाती को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। इससे पहले भी सियोल की तरफ से कहा गया था कि वह इस क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन और समुद्री सुरक्षा में मदद के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें सैन्य विकल्प भी शामिल हैं।

दक्षिण कोरिया ने हाल ही में स्थिति का जायजा लेने के लिए एक निरीक्षण दल भी होर्मुज क्षेत्र में भेजा था। इसका उद्देश्य क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति का आकलन करना था। इसके बाद भी सरकार ने कहा था कि किसी सैन्य तैनाती का फैसला नहीं लिया गया है।

रुबियो से होगी मुलाकात

चो ह्यून 17 से 19 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक होगी। बातचीत में अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंध, कोरियाई प्रायद्वीप और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। होर्मुज की सुरक्षा भी बातचीत का एक अहम मुद्दा है।

रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच करीब 350 अरब डॉलर के दक्षिण कोरियाई निवेश समझौते को लागू करने से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे। इस समझौते को लेकर कुछ मामलों पर अभी सहमति बाकी है।

अमेरिका चाहता है सहयोग

होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित सैन्य भूमिका को लेकर दक्षिण कोरिया पर अमेरिका की ओर से दबाव भी रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दक्षिण कोरिया से इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रयासों में मदद करने की अपील की थी। सियोल ने इसके बाद अपने विकल्पों की समीक्षा शुरू की।

दक्षिण कोरिया के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। ऐसे में सियोल की प्राथमिकता इस क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन बनाए रखना है।

ईरान से भी हुई थी बातचीत

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने 11 सितंबर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और सुरक्षित नौवहन को लेकर चर्चा की थी। सियोल ने कहा था कि वह क्षेत्र में स्थिरता और समुद्री आवाजाही को लेकर स्थिति पर नजर रख रहा है।

ईरान पहले ही दक्षिण कोरिया की संभावित सैन्य भूमिका पर आपत्ति जता चुका है। तेहरान ने कहा है कि होर्मुज या खाड़ी क्षेत्र में किसी दक्षिण कोरियाई सैन्य मौजूदगी को वह गंभीरता से लेगा। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने लगातार कहा है कि उसने अभी तक सेना भेजने का फैसला नहीं किया है।

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