केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 48 शहरों की श्रेणी में मेरठ ने 22वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल मेरठ 33वें स्थान पर था। इस तरह शहर की रैंकिंग में 10 स्थान का सुधार हुआ है। हालांकि निर्धारित कई पैरामीटर पूरे नहीं होने के कारण मेरठ टॉप-5 शहरों में जगह नहीं बना सका। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के नतीजे घोषित किए। इस श्रेणी में लखनऊ ने पहला, इंदौर ने दूसरा और जबलपुर ने तीसरा स्थान हासिल किया। सर्वेक्षण में निर्धारित कुल 200 अंकों में मेरठ को 170.5 अंक मिले हैं। 22 जून से पांच जुलाई तक चले सर्वेक्षण में शहर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए किए गए कार्यों और निर्धारित पैरामीटर के आधार पर मूल्यांकन किया गया। नगर निगम, ऊर्जा निगम, परिवहन विभाग, यूपीसीडा और जिला आपूर्ति विभाग की ओर से संबंधित पैरामीटर के सापेक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इन पैरामीटर पर पिछड़ा मेरठ अधिकारियों के मुताबिक ताजा कूड़े के निस्तारण के लिए एनटीपीसी का प्रस्तावित प्लांट शुरू हो जाता तो सर्वेक्षण में मेरठ को अतिरिक्त अंक मिल सकते थे। इसके अलावा शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, ई-व्हीकल की संख्या में अपेक्षित वृद्धि और अधिकांश औद्योगिक इकाइयों के स्वच्छ ईंधन पर आने जैसे पैरामीटर भी पूरी तरह हासिल नहीं हो सके। इन बिंदुओं पर अंक कटने का असर मेरठ की अंतिम रैंकिंग पर पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि यदि सभी निर्धारित पैरामीटर पूरे हो जाते तो मेरठ की रैंकिंग में और बड़ा सुधार हो सकता था और शहर टॉप-5 में भी पहुंच सकता था। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले 10 स्थान का सुधार शहर में वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बेहतर परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।

