हाईकोर्ट का फैसला: गेहूं खरीद का भुगतान एक माह में:यूपी सरकार की दलीलें खारिज, 1,975 प्रति क्विंटल की दर से दें रुपये

हाईकोर्ट का फैसला: गेहूं खरीद का भुगतान एक माह में:यूपी सरकार की दलीलें खारिज, 1,975 प्रति क्विंटल की दर से दें रुपये

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों के हक में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि राज्य का कोई अधिकारी या क्रय केंद्र प्रभारी पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री (फीडिंग) करने में लापरवाही बरतता है या धोखाधड़ी करता है, तो उसकी सजा किसानों को नहीं दी जा सकती। अदालत ने प्रादेशिक को-ऑपरेटिव फेडरेशन और संबंधित राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 8 पीड़ित किसानों को उनके द्वारा बेचे गए गेहूं का बकाया भुगतान एक महीने के भीतर न्यूनतम समर्थन मूल्य के हिसाब से सुनिश्चित करें। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा माननीय न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने श्रवण कुमार व 7 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 5 अन्य पर सुनवाई करते हुए सुनाया। क्या है मामला जानिये यह मामला मऊ जिले के लाखीपुर स्थित पीसीएफ गेहूं क्रय केंद्र का है, जहां रबी विपणन वर्ष 2021-22 में 8 स्थानीय किसानों ने ₹1,975 प्रति क्विंटल की दर से कुल 206 क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर जमा कराया था। क्रय केंद्र प्रभारी (यासिर अराफत) ने किसानों को गेहूं प्राप्ति की रसीदें तो जारी कर दीं, लेकिन ई-उपार्जन पोर्टल पर इसकी ऑनलाइन फीडिंग नहीं की। नतीजतन, महीनों बीत जाने के बाद भी किसानों के खातों में फसल का भुगतान नहीं पहुँचा। जब किसानों ने शिकायत दर्ज कराई, तो जांच में सामने आया कि केंद्र प्रभारी ने जानबूझकर ऑनलाइन फीडिंग नहीं की और धनराशि का गबन कर लिया। इसके बाद केंद्र प्रभारी के खिलाफ मऊ के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और उसे निलंबित कर दिया गया। यूपी सरकार ने तर्क दिए अदालत में राज्य सरकार और पीसीएफ के वकीलों ने तर्क दिया कि रबी खरीद नीति के तहत केवल ई-प्रोक्योरमेंट और ई-पॉप रसीद के आधार पर ही ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना था कि हस्तलिखित रसीदों के आधार पर भुगतान नहीं किया जा सकता और जब तक जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य पर भुगतान की जिम्मेदारी नहीं बनती। सरकार की दलीलें खारिज हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पीसीएफ की इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जब किसानों ने अपना अनाज सरकारी क्रय केंद्र पर जमा कर दिया और रसीद हासिल कर ली, तो उसके बाद पोर्टल पर एंट्री न होना प्रशासनिक और संस्थागत विफलता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्र प्रभारी द्वारा गबन या धोखाधड़ी का मामला विभाग और उस कर्मचारी के बीच का अंदरूनी मामला है, जिसके लिए किसानों का जायज हक नहीं मारा जा सकता। 30 दिनों के भीतर भुगतान करें अदालत ने आदेश दिया कि याचिका में उल्लेखित गेहूं की मात्रा का सत्यापन कर किसानों को ₹1,975 प्रति क्विंटल की दर से पूरा भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार या पीसीएफ आरोपी केंद्र प्रभारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने और सरकारी धन के नुकसान की भरपाई उससे वसूलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

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