‘पूर्वांचल महोत्सव-माटी 9; लोक संस्कृति और परंपराओं की दिखी झलक:पटना में सांसद जगदम्बिका पाल बोले- नई पीढ़ी को लोक परंपराओं, भाषा-संस्कृति से जोड़ना जरूरी

‘पूर्वांचल महोत्सव-माटी 9; लोक संस्कृति और परंपराओं की दिखी झलक:पटना में सांसद जगदम्बिका पाल बोले- नई पीढ़ी को लोक परंपराओं, भाषा-संस्कृति से जोड़ना जरूरी

पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आज ‘पूर्वांचल महोत्सव–माटी 9’ का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव में पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और कला की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसद जगदम्बिका पाल, मंत्री प्रमोद कुमार सहित तमाम बड़े नेता शामिल हुए। पूर्वांचल महोत्सव–माटी 9 कार्यक्रम की तस्वीरें… ‘माटी’ सिर्फ उत्सव नहीं, अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ‘माटी’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का माध्यम है। पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति सदियों पुरानी परंपराओं को अपने अंदर समेटे हुए है। सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा, ‘आज के समय में आधुनिक जीवनशैली तेजी से बदल रही है। ऐसे में नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, भाषा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। ‘माटी’ जैसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और अपनी मिट्टी से जुड़ने का अवसर देते हैं।’ समाज और संस्कृति के लिए काम करने वालों को ‘माटी सम्मान’ महोत्सव के दौरान समाज, कला, संस्कृति और अपनी मिट्टी के लिए उल्लेखनीय काम करने वाली विभूतियों को ‘माटी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के जरिए उन लोगों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया, जिन्होंने अपनी कला और सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। संस्कृति और पर्यटन पर हुआ विचार-विमर्श कार्यक्रम में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को लेकर विचार-विमर्श भी हुआ। प्रबुद्ध लोगों और विचारकों ने लोक कलाओं के संरक्षण और उन्हें नए मंच उपलब्ध कराने की जरूरत पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि बिहार और पूर्वांचल की संस्कृति में बड़ी विविधता है। इसे संरक्षित करने के साथ-साथ देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है। पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आज ‘पूर्वांचल महोत्सव–माटी 9’ का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव में पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और कला की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसद जगदम्बिका पाल, मंत्री प्रमोद कुमार सहित तमाम बड़े नेता शामिल हुए। पूर्वांचल महोत्सव–माटी 9 कार्यक्रम की तस्वीरें… ‘माटी’ सिर्फ उत्सव नहीं, अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ‘माटी’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का माध्यम है। पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति सदियों पुरानी परंपराओं को अपने अंदर समेटे हुए है। सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा, ‘आज के समय में आधुनिक जीवनशैली तेजी से बदल रही है। ऐसे में नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं, भाषा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। ‘माटी’ जैसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और अपनी मिट्टी से जुड़ने का अवसर देते हैं।’ समाज और संस्कृति के लिए काम करने वालों को ‘माटी सम्मान’ महोत्सव के दौरान समाज, कला, संस्कृति और अपनी मिट्टी के लिए उल्लेखनीय काम करने वाली विभूतियों को ‘माटी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के जरिए उन लोगों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया, जिन्होंने अपनी कला और सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। संस्कृति और पर्यटन पर हुआ विचार-विमर्श कार्यक्रम में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को लेकर विचार-विमर्श भी हुआ। प्रबुद्ध लोगों और विचारकों ने लोक कलाओं के संरक्षण और उन्हें नए मंच उपलब्ध कराने की जरूरत पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि बिहार और पूर्वांचल की संस्कृति में बड़ी विविधता है। इसे संरक्षित करने के साथ-साथ देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है।  

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