बीडीके अस्पताल एवं उससे संबद्ध राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत इंटर्न चिकित्सकों में स्टाइपेंड नहीं मिलने को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। इंटर्न चिकित्सकों का कहना है कि वे 20 जुलाई से नियमित रूप से अस्पताल में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। सुबह, शाम और रात की शिफ्ट में मरीजों की सेवा करने के बावजूद उन्हें अब तक स्टाइपेंड के नाम पर एक भी रुपया नहीं मिला है। इंटर्न चिकित्सकों का आरोप है कि प्रदेश में समान रूप से इंटर्नशिप करने के बावजूद स्टाइपेंड के मामले में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उनका दावा है कि राजस्थान के केवल पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों—जोधपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर और उदयपुर—में इंटर्न चिकित्सकों को 7300 रुपए स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर इंटर्न डॉक्टरों को इसका भुगतान नहीं हो रहा है। अधिकारियों के चक्कर काट रहे, समाधान नहीं इंटर्न चिकित्सकों ने बताया कि स्टाइपेंड को लेकर वे संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में समस्या बताने पर उन्हें डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। वहीं, DME कार्यालय की ओर से वापस RMC से संपर्क करने की बात कही जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि विभागीय स्तर पर एक-दूसरे के पास भेजे जाने के कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे इंटर्न चिकित्सकों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। हाईकोर्ट के आदेशों का भी दिया हवाला इंटर्न चिकित्सकों का कहना है कि फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) के स्टाइपेंड को लेकर न्यायालयों में भी मामले सामने आ चुके हैं। चिकित्सकों का दावा है कि हाईकोर्ट की ओर से भी FMG चिकित्सकों के स्टाइपेंड को लेकर आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा। इंटर्न चिकित्सकों का कहना है कि यदि वे अस्पताल में नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे हैं और इंटर्नशिप की निर्धारित जिम्मेदारियां निभा रहे हैं तो उन्हें भी नियमानुसार स्टाइपेंड मिलना चाहिए। चैरिटी नहीं, अपने हक की राशि मांग रहे इंटर्न चिकित्सकों ने कहा कि उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई और संबंधित परीक्षाओं को पास करने के बाद यह मुकाम हासिल किया है। उनका कहना है कि वे किसी प्रकार की चैरिटी या आर्थिक मदद नहीं मांग रहे हैं, बल्कि इंटर्नशिप के दौरान देय स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार FMG के लिए आयोजित परीक्षा बेहद कठिन होती है और इसका पासिंग प्रतिशत करीब 18 प्रतिशत तक रहने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में परीक्षा पास करने के बाद निर्धारित इंटर्नशिप पूरी करने वाले चिकित्सकों को यदि स्टाइपेंड नहीं मिलता है तो यह उनके साथ अन्याय है। एक ही प्रदेश में अलग-अलग व्यवस्था पर सवाल इंटर्न चिकित्सकों ने सवाल उठाया कि जब राजस्थान में इंटर्न डॉक्टरों के लिए नियम और ड्यूटी की व्यवस्था है तो स्टाइपेंड के भुगतान में अलग-अलग व्यवस्था क्यों है। उनका कहना है कि यदि कुछ मेडिकल कॉलेजों में 7300 रुपए का भुगतान किया जा सकता है तो अन्य मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत इंटर्न चिकित्सकों को इससे वंचित रखने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स को स्टाइपेंड का भुगतान किया जा रहा है, जबकि FMG सहित अन्य इंटर्न चिकित्सक इससे वंचित हैं। चिकित्सकों ने सरकार से पूरे प्रदेश में समान व्यवस्था लागू करने की मांग की है। सीएम और चिकित्सा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग बीडीके अस्पताल के इंटर्न चिकित्सकों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। चिकित्सकों का कहना है कि वे अस्पतालों में मरीजों की सेवा कर रहे हैं और अपनी इंटर्नशिप की जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि स्टाइपेंड से जुड़े नियमों की स्थिति स्पष्ट की जाए, पात्र इंटर्न चिकित्सकों का लंबित भुगतान जारी किया जाए तथा भविष्य में स्टाइपेंड भुगतान को लेकर प्रदेशभर में एक समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इंटर्न चिकित्सकों की प्रमुख मांगें

