सुरसंड की बघारी बनी पहली बाल श्रम मुक्त पंचायत:अब 18 महीने में बाल विवाह मुक्त बनाने का भी लिया संकल्प

सुरसंड की बघारी बनी पहली बाल श्रम मुक्त पंचायत:अब 18 महीने में बाल विवाह मुक्त बनाने का भी लिया संकल्प

सीतामढ़ी में सुरसंड प्रखंड की बघारी पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है। यह प्रखंड की पहली बाल श्रम मुक्त पंचायत है। इस उपलब्धि के बाद पंचायत ने अगले 18 महीने में खुद को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता, निगरानी और परिवारों से लगातार बातचीत की रणनीति पर काम होगा। बाल श्रम मुक्त पंचायत की घोषणा के लिए एक खास ग्राम सभा बुलाई गई थी। पंचायत में लगातार निगरानी जरूरी इसमें पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण, प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, पंचायत स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और अदिथी कवच परियोजना से जुड़े लोग शामिल हुए। ग्राम सभा में बच्चों को बाल श्रम से दूर रखने, उनकी पढ़ाई जारी रखने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने का सामूहिक संकल्प लिया गया। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रविभूषण कुमार ने कार्यक्रम में कहा कि किसी पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित करना ही आखिरी लक्ष्य नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती इस स्थिति को बनाए रखना है। इसके लिए पंचायत में लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि कोई भी बच्चा दोबारा बाल श्रम में न फंसे। पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प बघारी पंचायत के मुखिया पद्मराज भारद्वाज उर्फ पिंटू ने बताया कि बाल श्रम बच्चों से उनका बचपन और पढ़ाई छीन लेता है। पंचायत में इसे रोकने के लिए सिर्फ सरकारी कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और काम देने वालों को भी बाल श्रम से जुड़े कानूनों की जानकारी दी जाएगी। पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता और निगरानी अभियान चलेगा। बाल श्रम मुक्त पंचायत बनने के बाद बघारी ने अब बाल विवाह के खिलाफ अभियान शुरू करने की तैयारी की है। अगले 18 महीने में पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। इसके लिए परिवारों और समुदाय से बातचीत के अलावा स्कूलों, किशोर-किशोरियों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाई जाएगी। बघारी की यह पहल अब सिर्फ बाल श्रम मुक्त पंचायत की पहचान तक सीमित नहीं है। पंचायत ने अगले चरण में बाल विवाह के खिलाफ भी एक सामुदायिक अभियान चलाने का लक्ष्य तय किया है। सीतामढ़ी में सुरसंड प्रखंड की बघारी पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है। यह प्रखंड की पहली बाल श्रम मुक्त पंचायत है। इस उपलब्धि के बाद पंचायत ने अगले 18 महीने में खुद को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता, निगरानी और परिवारों से लगातार बातचीत की रणनीति पर काम होगा। बाल श्रम मुक्त पंचायत की घोषणा के लिए एक खास ग्राम सभा बुलाई गई थी। पंचायत में लगातार निगरानी जरूरी इसमें पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण, प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, पंचायत स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति और अदिथी कवच परियोजना से जुड़े लोग शामिल हुए। ग्राम सभा में बच्चों को बाल श्रम से दूर रखने, उनकी पढ़ाई जारी रखने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने का सामूहिक संकल्प लिया गया। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रविभूषण कुमार ने कार्यक्रम में कहा कि किसी पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित करना ही आखिरी लक्ष्य नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती इस स्थिति को बनाए रखना है। इसके लिए पंचायत में लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि कोई भी बच्चा दोबारा बाल श्रम में न फंसे। पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प बघारी पंचायत के मुखिया पद्मराज भारद्वाज उर्फ पिंटू ने बताया कि बाल श्रम बच्चों से उनका बचपन और पढ़ाई छीन लेता है। पंचायत में इसे रोकने के लिए सिर्फ सरकारी कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और काम देने वालों को भी बाल श्रम से जुड़े कानूनों की जानकारी दी जाएगी। पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता और निगरानी अभियान चलेगा। बाल श्रम मुक्त पंचायत बनने के बाद बघारी ने अब बाल विवाह के खिलाफ अभियान शुरू करने की तैयारी की है। अगले 18 महीने में पंचायत को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। इसके लिए परिवारों और समुदाय से बातचीत के अलावा स्कूलों, किशोर-किशोरियों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाई जाएगी। बघारी की यह पहल अब सिर्फ बाल श्रम मुक्त पंचायत की पहचान तक सीमित नहीं है। पंचायत ने अगले चरण में बाल विवाह के खिलाफ भी एक सामुदायिक अभियान चलाने का लक्ष्य तय किया है।  

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