हाथरस भगदड़ मामले में दरोगा की गवाही:बोले- अलीगढ़ में 38 शवों का पोस्टमार्टम, भगदड़ में दबने से हुई मौत; 24 सितंबर को सुनवाई

हाथरस भगदड़ मामले में दरोगा की गवाही:बोले- अलीगढ़ में 38 शवों का पोस्टमार्टम, भगदड़ में दबने से हुई मौत; 24 सितंबर को सुनवाई

हाथरस में सिकंद्राराऊ कोतवाली क्षेत्र के फुलरई-मुगलगढ़ी गांव में 2 जुलाई 2024 को भोले बाबा के सत्संग के बाद हुई भगदड़ के मामले में बुधवार दोपहर करीब एक बजे कोर्ट में दरोगा मनीष कुमार की गवाही हुई। हादसे में 121 लोगों की मौत हुई थी और 150 से अधिक लोग घायल हुए थे। वर्तमान में अलीगढ़ के चंडौस थाने में तैनात उपनिरीक्षक मनीष कुमार ने उस समय अलीगढ़ की बन्नादेवी थाने में तैनाती के दौरान की गई कार्रवाई के संबंध में बयान दर्ज कराए। अलीगढ़ मोर्चरी में शवों के पंचनामे की ड्यूटी थी आरोपी पक्ष के वकील मुन्ना सिंह पुंडीर के मुताबिक, दरोगा ने गवाही में बताया कि सत्संग के बाद भगदड़ में हुई मौतों में से करीब 38 शव पोस्टमार्टम के लिए अलीगढ़ मोर्चरी पहुंचे थे। जिला अस्पताल मलखान सिंह की मोर्चरी में शवों का पंचनामा करने के लिए उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। उन्होंने बताया कि मोर्चरी में रखे शवों में मृतका मीना देवी पत्नी मदनलाल, निवासी सलीमपुर पीरौनन्दा, थाना कोतवाली, जनपद कासगंज की पहचान उनके परिजनों से कराई गई। इसके बाद शव का निरीक्षण किया गया। पंचनामा में चोट के निशान नहीं होने का उल्लेख वकील के अनुसार, दरोगा ने बताया कि पंचों को नियुक्त कर उनकी मौजूदगी में शव का परीक्षण किया गया था। मृतका के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं मिला था, जिसका उल्लेख पंचनामा प्रदर्श क-154 में किया गया। गवाही के मुताबिक, पंचों की राय में मौत भगदड़ के दौरान भीड़ में दबने से आई चोटों के कारण हुई थी। इस मामले में पुलिस कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *